Begin typing your search...

NCERT किताब के 'करप्शन चैप्टर' पर क्लेश! क्या सुप्रीम कोर्ट 1 रुपए में निपटाएगा विवाद? जस्टिस SN ढींगरा के तीखे सवाल

NCERT की कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. पूर्व जस्टिस एसएन ढींगरा ने सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई और संभावित परिणामों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

NCERT किताब के करप्शन चैप्टर पर क्लेश! क्या सुप्रीम कोर्ट 1 रुपए में निपटाएगा विवाद? जस्टिस SN ढींगरा के तीखे सवाल
X
संजीव चौहान
By: संजीव चौहान7 Mins Read

Updated on: 25 Feb 2026 6:00 PM IST

NCERT ने कक्षा-8 की किताब में ‘देश की न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का चैप्टर क्या जोड़ा है, मानो देश की न्यायपालिका में तूफान ही आ गया हो. खुद की इज्जत पर सीधे-सीधे उंगली उठती देख देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी बिफरे पड़े हैं. उन्होंने बुधवार को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर एनसीआरटी को ही घेर लिया है. बजाए इस बात को समझने के कि आखिर किताब में दर्ज चैप्टर में गलत-झूठा क्या है?

किताब के चैप्टर में तो वही सब दर्ज है जो भारत की न्यायपालिका में मौजूद वह सच है जिसे देश का हर नागरिक जानता समझता तो है. मगर कोर्ट के चाबुक के डर से कोई खुलकर बोलने की हिमाकत करने का जिगर नहीं रखता है. यह सोचकर कि न मालूम न्यायपालिका में भ्रष्टाचार में मौजूदगी का आईना दिखाने पर, कब कौन जज आईना दिखाने वाले को ही घसीट लें “कोर्ट ऑफ कंटेम्प” के बहाने या सहारे से अदालत में.

कौन हैं जस्टिस एस एन ढींगरा?

यह तमाम बेबाक बातें बयान की हैं दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस एन ढींगरा (Justice Shiv Narayan Dhingra Delhi High Court) ने. वही जस्टिस ढींगरा जिन्होंने 1990 के दशक में देश के केंद्रीय उर्जा मंत्री कल्पनाथ राय को दाउद इब्राहिम जैसे खूंखार बदनाम अंडरवर्ल्ड डॉन के गुर्गों को दिल्ली में शरण दिलवाने के मुकदमे में घेरकर, सीबीआई से न केवल गिरफ्तार कराया, अपितु मंत्री जी को 5 साल तिहाड़ जेल में कैद भी रखवाया. वही जस्टिस शिव नारायण ढींगरा जिन्होंने संसद को “मछली-बाजार” बताते हुए सच उजागर किया तो सड़क से संसद तक कोहराम मच गया. वही रिटायर्ड जस्टिस एस एन ढींगरा जिन्होंने संसद पर हमले के मुकदमे में, सबसे कम समय में मुख्य षडयंत्रकारी कश्मीरी आतंकवादी अफज़ल गुरु को 9 फरवरी 2013 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकवा दिया.

NCRT का अब आगे क्या होगा?

शायद सच कड़वा होता है. इस सच को पचा पाना देश की न्यायपालिका के बूते की बात नहीं थी. सो वह एनसीआरटी के ऊपर बिफर गई. सच से जुड़ा चैप्टर आठवीं कक्षा की किताब में जोड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एनसीआरटी को हाथों-हाथ घेर लिए जाने के इस मामले में अब आगे क्या होगा? स्टेट मिरर हिंदी के सवाल के जवाब में दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एस एन ढींगरा बोले, “चूंकि एनसीआरटी सरकारी संस्था है. इसलिए वह सुप्रीम कोर्ट के हौवे से तुरंत डर जाएगी. इस डर के वशीभूत होकर या तो चैप्टर को ही किताब से उड़ा या उड़वा दिया जाएगा. या फिर चैप्टर में जहां पर न्यायपालिका में करप्शन की बात दर्ज है, उस हिस्से को हटाने की पुरजोर कोशिश की जाएगी. जिसे किताब से ही हटवा डालने जाने की पूरी-पूरी संभावना है.”

NCERT किताब चैप्टर में झूठ क्या?

