हेमंत सोरेन और केजरीवाल के जैसे ही हो सकता है ममता का हाल, कौन-कौन सी हैं चुनौतियां?
जेल से मुख्यमंत्री पद संभालना कानूनी तौर पर संभव है, लेकिन यह साधारण चुनौती नहीं है. ममता बनर्जी को कानूनी सतर्कता, पार्टी पर नियंत्रण, प्रशासनिक सहयोग और जन समर्थन को लगातार बनाए रखना होगा. केजरीवाल का अनुभव इस बात का प्रमाण है कि राजनीतिक नेतृत्व जेल की दीवारों के भीतर भी जारी रखा जा सकता है, लेकिन चुनौतियां हर कदम पर बड़ी होती हैं. सोरेन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सत्ता में फिर वापसी भी की.;
ममता बनर्जी की राजनीतिक छवि हमेशा ही मजबूत रही है, लेकिन अगर किसी कारण से न्हें न्यायिक हिरासत में रहना पड़े, तो सवाल उठता है, क्या वे जेल से भी सरकार चला सकती हैं? इस मामले में अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसी स्थिति में एक स्पष्ट उदाहरण हैं. हालांकि, हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी से ठीक पहले सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था. जबकि अरविंद केजरीवाल सभी तरह के राजनीतिक दबाव, पार्टी प्रबंधन और कानूनी अड़चनों का सामना करते हुए अपने पद बनी रहें और जेल से सरकार चलाई. नतीजा यह हुआ कि वो दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में हार गए. इसका लाभ बीजेपी को मिला. दिल्ली में बीजेपी 27 साल बाद सत्ता में वापसी करने में सफल हुई थी.
सीएम ममता बनर्जी के सामने जो सियासी हालात हैं, उनमें कई कानूनी, राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं. जानें कैसे ममता बनर्जी जेल से मुख्यमंत्री पद कैसे संभाल सकती हैं.
ममता का जेल जाने की चर्चा क्यों?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि बंगाल में कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्डरिंग मामले की जांच के दौरान I-PAC (राजनीतिक सलाहकार संस्था) और उसके संस्थापक के परिसर में छापेमारी चल रही थी. तभी ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के साथ वहां पहुंची और अफसर व कर्मचारी महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा अपने साथ जबरन लेकर चले गए. ऐसा कर उन्होंने न केवल ED के काम में हस्तक्षेप किया बल्कि सबूत भी अपने साथ ले गए. आरोप था कि इससे साक्ष्य नष्ट या प्रभावित हुए और जांच में बाधा आई.
यह मामला कानूनी रूप से गंभीर है, क्योंकि अगर साक्ष्य हटा दिए जाएं या छापेमारी में हस्तक्षेप हुआ, तो यह मनी लॉन्डरिंग जांच में वह अवरोध बन सकता है. हालांकि, अभी तक अदालत ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीधे किसी आपराधिक आरोप तय नहीं किया है. मामला Calcutta High Court के पास विचाराधीन है. इससे यह साफ है कि कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों के बीच विवाद जारी है, लेकिन अदालत ने कोई FIR दर्ज कर गिरफ्तारी के आदेश नहीं दिए हैं.
इसी तरह पश्चिम बंगाल में विद्यालय भर्ती घोटाले (SSC) में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि चयन प्रक्रिया में चोरी और पैसे लेकर नौकरी दिए गए. इस मामले में अदालत ने 25,000 से ज्यादा नियुक्तियों को अमान्य करार दिया. कोर्ट ने सरकार की जवाबदेही तय की, पर सीधे ममता बनर्जी की इसमें संलिप्तता की बात नहीं मानी.
कुछ पुराने राजनीतिक विवाद और मुकदमे भी हैं, जो खारिज हो चुके हैं. अभी तक कोई FIR या गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं हुआ. कोर्ट ने अभी तक ममता बनर्जी के खिलाफ कोई दोष तय नहीं किए हैं. यानी अभी तक की स्थिति में मौजूदा सबसे गंभीर कानूनी विवाद वह है जो ED coal-money laundering संदर्भ में है.
जेल से सरकार चलाने की स्थिति कब बनती है?
अहम सवाल यह है कि गिरफ्तारी के बाद भी ममता बनर्जी अरविंद केजरीवाल की तरह जेल से सरकार चला सकती हैं. ऐसा हो सकता है, पर खास हालात में. अगर ममता बनर्जी केवल न्यायिक हिरासत (Undertrial) में हों. यानी अभी दोषी (Convict) घोषित न हुई हों. तब वे मुख्यमंत्री पद पर बनी रह सकती हैं. संविधान उन्हें पद से हटाने के लिए मजबूर नहीं करता. इस्तीफा देना कानूनी मजबूरी नहीं, राजनीतिक फैसला होता है. अगर किसी मामले में सजा 2 साल से कम हो, तब भी वे तुरंत अयोग्य नहीं होती. अदालत से सजा पर रोक मिल जाए तो पद पर बनी रह सकती हैं.
