सब्जी भाजी वाले App ने कैसे बचाई बुजुर्ग की जान, इस शिवम से पूछिए- वाकया कभी ना भूलने वाला

हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जिन ऐप्स को सिर्फ सुविधा या आराम से जोड़कर देखते हैं, कभी-कभी वही ऐप किसी के लिए ज़िंदगी और मौत के बीच की सबसे मज़बूत कड़ी बन जाते हैं. दिल्ली से सामने आया यह वाकया कुछ ऐसा ही है, जिसे याद करके आज भी शिवम की रूह कांप जाती है. यह कहानी है एक ऐसे पल की, जब मिनटों का फैसला किसी की जान बचा गया.;

( Image Source:  x-@TheDarkhope6 )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 17 Jan 2026 12:33 PM IST

हम अक्सर जिन ऐप्स को सिर्फ सब्ज़ी, दूध या रोज़मर्रा का सामान मंगाने का ज़रिया मानते हैं, वही कभी-कभी किसी की ज़िंदगी के सबसे अहम पल में उम्मीद की आख़िरी किरण बन जाते हैं. शिवम नाम के एक शख्स के के साथ जो हुआ, वह ऐसा ही एक वाकया है, जिसे वो शायद कभी भूल नहीं पाएंगे.

तीन दिन पहले अचानक उनकी दादी की तबियत खराब हो गई और फिर हमेशा की तरह एंबुलेंस आने में देर कर रही थी, तभी उन्हें क्वीक कॉमर्स ऐप की फ्री एंबुलेंस सर्विस याद आई, जिससे उनकी दादी की जान बच गई.

अचानक दादी को आया चक्कर

सुबह करीब 8 बजे का वक्त था. घर में रोज़ की तरह चहल-पहल थी, तभी अचानक शिवम की दादी फर्श पर गिर पड़ीं. न आवाज़, न कोई प्रतिक्रिया. सांस चल रही थी, लेकिन होश पूरी तरह गायब था. घबराए परिवार ने तुरंत 112 पर कॉल किया, मगर एंबुलेंस के पहुंचने में वक्त लग रहा था. हर गुजरता सेकेंड डर बढ़ा रहा था.

4–6 मिनट में आई Blinkit एंबुलेंस 

इसी बेचैनी के बीच शिवम को कुछ दिन पहले देखा गया एक ऑप्शन याद आया. Blinkit ऐप पर दिखा था “Ambulance in minutes” वाला फीचर. बिना सोचे-समझे उन्होंने फोन उठाया, ऐप खोला और रिक्वेस्ट डाल दी. हैरानी की बात ये थी कि एक मिनट से भी कम समय में कन्फर्मेशन कॉल आ गया, और देखते ही देखते 4–6 मिनट में एंबुलेंस घर के दरवाज़े पर खड़ी थी.

एंबुलेंस में थी सारी सुविधाएं

एंबुलेंस में मौजूद दो नर्सों ने बिना समय गंवाए जांच शुरू की. बीपी और शुगर चेक होते ही असली खतरा सामने आया. दादी की ब्लड शुगर खतरनाक रूप से गिरकर 40 तक पहुंच चुकी थी. तुरंत ड्रिप लगाई गई. करीब 10 मिनट के भीतर दादी को होश आने लगा, और इसके बाद उन्हें सुरक्षित अस्पताल ले जाया गया.

ऐप की एंबुलेंस सर्विस है फ्री

सब कुछ सामान्य होने पर शिवम ने एंबुलेंस की फीस पूछी. उन्हें लगा कि इतनी फुर्तीली सेवा ज़रूर महंगी होगी. लेकिन जवाब सुनकर वो सन्न रह गए “यह Blinkit की फ्री सर्विस है, हम कोई पैसे नहीं लेते.” शिवम ने धन्यवाद के तौर पर टिप देने की कोशिश की, मगर नर्सों ने बेहद शालीनता से मना कर दिया.

नहीं हटाएंगे डोनेशन साइनअप

इस अनुभव के बाद शिवम ने अपनी कहानी LinkedIn पर शेयर की. उन्होंने लिखा कि अब वो कभी भी Blinkit या Zomato जैसे ऐप्स के चेकआउट पर दिखने वाला ₹1–₹2 का डोनेशन हटाएंगे नहीं. क्योंकि कभी-कभी यही छोटे-छोटे योगदान मिलकर किसी अनजान इंसान की जान बचा लेते हैं.

यूजर्स के रिएक्शन्स

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी राय रखी. जहां एक यूजर ने कहा 'पता नहीं लोग क्विक कॉमर्स कंपनियों से इतने नाराज़ क्यों हैं. वे रोज़गार पैदा कर रही हैं. हाई रिस्क वाला माहौल पूरी तरह से सरकार की गलती है. इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत खराब है, सड़कें टूटी हुई हैं, लोग बिना किसी सिविक सेंस के गाड़ी चलाते हैं.' वहीं दूसरे ने कहा 'यह सच है कुछ दिन पहले मैंने भी एम्बुलेंस बुलाई थी, जो सिर्फ 8 मिनट में आ गई थी.' अन्य ने कहा 'मैं इन्हें ही "न्यू जेन हीरोज़" कहूंगा. ये सिर्फ़ पैदा नहीं होते, ये सिर्फ़ लोग नहीं होते, ये ऑर्गनाइज़ेशन और ग्रुप भी हो सकते हैं.'

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