टीपू सुल्तान पर खिंची सियासी तलवार! शिवाजी से तुलना करने पर BJP ने किया प्रदर्शन, जीभ कटने वाले को मिलेगा 10 लाख का ईनाम
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान ने सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है. पुणे में FIR दर्ज हुई, जबकि अहिल्यानगर में 10 लाख रुपये इनाम की घोषणा ने विवाद को और भड़का दिया.;
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर इतिहास और पहचान की बहस ने तूल पकड़ लिया है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के एक बयान ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है, जिसके बाद पुणे पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. विवाद की जड़ वह टिप्पणी है, जिसमें सपकाल ने टीपू सुल्तान को “बहादुरी का प्रतीक” बताते हुए उनकी तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी.
इस बयान के सामने आते ही भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया. पुणे में भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, वहीं अहिल्यानगर में कुछ भाजपा नेताओं ने सपकाल की जुबान काटने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा कर दी. इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.
महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान को लेकर क्या हो रहा है?
महाराष्ट्र के पुणे में राजनीतिक तनाव उस वक्त हिंसक झड़प में बदल गया, जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से किए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद सड़क पर उतर आया. प्रदर्शन के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते पथराव में बदल गई. इस झड़प में कई वाहनों को नुकसान पहुंचा. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा. हिंसा के दौरान तीन पत्रकार और दो कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है ताकि हालात काबू में रह सकें.
हर्षवर्धन सपकाल ने क्या कहा?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब पत्रकारों ने हर्षवर्धन सपकाल से पूछा कि क्या सभी महान नेताओं की तस्वीरें सरकारी कार्यालयों में एक साथ लगाई जानी चाहिए और क्या शिवाजी महाराज तथा टीपू सुल्तान की तस्वीरें साथ-साथ लगाई जानी चाहिए? इस पर जवाब देते हुए सपकाल ने कहा कि 'फडणवीस की पुरानी आदत, शब्दों को तोड़-मरोड़ कर ‘धा’ को ‘मा’ बना देने की, फिर से सामने आ गई है और उन्हें एक हिंदू-मुस्लिम विवाद खड़ा करने का मौका मिल गया है.”
उन्होंने आगे मराठी में कहा कि टीपू सुल्तान ने शिवाजी महाराज के आदर्शों का अनुसरण किया. उन्होंने कहा कि 'छत्रपति शिवाजी महाराज के पास जिस तरह की वीरता थी और उन्होंने ‘स्वराज्य’ (स्व-शासन) की जो अवधारणा दी… उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर बहुत बाद में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ा.”
उन्होंने आगे कहा, “उस अर्थ में टीपू सुल्तान एक महान योद्धा थे, जिन्होंने अद्भुत साहस का परिचय दिया और वे भारत के सच्चे सपूत थे. उन्होंने कभी भी किसी विषैली या सांप्रदायिक विचारधारा को खुद पर हावी नहीं होने दिया. बहादुरी के प्रतीक के रूप में हमें टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष देखना चाहिए.”
विवाद की पुरी कहानी
यह पूरा मामला मालेगांव नगर निगम के उपमहापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से जुड़ा है. शिवसेना और अन्य संगठनों ने इस तस्वीर का विरोध किया था. इसी संदर्भ में मीडिया से बातचीत के दौरान सपकाल ने अपनी टिप्पणी की थी.
टीपू सुल्तान, जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के लिए जाना जाता है, को लेकर पहले भी राजनीतिक और वैचारिक विवाद होते रहे हैं. अब शिवाजी महाराज से तुलना के कारण यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है.
भाजपा की शिकायत में क्या कहा गया?
पुणे भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि सपकाल की टिप्पणी से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. शिकायत में कहा गया कि टीपू सुल्तान मुस्लिम थे और शिवाजी महाराज हिंदू शासक थे, ऐसे में दोनों की तुलना से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है.
घाटे ने कहा कि 'जो हिंदू छत्रपति शिवाजी महाराज को भगवान के रूप में मानते हैं, उनकी भावनाएं इस बयान से आहत हुई हैं. मुझे समझ नहीं आता कि हर्षवर्धन सपकाल इस तरह का बयान देकर क्या साबित करना चाहते हैं.' पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 192, 196(1), 196(2), 352 और 356(2) के तहत मामला दर्ज किया है. अधिकारियों के अनुसार मामले की आगे जांच जारी है.
10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा क्यों हुई?
सपकाल के बयान के विरोध में अहिल्यानगर में भाजपा नेताओं ने शिवाजी स्मारक के सामने प्रदर्शन किया. इसी दौरान कुछ नेताओं ने यह घोषणा की कि जो भी सपकाल की जुबान काटेगा, उसे 10 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने ‘जूता प्रदर्शन’ भी किया और सपकाल के खिलाफ नारेबाजी की. इस बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है.
क्या यह मामला और तूल पकड़ेगा?
इतिहास, आस्था और राजनीति के संगम पर खड़ा यह विवाद अब कानूनी दायरे में पहुंच चुका है. एक ओर कांग्रेस इसे वैचारिक अभिव्यक्ति का मामला बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा मान रही है. पुलिस जांच के साथ-साथ सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है. आने वाले दिनों में यह मामला सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा रूप ले सकता है.