LAC पर China की चाल का जवाब : 628 Xiaokang गांवों के मुकाबले भारत बनाएगा 663 ‘Vibrant Village’, क्या है पूरा प्लान?

चीन के 628 Xiaokang सीमा गांवों के जवाब में भारत ने ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ शुरू किया है, जिसके तहत 663 सीमावर्ती गांवों को विकसित किया जाएगा. इस योजना का मकसद सीमा क्षेत्रों में विकास, आबादी और सुरक्षा को मजबूत करना है.

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 13 March 2026 9:08 PM IST

चीन चालबाजी का जवाब देने का मोदी सरकार ने भी मन बना लिया है. इस नीति के तहत एलएसी (Line of Actual Control) के पास ड्रैगन की ओर से बनाए जा रहे 628 ‘Xiaokang’ सीमा गांवों के बीच भारत ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है. चीन की बढ़ती गतिविधियों के जवाब में भारत सरकार ने ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के तहत LAC से सटे 663 सीमावर्ती गांवों को मॉडर्न सुविधाओं से लैस करने की योजना तैयार की है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पहल का मकसद सीमावर्ती इलाकों में विकास, कनेक्टिविटी और आबादी को मजबूत करना है. ताकि सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सके.

क्या है LAC पर चीन के ‘Xiaokang’ गांवों की रणनीति?

China पिछले पांच सालों से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के साथ भारत की सीमा पर 628 ‘Xiaokang’ यानी समृद्ध गांव बना रहा है. ये गांव एलएसी यानी Line of Actual Control के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए हैं. रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इनका उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में चीन की मौजूदगी मजबूत करना और विवादित क्षेत्रों पर अपने दावे को और सशक्त करना है.

चीन ने इतने ज्यादा Xiaokang गांव क्यों बनाए?

भारतीय सेना के उप-प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के मुताबिक चीन के बनाए 628 गांवों में से करीब 72% गांव पूर्वोत्तर राज्यों के सामने स्थित हैं. इनमें से लगभग 90% गांव अरुणाचल प्रदेश की सीमा के सामने बनाए गए हैं, जिससे यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है.

इन गांवों से भारत के सामने चुनौती क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि ये सीमावर्ती बस्तियां केवल नागरिक उपयोग के लिए नहीं हैं. इन्हें ‘डुअल-यूज’ इंफ्रास्ट्रक्चर माना जा रहा है, यानी इनका इस्तेमाल नागरिकों के साथ-साथ सैन्य गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है. इसी वजह से ये भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं.

क्या इन गांवों में अब लोग बसने लगे हैं?

शुरुआती वर्षों में इन गांवों में ज्यादा आबादी नहीं थी, लेकिन 2023 के अंत से चीन ने यहां नागरिकों को बसाना शुरू कर दिया है. खासतौर पर लोहित वैली और तवांग सेक्टर के सामने वाले इलाकों में कई गांवों में अब आबादी दिखाई देने लगी है.

सीमा क्षेत्रों को लेकर चीन ने कौन सा नया कानून बनाया?

चीन ने 1 जनवरी 2022 से अपने लैंड बॉर्डर लॉ को लागू किया. इस कानून के तहत सरकार को सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा मजबूत करने, आर्थिक विकास बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को तेज करने का अधिकार दिया गया है. इसी कानून के दायरे में सीमा रक्षा गांवों का कार्यक्रम भी आता है.

ड्रैगन के इस कदम के जवाब में भारत की क्या है रणनीति?

चीन की इस रणनीति के जवाब में India ने 2022 में ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ शुरू किया. इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और उन्हें पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करना है.

क्या है 663 ‘वाइब्रेंट विलेज’ प्लान?

Line of Actual Control से सटे इलाकों में विकास और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ शुरू किया है. इस योजना का मकसद सीमा से लगे दूरदराज़ गांवों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना, वहां आबादी को बनाए रखना और सीमावर्ती क्षेत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. सरकार पहले चरण में कुल 663 सीमावर्ती गांवों को विकसित करने की योजना पर काम कर रही है.

यह कार्यक्रम खास तौर पर चीन की सीमा से सटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में लागू किया जा रहा है. इन गांवों में सड़क, बिजली, इंटरनेट, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय लोग पलायन न करें और सीमा क्षेत्र आबाद रहे.

सरकार का मानना है कि अगर सीमावर्ती गांव मजबूत और विकसित होंगे, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी फायदेमंद होगा. इसके साथ ही इन गांवों को पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है. इस तरह ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ को चीन की सीमा पर बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और विकासात्मक पहल माना जा रहा है.

किन राज्यों में बनाए जाएंगे 663 ‘वाइब्रेंट विलेजेज’?

भारत पहले चरण में 663 सीमावर्ती गांवों को विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है. ये गांव लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा से सटे इलाकों में बनाए जाएंगे. इसका मकसद सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी, कनेक्टिविटी और सुरक्षा तीनों को मजबूत करना है. शायद आप लोगों को यह असंभव सा लगेगा, लेकिन यह सच्चाई है.. मैं हमेशा सोचती थी कि मोदी इस पर जरुर कुछ कर रहे होंगे.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक पहुंचने के लिए क्या कर रहा है भारत?

इसके अलावा, भारत अपने सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए चाइना सीमा के बहुत नजदीक भारत से भूटान होते हुए एक महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण शुरू कर दिया है, जिससे भारतीय सेना को सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक पहुंच और मजबूत हो जाएगी. भारत के इस साहसिक कदम को देखना चाहिए. कैसे भारत एक-एक पत्थर उठाकर एक अटल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है! इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत सिर्फ़ उभर ही नहीं रहा; यह अपने दृढ़ संकल्प के साथ बिना किसी चुनौती के ऊंचा उठ रहा है.

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