EXCLUSIVE: कट्टर बनते बांग्लादेश को काबू करने का ‘मुस्लिम कार्ड’ प्लान, भारत अपनाए पाकिस्तान जैसी चाल!

बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता और संभावित सत्ता परिवर्तन से भारत की सुरक्षा व कूटनीति पर खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ‘मुस्लिम कार्ड’ के जरिए संवाद बढ़ाना भारत के लिए कारगर रणनीति हो सकती है.;

By :  संजीव चौहान
Updated On : 13 Feb 2026 9:54 AM IST

पाकिस्तान, चीन और अमेरिका के बहकावे में आकर आकंठ कट्टरता के दलदल में डूबते जा रहे बांग्लादेश का 13वीं लोकसभा के गठन के बाद और भी ज्यादा भयंकर-चरमपंथी कट्टर रूप भारत को देखने को मिलेगा. इस पर भी अगर कहीं मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के राष्ट्रपति (जिसकी पूरी संभावनाएं नजर आ रही हैं) बन गये, तब भारत के लिए बांग्लादेश और भी ज्यादा मुसीबत बन जाएगा.

ऐसे में भारत को अपने पड़ोसी घाघ-मक्कार दुश्मन नंबर देश पाकिस्तान की तरह उसी चतुरता से काम लेना चाहिए जैसे कि पाकिस्तान ने “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भारत से अपनी जान और खाल बचाने के लिए अमेरिका के तलवों को चाटकर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ‘शांति नोबल’ पुरस्कार की ही जग-हंसाई वाली बेतुकी मांग कर डाली. यहां मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भारत भी पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश के वैसे ही तलवे चाटे जैसे अमेरिका के पांव दबाने पाकिस्तान पहुंच गया.

'पाकिस्तानी तर्ज पर आगे बढ़ें हम'

''मेरे कहने का मतलब यह है कि पाकिस्तान ने भारत के हमलों से अपनी खाल बचाने की एवज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए हवा में ही शांति नोबल पुरस्कार दिए जाने की बेतुकी मांग कर डाली थी. भारत को भी अब कुछ कुछ अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हुए बांग्लादेश के साथ पाकिस्तान की तरह ही आगे बढ़ना चाहिए. वैसे वक्त आ चुका है कि अब भारत को बिगड़ते हुए बांग्लादेश को काबू करने के लिए वहां (बांग्लादेश में), भारतीय फौज के रिटायर्ड मुस्लिम अफसर और भारत के मजबूत नामचीन मुस्लिम लीडर्स को भेजना चाहिए.''

बिना हसीना के और खतरा

यह तमाम बेबाक बातें भारतीय थलसेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी ने बयान कीं. जे एस सोढ़ी स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन से एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे. बांग्लादेश के दो साल से भारत के प्रति बुरी तरह से बदल चुके रुख पर पूछे जाने पर सोढ़ी ने कहा, “अभी तो बांग्लादेश में 13वीं लोकसभा गठन के चुनाव हो रहे हैं. जबसे भारत ने पूर्वी पाकिस्तान को काटकर बांग्लादेश बनवाया है तब से ऐसा पहली बार हो रहा है वहां कि लोकसभा चुनाव में भारत की हितैषी बांग्लादेश अवामी लीग की प्रमुख और वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी चुनाव से बाहर है. शेख हसीना खुद अपनी जान बचाए हुए 5 अगस्त 2024 से भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं. ऐसे में बांग्लादेश के अंतरिम राजनीतिक सलाहकार मो. युनूस ही सबकुछ अपनी मर्जी से भारत विरोधी अभियान छेड़े हुए हैं. यह सब भी भारत के लिए ठीक नहीं है.”

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बेशर्म पाकिस्तान और वाहियात ट्रंप

आखिर आज जिस तरह से बांग्लादेश के साथ हमारे रिश्ते तल्ख हो चुके हैं, उसमें भारत को क्या करना चाहिए? पूछने पर पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल ने कहा, “पाकिस्तान को देखिए वह अपना उल्लू सीधा करने के लिए साम-दाम-दंड-भेद सब इस्तेमाल करने से नहीं शर्माता है. यहां तक कि जब भारत ऑपरेशन सिंदूर में उसे बुरी तरह से तबाह कर रहा था, और पाकिस्तान के कहने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को शांत करवा कर कथित रूप से ही सही मगर ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की जान बचवा ली थी. तब भारत के हाथों पिटने-मार खाने की बेइज्जती भूलकर पाकिस्तान तुरंत ट्रंप को शांति का नोबल पुरस्कर देने का राग अलापने लगा था. ऐसे जैसे की मानो पाकिस्तान के कहने पर ट्रंप जैसे वाहियात राष्ट्रपति के लिए शांति का नोबल पुरस्कार दे ही दिया जाएगा. ट्रंप न तो नोबल के लायक राष्ट्रपति या शख्शियत हैं, न उन्हें नोबल मिलने वाला है. फिर भी ट्रंप की नजरों में लगे हाथ पाकिस्तान तो अच्छा बन ही गया था न. इसमें न पाकिस्तान को कुछ खर्च हुआ न ट्रंप का. दोनों की “स्वत: शांति सुखाए” हो ली.