व्यवहार में सरकार कैसे चलती है?
यहां पर एक और सवाल यह है कि जेल से सरकार कैसे चलेंगी. ऐसी स्थिति में सरकारी फाइलें जेल में भेजी जा सकती हैं. मंत्रियों, वकीलों/अधिकारियों के जरिए निर्देश दे पाएंगी. कैबिनेट और पार्टी नेतृत्व के माध्यम से शासन वह सीएम बनी रह सकती हैं. यानी ममता बनर्जी जेल से तभी सरकार चला सकती हैं, जब वे दोषी सिद्ध न हों या सजा पर कोर्ट की रोक हो. दोषसिद्धि और 2 साल से ज्यादा की सजा होने पर यह संभव नहीं.
किस हालात में जेल से नहीं चला सकतीं सरकार
अगर 2 साल या उससे ज्यादा की सजा हो जाए और स्टे न मिले तो उनका जेल से सरकार चलाना मुश्किल होगा. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत विधायक पद खत्म हो जाए तो मुख्यमंत्री पद अपने आप चला जाएगा. अगर राज्यपाल उन्हें पद से हटा दें. हालांकि, यह बहुत असाधारण और विवादास्पद स्थिति होती है.
संविधान में क्या है प्रावधान?
- संविधान के आर्टिकल 164(1) तहत प्रदेश के राज्यपाल CM को नियुक्त करते हैं. CM वही हो सकता है जो विधायक हो या 6 महीने में विधायक बने.
- आर्टिकल 191 के तहत विधायक पद से किसी जनप्रतिनिधि को तभी अयोग्य माना जाएगा जब दोषसिद्धि पाए जाने पर 2 साल से ज्यादा की सजा हो.
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के तहत दोषसिद्धि और 2 साल की जेल की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि या शख्स चुनाव नहीं लड़ सकता. वर्तमान में विधायक है तो उसे अयोग्य माना जाएगा.
ममता की कानूनी चुनौतियां
जेल में रहते हुए सभी सरकारी दस्तावेज और निर्णयों के लिए वकीलों या मंत्रियों पर निर्भर रहना पड़ेगा. अदालतों में लंबित केस और अपील उनकी कार्यकुशलता पर असर डाल सकता है. जेल में रहने पर पार्टी नेताओं और मंत्रियों के माध्यम से नियंत्रण बनाए रखना आसान काम नहीं होगा. अरविंद केजरीवाल हर संभव प्रयास कर पाने के बाद सहज तरीके से सरकार नहीं चला पाए थे. विरोधी पार्टियां इसे राजनीतिक हमला बनाने का प्रयास कर सकती हैं. जेल से सरकार चलाने पर मंत्रिमंडल और प्रशासनिक निर्णय में समय लग सकता है.
जेल से शासन संचालन में विशेष अनुमति और संसाधनों की आवश्यकता होगी. वकीलों और सचिवालय के माध्यम से फैसले लेना पड़ेगा. तत्काल निर्णय लेने में कठिनाई, जैसे प्राकृतिक आपदा या संकट प्रबंधन. ममता को भी पार्टी, प्रशासन और कानूनी टीम का मजबूत समन्वय रखना पड़ेगा.
क्यों हुई थी अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी?
दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 21 मार्च 2024 को की थी. ईडी ने उन पर दिल्ली शराब नीति को बदलने व चहेते ठेकेदारों को अलॉट करने का आरोप लगाया था. इससे कुछ निजी शराब कारोबारियों को फायदा हुआ था. इस मामले में साउथ लॉबी भी सुर्खियों में आया था. ईडी ने दावा किया था चहेते शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के बदले 100 करोड़ रुपये लिए गए थे. आम आदमी पार्टी ने इस पैसे का इस्तेमाल गोवा चुनाव, पार्टी फंडिंग के लिए किया था. इस मामले में ईडी ने केजरीवाल को सह-आरोपियों के बयान, मनी ट्रेल, नीति से जुड़े सरकारी दस्तावेज, केजरीवाल सीएम पद पर रहते हुए गिरफ्तार किया गया था.
मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट में सोरेन हुए थे गिरफ्तार
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ईडी ने भूमि घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था. ईडी ने सोरेन पर PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) में संलिप्त होने का आरोप लगाया था. हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी 31 जनवरी 2024 को हुई थी. उन पर आरोप था कि रांची में सरकारी/आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों से जमीन कब्जाने के मामले में अहम भूमिका निभाई थी. इस घोटाले से अवैध धन अर्जित करने का आरोप था. ईडी ने जमीन रिकॉर्ड, गवाह, डिजिटल सबूत, गिरफ्तारी से पहले लंबी पूछताछ हुई, गिरफ्तारी के बाद सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था.