किताब में ‘ ज्यूडिशियल करप्शन’ का जिक्र पड़ा भारी, दबाव में NCERT, फोन कर वापस मंगाई जा रहीं बुक्स; 38 में से 16 कॉपियां लौटीं
एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के उल्लेख को लेकर विवाद तेज हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की आपत्ति के बाद किताब को बिक्री से हटा लिया गया और खरीदी जा चुकी प्रतियां भी वापस मंगाई जा रही हैं.
NCERT की 8वीं की सामाजिक विज्ञान की उस किताब को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था. अब NCERT ने इस किताब को खरीदने वाले सभी लोगों से संपर्क कर उसे वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को NCERT के बिक्री काउंटर से इस किताब की कुल 38 प्रतियां बिकी थीं. मंगलवार और बुधवार के बीच इन सभी खरीदारों को फोन कर किताब लौटाने के लिए कहा गया.
NCERT प्रकाशन विभाग के अधिकारी ने क्या कहा?
NCERT काउंटर पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि प्रकाशन विभाग के एक अधिकारी ने निर्देश दिया था कि जिन लोगों ने किताब खरीदी है, उनसे तुरंत संपर्क कर कॉपी वापस ली जाए. कर्मचारी के मुताबिक,"अब तक 16 कॉपियां वापस आ चुकी हैं. तीन मामलों में खरीदारों का कॉन्टैक्ट नंबर नहीं था, इसलिए UPI आईडी के आधार पर बैंक से जानकारी मांगी गई है." कर्मचारी ने यह भी बताया कि मंत्रालय की ओर से किताब वापस मंगाने का स्पष्ट आदेश दिया गया है.
इस पूरे मामले पर NCERT के निदेशक डी.पी. सकलानी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने न तो फोन कॉल का जवाब दिया और न ही मैसेज का. शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि विवाद के बाद मंगलवार को इस किताब की एक भी प्रति बिक्री के लिए नहीं रखी गई.
एनसीईआरटी सोशल साइंस की नई किताब में क्या है?
दरअसल, नई किताब 'Exploring Society: India and Beyond – Part 2' में 'The Role of the Judiciary in Our Society' नाम का एक अध्याय शामिल है. इस अध्याय में न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों के तौर पर भारी लंबित मामलों (बैकलॉग) और भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था. इसी पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि मैं किसी को भी न्यायपालिका की साख से खेलने और संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं दूंगा.
मुख्य न्यायाधीश की इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद शिक्षा मंत्रालय और NCERT हरकत में आए और किताब को बिक्री से हटा लिया गया. इसके साथ ही अब जो कॉपियां पहले ही बिक चुकी थीं, उन्हें भी वापस मंगाने की कार्रवाई की जा रही है. यह पूरा मामला अब शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की छवि से जुड़े एक बड़े राष्ट्रीय विवाद में बदल चुका है.