भारत को क्‍या करना चाहिए?

अपनी बात जारी रखते हुए सोढ़ी कहते हैं, “मैं यह नहीं कहता हूं कि हम पाकिस्तान के नक्श-ए-कदम पर आगे बढ़ें. या हम ट्रंप के सामने जाकर घुटने टेक दें या ट्रंप की खुशी में कसीदे पढ़ना शुरू कर दें. मैं भारत की अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति में बस इतना चाहता हूं कि पड़ोसी से रिश्ते खराब होना दुनिया में किसी के भी हित में नहीं होता है. आज भारत के 7-8 पड़ोसियों में हमारे साथ एक अदद इकलौता भूटान भर बचा है. वह भी बिचारा भारत के ही रहम-ओ-करम पर है. ऐसे में आपातकाल में जरूरत पड़ने पर भारत के साथ जब उसका कोई पड़ोसी मददगार के रूप में मौजूद ही नहीं होगा तो कैसी और काहे की मजबूत अंतरराष्ट्रीय कूटनीति या विदेश व रक्षा नीति? जंग किसी समस्या का समाधान नहीं है. मैं चाहता हूं कि जब बांग्लादेशी फौज भारत में अक्सर सैन्य-ट्रेनिंग लेने आ सकती है, तो फिर ऐसे में हमारे पूर्व मुस्लिम सैनिक अफसर और भारत के कुछ समझदार जिम्मेदार सच्चे मुस्लिम नेताओं को बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए. जो वहां के सुलझे हुए नेताओं और पूर्व फौजियों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में गहन और गंभीर विचार विमर्श करके, रिश्तों में खटास की गहरी होती जा रही खाई की गहराई को एकदम पाट भले न सकें मगर उस गहराई को कुछ कम तो कर ही सकते हैं.”

बांग्लादेश के चुनिंदा लोगों को भारत...

इसी तरह मैं चाहूंगा कि बांग्लादेश के मूर्धन्य और सुलझे हुए समझदार पूर्व फौजी अफसरों और वहां के कट्टर-चरमपंथी मुस्लिम नेताओं-गुरुओं को भी भारत में आमंत्रित करके उन्हें हमें अहसास दिलाना चाहिए कि वह हमारे लिए कितने अहम हैं. यह बात मैं सौहार्द बढ़ाने की नजर से कह रहा हूं. इसका मतलब यह कतई नहीं निकालना चाहिए कि मैं भारत को बांग्लादेश के सामने या बांग्लादेश को भारत के सामने एकदम नत-मस्तक होकर झुक जाना चाहिए. यहां बात अहम को बढाने की नहीं, मैं अहम-अहंकर दंभ को कम करके रिश्तों में पड़ी दरार को बंद करने की बात कर रहा हूं. चूंकि बांग्लादेश को अमेरिका-चीन-पाकिस्तान भारत के खिलाफ भड़का रहे हैं. तो ऐसे में भारत यह कतई उम्मीद न करके कि जब कोई देश या किसी देश के नेता भारत के खिलाफ मन में खटास और जहर घोले बैठे हैं. तब बांग्लादेश के पूर्व फौजी या वहां के कुछ बड़े नेता ही यह पहल करें.

शांति की पहल हम कर सकते हैं

यह पहल हमेशा शांति की पहल करते रहने वाले भारत को भी अपनी तरफ से करने में कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए. चूंकि बात किन्हीं अन्य देशों द्वारा बांग्लादेश को बरगला कर भारत के खिलाफ करने का है. तो फिर ऐसे में मतिभ्रम के चलते भला बांग्लादेश के पूर्व फौजी या वहां के टॉप लीडर्स क्यों भारत की ओर खुद चलकर आएंगे. यह तो हमें ही करना चाहिए क्योंकि हम जानते हैं कि बांग्लादेश की अकेले अपने दमखम पर भारत से जंग लड़ कर जीत जाने की औकात नहीं है. वह तो पाकिस्तान चीन और अमेरिका के इशारे पर नाचकर भारत के खिलाफ हुआ है.” अंतरराष्ट्रीय विदेश और कूटनीति को मजबूती प्रदान करने के लिए भारत को भी अब पाकिस्तान जैसा ही पैंतरा अपना चाहिए.

भारत को चाहिए कि वह अपनी देश के पूर्व मुस्लिम फौजी अफसरों और भारत के बड़े मुस्लिम लीडर्स का बांग्लादेश के साथ संबंध सुधारने में तुरंत इस्तेमाल करे. इससे बांग्लादेश के साथ तो भारत के संबंध बेहतर होने की प्रबल संभावनाएं बनेंगी हीं, साथ ही पाकिस्तान को भारत के इस कदम से मानसिक-सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति की नजर से काफी मुश्किलें भी खड़ी होने लगेंगीं.

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