केरल की सियासत में बड़ा सवाल - हिंदू पॉलिटिक्स का उभार, फिर मुस्लिम फैक्टर हावी कैसे; किसे मिलेगा लाभ?
केरल में हिंदुओं के दो बड़े संगठनों का एक मंच पर आने और सीनियर CPI(M) नेता और केरल के मंत्री साजी चेरियन की ओर से मुस्लिम विरोधी बयान आने के बाद वहां का सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है. उसके बाद से सवाल उठ रहे हैं कि केरल में हिंदू आबादी बहुसंख्यक होने के बावजूद मुस्लिम राजनीति क्यों प्रभावी बनी हुई है? हिंदू पॉलिटिक्स के उभार के बीच समझिए वोट बैंक, संगठन, गठबंधन और सत्ता समीकरण -किसे होगा असली फायदा?;
केरल, जहां दशकों तक राजनीति का मतलब लेफ्ट बनाम कांग्रेस रहा है. अब वहां समीकरण बदलते दिख रहे हैं. एक तरफ हिंदू पॉलिटिक्स का उभार, मंदिर और पहचान के मुद्दे, तो दूसरी ओर मुस्लिम फैक्टर का लगातार मजबूत ‘अहम’ होना है. इस बीच सीनियर CPI(M) नेता और केरल के मंत्री साजी चेरियन की ओर से जारी मुस्लिम विरोधी बयान ने इस उभार को और ज्यादा तूल दे दिया है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब केरल में हिंदू आबादी ज्यादा है, तो राजनीति में मुस्लिम असर इतना निर्णायक क्यों है? फिर और बदलते सियासी माहौल में फायदा किसे मिलने वाला है?
दरअसल, केरल के सामाजिक-राजनीतिक माहौल में एक संभावित मोड़ के तौर पर, श्री नारायण धर्म परिपालन (SNDP) योगम ने नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) के साथ ऑर्गेनाइजेशन यूनिटी करने के कदम को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य के दो सबसे प्रभावशाली और ऐतिहासिक विरोधी हिंदू संगठन एक साथ आ गए हैं. इस फैसले ने दोनों संस्थाओं के बीच एक दशक से ज्यादा समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्ते खत्म हो गए हैं. दोनों हिंदू समुदायों पर एक साथ हुए चुनावों से एक अहम सवाल उठता है, CPIM), कांग्रेस या BJP में से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान हो सकता है?
टर्निंग प्वाइंट पर केरल की राजनीति
केरल की आबादी में लगभग 22-23 परसेंट एझावा हैं, जो SNDP का मुख्य बेस हैं, जबकि लगभग 12-14 परसेंट नायर NSS के हैं. दोनों राजनीतिक बातों को आकार देने में अहम भूमिका निभाते आए हैं. CSDS-लोकनीति के चुनाव बाद के सर्वे के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों में 32 परसेंट एझावा वोटरों ने BJP का समर्थन किया. यह 2021 के विधानसभा चुनावों से एक बदलाव है, जब 53 परसेंट एझावा ने लेफ्ट का समर्थन किया था, जो LDF का सबसे बड़ा सपोर्ट बेस था, जबकि सिर्फ़ 23 ने BJP को वोट दिया था. NSS हिंदुओं में अगड़ी जाति तो SNDP पिछड़ों का प्रतिनिधित्व करता है.
एनएसएस के सुकुमारन नायर के अनुसार, वे मतभेद अब "पुराने हो चुके हैं." उन्होंने कहा, "हालात बदल गए हैं. SNDP के साथ करीबी संगठनात्मक संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने सेक्युलर पहचान पर सवाल उठाया.विपक्षी नेता के सार्वजनिक व्यवहार में विरोधाभास है. वे लोग एक तरफ धार्मिक गुरुओं से मिलते हैं दूसरी तरफ कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन को पॉलिटिक्स से दूर रहने के लिए कहते हैं. एसएनडीपी के नटेसन एक कदम और आगे बढ़ गए, उन्होंने कहा कि यह आह्वान सिर्फ हिंदू एकजुटता के लिए नहीं था, बल्कि गठबंधन को बढ़ाकर इसमें नसरानी (ईसाई) को भी शामिल करने के लिए था.
वे किसे निशाना बना रहे हैं?
जबकि SNDP और NSS के नेता इस बात पर जोर देते हैं कि एकता का यह कदम किसी भी राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं हैं. दोनों ने विपक्ष के नेता कांग्रेस के वीडी सतीशन की तीखी आलोचना की है. वेल्लप्पल्ली ने सतीशन पर एझावा समुदाय के दुश्मन होने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस नेता इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के माउथपीस की तरह काम कर रहे थे. SNDP काउंसिल ने मुस्लिम लीग की आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया था, जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का एक मुख्य सहयोगी है. योगम ने आरोप लगाया कि लीग को छद्म सेक्युलरिज्म से फायदा हुआ है और एक के बाद एक सरकारों पर एझावा हितों, खासकर स्कॉलरशिप, पढ़ाई के मौकों और सरकारी नौकरियों की कीमत पर माइनॉरिटी-आधारित पार्टियों को खास ट्रीटमेंट देने का आरोप लगाया.
क्या कहा था साजी चेरियन ने?
सीनियर CPI(M) नेता और केरल के मंत्री साजी चेरियन विवादों के लिए नए नहीं हैं. 60 साल के चेरियन ने 21 जनवरी को मुस्लिम विरोधी बयान देकर वहां की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया था, जिसके बाद उन्हें अपने बयान वापस लेने पड़े. जुलाई 2022 में उन्हें संविधान विरोधी बयानों के कारण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन छह महीने बाद केरल हाई कोर्ट द्वारा उनकी अयोग्यता की याचिका खारिज करने के बाद उन्होंने फिर से वापसी की.
उन्होंने एक पार्टी कार्यक्रम में कहा था, "मैं कहूंगा कि संविधान इस तरह से लिखा गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लूटा जा सके. भारतीयों ने वही लिखा जो अंग्रेजों ने तैयार किया था. धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र को 'कुंथम और कुडाचक्रन' (भाला और छाते की तीली) कहकर उनकी अहमियत कम बताई.
एक अन्य केरल में सीपीआई(एम) (CPI-M) नेता सैदली मजीद ने मल्लपुरम में एक चुनावी सभा के दौरान मुस्लिम लीग की महिला उम्मीदवारों के खिलाफ एक विवादास्पद बयान दिया था. उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर पर बच्चे पैदा करने और रहने के लिए बनाया गया है, न कि चुनावों में 'परेड' करने के लिए. उनके इस अपमानजनक और स्त्री-द्वेषी (misogynistic) टिप्पणी पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की एक कार्यकर्ता जमीला की शिकायत पर पुलिस ने तिरुरंगाडी में मामला दर्ज किया.