PM राहत से लेकर 6 करोड़ लखपति दीदी तक, ये रहा Seva Teerth से मोदी का पहला फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ (Seva Teerth) से अपने पहले दिन चार बड़े फैसलों को मंजूरी दी. पीएम राहत से लेकर 6 करोड़ लखपति दीदी और 2 लाख करोड़ कृषि फंड तक, सरकार ने विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश किया.;

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By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 13 Feb 2026 3:22 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Seva Teerth से अपने पहले ही दिन कई अहम फैसले लिए, जो देश के हर वर्ग के हित में हैं. प्रधानमंत्री ने ऐसे फैसलों पर हस्ताक्षर किए जो सेवा और सुरक्षा की भावना को दर्शाते हैं. इन फैसलों में महिलाओं, युवाओं, किसानों और समाज के कमजोर वर्गों को सीधे लाभ मिलेगा.

इन पहलों में प्रमुख हैं पीएम राहत योजना, लखपति दीदी का लक्ष्य दोगुना करना, कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड में वृद्धि, और स्‍टार्टप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0.

PM RAHAT योजना: हर नागरिक के लिए जीवनरक्षक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने पीएम राहत योजना की मंजूरी दी. इसके तहत किसी भी दुर्घटना पीड़ित को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा, जिससे तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान नहीं जाएगी.

लखपति दीदी का लक्ष्य बढ़ाकर 6 करोड़

सरकार ने 3 करोड़ लखपति दीदी का आंकड़ा पहले ही पार कर लिया है. अब प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को 6 करोड़ तक बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे मार्च 2029 तक यह महत्वाकांक्षी योजना और भी व्यापक रूप लेगी.

किसानों के लिए बड़ा तोहफा: कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड 2 लाख करोड़

कृषि क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए, पीएम ने कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड का आवंटन 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया.

Startup India Fund of Funds 2.0: नवाचार की अगली लहर

भारत में नवाचार और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री ने Startup India FoF 2.0 को मंजूरी दी, जिसकी कोर्पस राशि 10,000 करोड़ रुपये होगी. यह योजना डीप टेक, शुरुआती चरण के विचार और उन्नत निर्माण तकनीक के लिए होगी.

इन पहलों से स्पष्ट है कि Seva Teerth से PM Modi का संदेश स्पष्ट है: विकास और सेवा सभी वर्गों के लिए, जिसमें गरीब, महिला, किसान और युवा शामिल हैं.

PM के ऐलान के साथ 'पावर सेंटर' का केंद्र बना 'सेवा तीर्थ'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को उस कॉम्प्लेक्स के नए नाम ला एलान किया, जिसमें प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO), नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट (NSCS) और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट हैं, जिसे अब ऑफिशियली सेवा तीर्थ के नाम से जाना जाएगा. साल 2014 से मोदी सरकार ने भारत के पुराने जमाने के निशानों से दूर जाने और सोच में बदलाव लाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं. पीएम के इस एलान के साथ ही अब सेवा तीर्थ देश की सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र हो गया है.

अब कॉलोनियल​ हिस्ट्री नहीं, भारतीयता की पहचान

भारत का प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) 1947 में आजादी के बाद से आज तक साउथ ब्लॉक, रायसीना हिल, नई दिल्ली से चलता आ रहा है. जब भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ, तो प्राइम मिनिस्टर सेक्रेटेरिएट ने साउथ ब्लॉक से काम करना शुरू किया, जो एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर के डिजाइन किए गए ब्रिटिश-युग के सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स का हिस्सा था. आजाद भारत के पहले PM, जवाहरलाल नेहरू ने साउथ ब्लॉक से काम किया और उनके बाद हर प्राइम मिनिस्टर यानी लाल बहादुर शास्त्री से लेकर इंदिरा गांधी, वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी तक ने वहीं से काम किया.

इस बिल्डिंग में मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स, मिनिस्ट्री ऑफ डिफेस, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (कुछ हद तक) भी थे. साउथ ब्लॉक भारत की एग्जीक्यूटिव पावर का सिंबॉलिक नर्व सेंटर बन गया.

1931 में अस्तित्व में आया था ये बिल्डिंग

1947 से पहले, वायसराय और गवर्नर-जनरल का सेक्रेटेरिएट अब राष्ट्रपति भवन और सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग (नॉर्थ और साउथ ब्लॉक) से चलता था. ब्रिटिश राज के समय प्राइम मिनिस्टर ऑफिस नहीं था. यह बिल्डिंग ब्रिटिश जमाने की सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग्स का हिस्सा थी, जो नई दिल्ली को शाही राजधानी बनाने के दौरान बनी थीं. इनका उद्घाटन 1931 में हुआ था.

आजादी के बाद शुरू में इसे प्राइम मिनिस्टर सेक्रेटेरिएट (PMS) कहा जाता था, लेकिन 1977 में जनता पार्टी सरकार के दौरान इस बिल्डिंग का नाम बदलकर प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (PMO) कर दिया गया.

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