EXCLUSIVE: ईरान जंग की छोड़ो, 2 पड़ोसी देश जुटे हैं भारत पर हमले की तैयारी में, पूर्व ले. कर्नल का खुलासा..!
भारत सुरक्षा खतरा, चीन पाकिस्तान हमले की तैयारी, ईरान इजराइल युद्ध, लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी, भारत सैन्य रणनीति, GEO Politics India
दुनिया में इन दिनों मक्कार अमेरिका द्वारा छिड़वाई गई ईरान-इजराइल की खूनी जंग के कोलाहल में फंसी है. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रही खूनी जंग के परिणाम किस कदर के दुनिया में घातक रुप लेकर सामने आने वाले हैं? मौजूदा वक्त में दुनिया के अधिकांश देश इस गुणा-गणित में लगे हैं. दो देशों के बीच छिड़ी इस खूनी जंग के कोहराम में मगर हमारे दो पड़ोसी देशों ने भारत पर हमले की तैयारियां दिन-शुरू कर दी हैं.
भारत सहित दुनिया में हमारे मित्र देशों को हैरान करने वाली यह खबर आ रही है भारतीय थलसेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जसिंदर सिंह सोढ़ी के हवाले से. ले. कर्नल जे एस सोढ़ी भारतीय सेना के पूर्व अनुभवी रक्षा-विशेषज्ञ, जियोपॉलिटिक्स, विदेश, सैन्य-रक्षा और सामरिक नीति के विशेषज्ञ हैं. भारतीय सेना की सातवीं पीढ़ी के सैन्य अधिकारी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पूर्व छात्र जे एस सोढ़ी ने ही भारत-चीन के सैन्य-सामरिक संबंधों पर China’s War Clouds: The Great Chinese Checkmate किताब भी लिखी है.
सोढ़ी के कैसे पता भारत का भविष्य?
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सलाहकार-सदस्य परामर्शदाता और भारतीय थलसेना (Indian Army) के कॉर्प्स इंजीनियर्स (बॉम्बे सैपर्स) के तीसरी पीढ़ी के अधिकारी जे एस सोढ़ी का नाम रक्षा-रणनीतिक लेखों के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. जेएस सोढ़ी की इन्हीं तमाम खूबियों के चलते उन्हें जियो पॉलिटिक्स से लेकर रक्षा, कूटनीति और विदेश व सैन्य रक्षा नीतियों तक की बारीक जानकारी है. ईरान-इजराइल के बीच अमेरिका द्वारा छेड़ी गई जंग और आने वाले समय में उसके घातक परिणामों पर जे एस सोढ़ी, नई दिल्ली में मौजूद स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन से एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे.
भारत को भीड़ से अलग क्यों सोचना चाहिए?
स्टेट मिरर हिंदी के एक बेहद उलझे हुए सवाल के सधे हुए जवाब में भारतीय थलसेना के पूर्व मंझे हुए अधिकारी ने कहा, “दुनिया इस वक्त ईरान इजराइल की लड़ाई में मशरुफ है. भारत का भी ध्यान अभी पूरी तरह से ईरान इजराइल और अमेरिका की ओर ही लगा है. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. क्योंकि भारत को तो निपटने के लिए अपने दुश्मनों की गिनती ही कौन सी कम है? फिर चाहे चीन पाकिस्तान बांग्लादेश हो या फिर अमेरिका. पाकिस्तान और चीन तो भारत के जग-जाहिर पुराने व कट्टर दुश्मन हैं ही. अमेरिका दोस्ती करके भारत के साथ पीछे से घात करने से बाज नहीं आएगा.
चीन के तीन कोर इंट्रेस्ट कौन से हैं?
अपनी बात जारी रखते हुए भारतीय थलसेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जे एस सोढ़ी कहते हैं, “ जब ईरान-इजराइल की लड़ाई चल रही है तब ऐसे वक्त में भारत को अपने दुश्मनों की हर गतिविधि पर पैनी और खुफिया नजर रखनी चाहिए. क्योंकि 23 दिसंबर 2025 को पेंटागन स्थित अमेरिकी रक्षा-मंत्रालय की रिपोर्ट भारत को चौकन्ना करने का मजबूत तथ्यपरक इशारा है. उस रिपोर्ट में ही खुलासा किया गया था कि चीन के तीन निजी कोर इंट्रेस्ट हैं. इन तीनो ही हिस्सों को चीन सैनिक तरीके से हासिल करने की हर-संभव कोशिशों में जुट चुका है.”
चीन दिन-रात इस काम में क्यों जुटा है?
युद्धस्तर पर तैयारियां किसके लिए? “अमेरिकन रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपने इन तीन निजी कोर इंट्रेस्ट को पूरा करने या कहिए हासिल करने के लिए ही दिन-रात 2 एअरक्राफ्ट कैरियर, 15 परमाणु पनडुब्बी और 200 के करीब युद्धपोत के निर्माण कार्य में युद्ध-स्तर पर जुटा है. यह काम चीन के छह नौसेना डॉकयार्ड में बेहद गुपचुप तरीके से हो रहा है. दुनिया जानती है कि चीन की नौसेना विश्व की सबसे बड़ी है. यह जो अब तैयारियां चल रही हैं वे सब भारत के ऊपर साल 2030 के बाद कभी भी संभावित हमले को नजर में रखकर ही चल रही हैं.”
पाकिस्तान चीन के साथ क्यों?
स्टेट मिरर हिंदी के साथ खास लंबी बातचीत में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल जे एस सोढ़ी ने आगे कहा, “साल 2030 के बाद ही कभी भी चीन भारत पर हमला बोल सकता है इसकी वजह भी पेंटागन की रिपोर्ट में खोली गई है. जिसके मुताबिक इस वक्त निर्माणाधीन चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर 2030 के आसपास ही बनकर तैयार होगा. मलक्का डेलमाई से दूर होने के लिए चीन को सीपैक भी बेहद जरूरी है. इन सभी तैयारियों से साफ हो जाता है कि जब दुनिया ईरान-इजराइल की जंग के शोर में खोई हुई है. तब चीन को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की गुपचुप तैयारियां करने का यह सुनहरा वक्त और भी बेहतर हाथ लग गया है. चूंकि पाकिस्तान कभी भी भारत से अकेले लड़कर लड़ाई नहीं जीत सकता है. इसलिए चीन के साथ पाकिस्तान भी साल 2030 के बाद भारत पर कभी भी किए जाने वाले हमले में कंधे से कंधा मिलाकर चीन का साथ देगा.
ईरान जंग भारत को क्यों भूलना चाहिए?
ऐसे में भारत आने वाले चार-पांच साल बाद चीन के साथ संभावित जंग के आसार को ध्यान में रखते हुए, हाल-फिलहाल ईरान-इजराइल से ध्यान हटाकर अपने सिर पर मंडराते जंग के उन बादलों को छांटने की कोशिशें शुरु करे, जो कभी भी भारत के ऊपर आकर बरसने की ओर इशारा कर रहे हैं.”