कांग्रेस से शुरू, BJP ने किया खत्म! क्या थी महाराष्ट्र की मुस्लिम आरक्षण नीति, जिसपर फडणवीस ने लगाई रोक?

महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिम रिज़र्वेशन को खत्म कर दिया है. इस रिज़र्वेशन की शुरुआत कांग्रेस के जरिए एक ऑर्डिनेंस लाकर की गई थी. सरकार के इसे खत्म करने से सियासी तूफान आना तय माना जा रहा है.;

( Image Source:  X- @Dev_Fadnavis and AI Generated )
Edited By :  समी सिद्दीकी
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Maharashtra Muslim Reservation: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मंगलवार रात एक अहम फैसला लेते हुए मुसलमानों के मिलने वाले आरक्षण को खत्म कर दिया है. ये आरक्षण मु्स्लिम समुदाय के एक खास हिस्से को मिलता था. सरकार का कहना है कि यह कदम वर्ष 2014 की नीति से जुड़े अदालती घटनाक्रम और मौजूदा कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है

बता दें, मुस्लिम समुदाय के कुछ सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी कैटेगरी को 5 फीसद एसईबीसी (सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लास) आरक्षण मिलता था, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने अब खत्म कर दिया गया है.

क्या कहता है आदेश?

जारी आदेश के मुताबिक, 2014 में जिन मुस्लिम समूहों को स्पेशल बैकवर्ड क्लास-ए (SBC-A) कैटेगरी के तहत आरक्षण का लाभ दिया गया था, वह व्यवस्था अब प्रभावी नहीं रहेगी. इसका सीधा असर सरकारी और सेमी-ऑफीशियल नौकरियों में सीधी भर्ती और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन पर पड़ेगा. इस फैसले के बाद समुदाय के भीतर प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है.

क्या थी मुस्लिम समुदाय आरक्षण नीति?

यह आरक्षण नीति जुलाई 2014 में तत्कालीन माइनोरिटी वेलफेयर मिनिस्टर नसीम खान के प्रस्ताव पर राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू की गई थी. नीति के तहत मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 5 फीसद आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था.

इस आरक्षण का ऐलान 2014 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने किया था. चुनाव से ठीक पहले इसे अध्यादेश के माध्यम से लागू किया गया था, लेकिन यह कभी परमानेंट कानून का रूप नहीं ले सका. उसी साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने कांग्रेस और एनसीपी को हरा दिया, जिसके बाद अध्यादेश की अवधि खत्म हो गई और वह अपने आप ही इनएक्टिव हो गया.

मराठा समुदाय की भी करता था बात

यह अध्यादेश मराठा समुदाय को 21 प्रतिशत आरक्षण देने का भी प्रावधान करता था. हालांकि यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा के खिलाफ माना गया. मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में भी पहुंचा था, जहां अदालत ने अध्यादेश पर रोक लगा दी थी.

ऐसे में कल जारी किया गया सरकारी प्रस्ताव (गवर्नमेंट रिजॉल्यूशन) मुस्लिम आरक्षण की कानूनी स्थिति को औपचारिक रूप से शून्य घोषित करता है. इसके साथ ही इस विषय पर बनी कानूनी अनिश्चितता की स्थिति समाप्त हो गई है.

अदालत ने आरक्षण पर क्या कहा था?

हालांकि, इसी साल इस नीति को अदालत में चुनौती दी गई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार के अधीन नौकरियों में इस आरक्षण पर रोक लगा दी थी. इसके बाद मामला लंबे समय तक न्यायालय में लंबित रहा और इसकी लीगल पॉजीशन साफ नहीं हो पाई.

राज्य सरकार ने क्या कहा?

राज्य सरकार का तर्क है कि जिस अध्यादेश के जरिए से यह आरक्षण लागू किया गया था, वह परमानेंट कानून का रूप नहीं ले सका. अध्यादेश की अवधि समाप्त होने के बाद उससे जुड़े परिपत्र और आदेश अपने आप इनइफेक्टिव हो गए. इसी आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 2014 और 2015 में जारी संबंधित सभी आदेशों को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है.

क्या मुस्लिम आरक्षण हटना बन जाएगा महाराष्ट्र का बड़ा मुद्दा?

अधिकारियों के मुताबिक, यह नया आदेश अदालत के अनुसार लीगल पॉजीशन के मुताबिक सरकारी दस्तावेज़ों को अपडेट करने के लिए जारी किया गया है. वहीं राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, क्योंकि यह आरक्षण मुस्लिम समुदाय के कुछ कैटेगरीज़ में शिक्षा और रोजगार में पिछड़ेपन को दूर करने के मकसद से शुरू किया गया था.

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