एनसीआरटी ने अपनी किताब के चैप्टर में क्या कुछ गलत कह या लिख दिया है जो सुप्रीम कोर्ट को आसानी से हजम नहीं हुआ? पूछने पर दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड और अपने तमाम एतिहासिक फैसलों के लिए देश में पहचाने जाने वाले पूर्व जस्टिस शिव नारायण ढींगरा बोले, “देश की न्यायपालिका में भ्रष्टाचार मौजूद है. यह सच है. यही सच एनसीआरटी ने किताब के चैप्टर में देश की अदालतों में लंबित करोड़ों मुकदमों के आंकड़ों के साथ लिखा है. इसमें कुछ भी तो झूठ नहीं है. मगर फिर वही बात कि सच किसी को पचता ही कहां है भारत में. तब फिर जुडिश्यरी में करप्शन की बात भला कोई कैसे कहीं लिख और बोल सकता है. कैसे इस कड़वे सच को देश की अदालतें, जज और सुप्रीम कोर्ट आसानी से पचा सकते हैं?”


देश में करप्शन से बचा कौन है?

NCERT की किताब में देश की न्यायपालिका में घुसे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बेबाक बातचीत के दौरान जस्टिस शिव नारायण ढींगरा बताते हैं, “पुलिस हो या फिर न्यायपालिका अथवा देश में कोई भी सरकारी महकमा. आज के दौर में करप्शन से बेदाग कौन बचा है? कहीं थोड़ा कम करप्शन होगा कहीं कोई महकमा आकंठ करप्शन में डूबा पड़ा मिल जाएगा. एक की बात हो तो बताऊं. बस यह है कि जुडिश्यरी में करप्शन पर कोई जुबान इसलिए नहीं खोल पाता है कि, तुरंत कानून का हवाला देकर बोलने वाले को कानूनी पचड़ों में फंसा दिया जाएगा.”

क्या NCERT को 1 रुपए में माफी मिलेगी?

स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन के साथ नई दिल्ली में विशेष बातचीत के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शिव नारायण ढींगरा बोले, “मुझे खूब ध्यान है जब देश के मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने देश के अधिकांश न्यायाधीशों को भ्रष्ट कह दिया. वह मुद्दा हाथों-हाथ सुप्रीम कोर्ट ने टेकओवर कर लिया. चूंकि बात देश की न्यायपालिका और जजों के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा था. वरना आज सुप्रीम कोर्ट में ही हजारों मुकदमे न मालूम कितने लंबे समय से लंबित पड़े हैं.

यहां मामला उल्टा क्यों?

प्रशांत भूषण से जुड़ा वह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट के गले की फांस बन गया था. जो न उगलते बन रहा था न निकलते. सुप्रीम कोर्ट चाहता था कि उस मामले में प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट से माफी मांग लें. मगर मजबूत तथ्यों के आधार पर अपनी बात पर अड़े वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट की वह दलील नहीं सुनी जिसमें सुप्रीम कोर्ट माफी मांगने पर उस मामले को खतम करने की जुगत में था. जब ट्रायल चला तो वह मुकदमा प्रशांत भूषण के ऊपर एक रुपया जुर्माना डालकर खतम करके जैसे तैसे सुप्रीम कोर्ट ने अपनी इज्जत बचाई. वह चूंकि कानून के मंझे हुए जानकार वकील प्रशांत भूषण थे. इसलिए कोर्ट को 1 रुपए के जुर्माने पर मुकदमा खतम करने पर उतर आना पड़ा. यहां तो बिचारी सरकारी संस्था एनसीईआरटी फंसी है. जिसे वही करना होगा जो हुकूमत और सुप्रीम कोर्ट चाहेगी. वरना यह तो जमाने को पता है कि बीते 70 साल में भारत की न्यायपालिका में किस हद का करप्शन बिछा पड़ा है. और इससे न्यायपालिका को बचाने के लिए किस-किसने क्या क्या उपाय किए? बस बोले कौन? जो सच बोले वही बोलकर फंसे या अपनी गर्दन फंसाए.”

जस्टिस वर्मा का क्या बिगाड़ लिया?

देश की न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार का सबसे ताजा-तरीन नमूना बताते हुए जस्टिस ढींगरा पूछते हैं, “जस्टिस यशवंत वर्मा का उदाहरण ले लीजिए. सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है इस शर्मनाक उदाहरण को देख पढ़ और सुनकर. इनके दिल्ली स्थित हाईकोर्ट के सरकारी बंगले से कितनी अधजली, जली और बिना जली अघोषित रकम बरामद हुई? खूब शोर मचा. सड़क से संसद तक हंगामा रहा. मीडिया ने भी खूब लिख पढ़ लिया. जस्टिस वर्मा के उस शर्मनाक कांड में यही सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच तक नहीं करा सकी. आज भी यशवंत वर्मा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ही हैं. तनखा, पेंशन, सरकारी घोड़ा गाड़ी बंगला सब कुछ है. चीखने वाले उस बदनाम मामले में चीखते रह गए. क्या किसी ने बिगाड़ लिया.”

सुप्रीम कोर्ट
अगला लेख