Green vs Bhagva- ‘हरा नहीं, भगवा चलेगा!’ AIMIM के बयान पर नवनीत राणा का पलटवार, रंग की राजनीति पर छिड़ी जंग
ठाणे के मुंब्रा क्षेत्र से पार्षद चुनी गईं AIMIM की सहर शेख के ‘हरा रंग’ वाले बयान पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. इसके जवाब में अमरावती से पूर्व सांसद और बीजेपी नेता नवनीत राणा ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत में रहना है तो भगवा स्वीकार करो, हरा चाहिए तो पाकिस्तान जाओ. जानिए पूरा मामला.;
देश की राजनीति में एक बार फिर रंगों की सियासत ने आग लगा दी है. AIMIM पार्षद के 'हरा रंग' वाले बयान के बाद अब पूर्व सांसद नवनीत राणा खुलकर मैदान में उतर आई हैं. नवनीत राणा ने तीखे शब्दों में कहा है कि भारत में रहना है तो भगवा स्वीकार करना होगा, हरा चाहिए तो पाकिस्तान जाना पड़ेगा. यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उस वैचारिक टकराव की झलक है, जिसमें राष्ट्रीय पहचान बनाम सांप्रदायिक प्रतीकों की बहस फिर से केंद्र में आ गई है.
मुंब्रा से उठी 'हरा रंग' की राजनीति अब महाराष्ट्र से निकलकर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन चुकी है. जहां AIMIM, बीजेपी और हिंदुत्व की लाइनें आमने-सामने खिंचती दिख रही हैं.
'भारत में केवल भगवा चलेगा'
हाल ही में नवनीत राणा का कहना है, "अगर सब कुछ हरा चाहिए तो पाकिस्तान जाना होगा. इस देश में सिर्फ भगवा और नीला ही चलेगा, कोई और रंग नहीं." यह बयान उन्होंने राजनीतिक विरोधियों और विशेष रूप से कुछ नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा. उनका इशारा विकास, पार्टी पहचान और विरोधी ताकतों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत है.
15 सेकंड वाला बयान रहा था विवादित
इससे पहले, नवनीत राणा ने हैदराबाद में कहा था कि अगर पुलिस हट जाए तो हिंदुओं और राष्ट्रीय हित के लिए काम 15 सेकंड में कर देंगे. यह बयान असदुद्दीन ओवैसी के बड़े बयान का जवाब देते हुए आया था और इससे राजनीतिक बहस छिड़ गई थी. नवनीत राणा ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को कहा कि यदि वे भारत में नहीं रहना चाहते तो पाकिस्तान जाकर 20 बच्चे पैदा करें. यह बयान बेहद तीखा और विवादित माना गया था.
नवनीत राणा ने ये भी कहा था कि हिंदू चार बच्चे पैदा करें. ताकि देश बच सके. इस बयान ने भी सियासी बहस छेड़ दी थी. नवनीत राणा ने कुछ रैलियों में कहा कि अगर देश में रहना है तो 'जय श्री राम' कहना होगा. यह टिप्पणी भी विवादित रिपोर्ट में आई थी.
नवनीत राणा कौन हैं?
नवनीत कौर राणा महाराष्ट्र की अमरावती पूर्व सांसद और बीजेपी (BJP) नेता हैं. वे राजनीति में अपनी तत्काल और मुद्दा आधारित बयानबाजी के लिए चर्चा में रहती हैं.
तो सहर का सेकुलर होने वाला बयान ढोंग था?
एआईएमआईएम पार्षद सहर शेख ने निकाय चुनाव संपन्न होते हुए फिर से हाथ मे कलावा पहन लिया है. उन्होंने चुनाव के दौरान SOFT और सेकुलर होने का ढोंग किया. हिंदुओं को को मूर्ख बनाया, लेकिन चुनाव जीतते ही हिजाब पहन कर मुंबई को हरे कलर मे रंगने की बात बोलने लगी हैं.
सहर शेख ने अपने बयान में कहा, “मुंब्रा को हरा रंगना है. उन्होंने कहा था कि मुंबई को हरे रंग (Paint Mumbra green ) रंग दो. सहर शेख का सबसे चर्चित और विवादित बयान उनके जीत के बाद भाषण में आया है. यह उनके भाषण का मुख्य वाक्य था. उन्होंने कहा कि “आगामी पांच सालों में हर उम्मीदवार AIMIM का होगा और मुंब्रा पूरी तरह से हरे रंग में ढक जाएगा.”
उनके आलोचकों ने इसे धार्मिक/सांप्रदायिक इशारे या राजनीतिक ध्रुवीकरण वाली भाषा के रूप में देख रहे हैं. हालांकि, बयान पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद सहर शेख ने कहा कि हराना/हराना वाला स्लोगन उनके पार्टी के झंडे के रंग (हरा) का प्रतीक था, न कि किसी धार्मिक समूह को बाहर रखने का संदेश. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय विकास, हरियाली और पार्टी पहचान को उजागर करना था ना कि किसी समुदाय विशेष को लक्ष्य करना.
सहर शेख कौन हैं?
सहर शेख (Sahar Sheikh) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की पार्षद हैं. उन्होंने हाल ही में ठाणे नगर निगम के मुंब्रा क्षेत्र से जीत दर्ज की हैं. वे AIMIM की महिला नेता और स्थानीय राजनीति में उभरती चेहरा मानी जाती हैं. उनके पिता यूनुस शेख हैं, जो पूर्व में जुलूस से जुड़े स्थानीय राजनीतिक नेक्सस से जुड़े रहे हैं. उनका संबंध पहले NCP नेता जितेंद्र आव्हाड से रहा है. बता दें कि AIMIM ने ठाणे नगर निगम में कुछ सीटों पर अच्छी प्रगति की है और मुंब्रा जैसे बहुसंख्यक मुस्लिम इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है.