राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के लिए क्या है औपचारिक प्रोटोकॉल, जिसे अब राष्ट्रगीत के लिए लाने की हो रही तैयारी?
भारत में राष्ट्रीय गान के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू हैं, जबकि राष्ट्रगीत को लेकर फिलहाल सम्मान की परंपरा है, न कि समान कानूनी बाध्यता. अब राष्ट्रगान जैसा ही सम्मान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को देने की तैयारी हो रही है? इसको लेकर बहस भी चरम पर है.;
भारत में राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के सम्मान और उसके औपचारिक प्रोटोकॉल को लेकर स्पष्ट नियम और कानून पहले से मौजूद हैं. अब चर्चा इस बात की है कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के लिए भी वैसा ही औपचारिक प्रोटोकॉल तय करने की तैयारी हो रही है. इस बहस के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर राष्ट्रीय गान के लिए नियम क्या हैं और राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सरकार या संस्थाएं किस दिशा में सोच रही हैं?
दरअसल, राष्ट्रीय गान केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, एकता और गरिमा का प्रतीक है. इसका सम्मान करना नैतिक ही नहीं, कानूनी दायित्व भी है. जानें, राष्ट्र गान के लिए क्या है प्रोटोकॉल?
प्रोटोकॉल का कहां है जिक्र?
- भारत सरकार गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs - MHA) के दस्तावेज The State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में.
- गृह मंत्रालय द्वारा जारी ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ “Respect for the National Anthem of India” में राष्ट्रीय गान के उपयोग, सम्मान और व्यवहार से जुड़े सभी दिशा-निर्देश दर्ज हैं.
- राष्ट्रीय गान की गरिमा और सम्मान को लेकर समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं.
देश का राष्ट्रगान जन गण मन है और इसे 1905 में सबसे पहले बंगाली भाषा में रविंद्र नाथ टैगोर की ओर से लिखा गया था. इसे सबसे पहले कलकत्ता में आयोजित आजादी की लड़ाई के समय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था. आजादी के बाद यह गीत भारत का राष्ट्रगान बना.
राष्ट्रगान के समय क्या करना अनिवार्य है?
‘जन गण मन’ बजते या गाए जाते समय हर नागरिक को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना चाहिए. शरीर सीधा, हाथ सामान्य स्थिति में हो. किसी भी तरह की हलचल, बातचीत या मोबाइल का प्रयोग वर्जित है.
अवधि कितनी होती है?
पूरा राष्ट्रगान लगभग 52 सेकंड में पूरा होता है. राष्ट्रीय गान सरकारी समारोह, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालययों, खेल आयोजनों (राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय), संसद और विधानसभा सत्रों, राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त और 26 जनवरी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सिनेमाघरों व अन्य औपचारिक अवसरों पर बजाना जरूरी है.
बैठकर कब सुना जा सकता है?
शारीरिक रूप से अक्षम (Divyang) व्यक्ति. वे लोग जो खड़े होने में असमर्थ हों. सशस्त्र बलों के कुछ विशेष प्रोटोकॉल वाले अवसरों पर.
सलामी दी जाती है?
सामान्य नागरिकों के लिए सलामी देना अनिवार्य नहीं. सशस्त्र बल या वर्दीधारी कर्मी निर्धारित सैन्य नियमों के अनुसार सलामी दे सकते हैं.
क्या वर्जित है?
मजाक, नकल या किसी तरह की अवमानना व गलत शब्दों या विकृत रूप में गाने की मनाही है. व्यापारिक या मनोरंजन के उद्देश्य से भी इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता. राष्ट्रगान के बीच में प्रवेश या बाहर निकलना मना है.
क्या रील, विज्ञापन या वीडियो में इस्तेमाल किया जा सकता है?
ऐसा नहीं किया जा सकता है. यदि इससे राष्ट्रीय गान की गरिमा को ठेस पहुंचती हो. व्यवसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है.
सम्मान न करने पर क्या सजा है?
राष्ट्रीय गान का सम्मान न करने पर तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. मामला गंभीर होने पर जुर्माने का भी प्रावधान है. या फिर जेल और जुर्माना दोनों की सजा हो सकते हैं.