कर्फ्यू, इंटरनेट बंद और डर का साया: ईरान-इराक सीमा पर परिवार से फोन पर बात करने के लिए तरस रहे भारतीय छात्र, Whatsapp ग्रुप बना सहारा
ईरान में इंटरनेट बंदी और कर्फ्यू के बीच फंसे भारतीय छात्रों को परिवार से संपर्क के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. जम्मू-कश्मीर के मेडिकल छात्रों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर परिजनों को हालात की जानकारी दी. अनिश्चितता के चलते कई छात्र भारत लौटे, जबकि कुछ अब भी ईरान में सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं. भारतीय दूतावास हालात पर नजर बनाए हुए है, फिलहाल औपचारिक निकासी शुरू नहीं हुई है.;
Iran internet ban curfew news, Indian students in Iran: ईरान-इराक सीमा पर खड़े कुछ भारतीय छात्र आसमान की ओर मोबाइल फोन उठाए खड़े हैं. उम्मीद बस इतनी कि नेटवर्क की एक बार मिल जाए. एक बार, दो बार… कुछ भी, ताकि हजारों किलोमीटर दूर भारत में बैठे घबराए माता-पिता तक यह संदेश पहुंच सके कि वे सुरक्षित हैं. Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, लोहे की ऊंची सीमा-बाड़ के पास खड़े छात्र बेचैनी से इधर-उधर टहलते नजर आए, नजरें लगातार मोबाइल स्क्रीन पर टिकी रहीं.
ईरान के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद हैं और कई शहरों में रात 8 बजे के बाद कर्फ्यू लागू कर दिया गया है. ऐसे हालात में ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्र, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले मेडिकल छात्र, छिटपुट और कमजोर नेटवर्क के सहारे ही अपने परिवार से संपर्क कर पा रहे हैं.
J&K मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने संभाली कमान
जम्मू-कश्मीर ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि इंटरनेट बंदी के कारण माता-पिता बेहद घबराए हुए थे क्योंकि बच्चों से सीधे संपर्क का कोई जरिया नहीं था. उन्होंने कहा, “स्थिति को संभालने के लिए हमने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें ईरान में मौजूद छात्रों की जानकारी और सत्यापित अपडेट साझा किए गए. इससे माता-पिता को तसल्ली मिली कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं.”
ईरान में इस समय करीब 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें से अधिकांश छात्र हैं. इनमें लगभग 2,000 छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.
यूनिवर्सिटीज बंद, परीक्षाएं टलीं
राजनीतिक अशांति और हालात बिगड़ने की आशंका के चलते ईरान के कई इलाकों में विश्वविद्यालयों ने कक्षाएं स्थगित कर दी हैं और परीक्षाएं टाल दी गई हैं. इससे छात्रों के सामने न सिर्फ सुरक्षा बल्कि अकादमिक भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता खड़ी हो गई है.
पहला जत्था भारत लौटा
शनिवार तड़के भारतीय छात्रों और तीर्थयात्रियों को लेकर पहली व्यावसायिक उड़ान दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर उतरी. लौटे छात्रों का कहना था कि जमीनी हालात सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही तस्वीरों जितने भयावह नहीं थे, लेकिन प्रदर्शन, इंटरनेट बंदी, कर्फ्यू और यूनिवर्सिटी बंद होना... इन सबने मिलकर असुरक्षा की भावना जरूर पैदा कर दी थी. अधिकांश छात्रों ने बताया कि भारत लौटने का फैसला तत्काल खतरे से ज्यादा भविष्य की अनिश्चितता के कारण लिया गया.
दूतावास सतर्क, लेकिन औपचारिक निकासी नहीं
भारतीय दूतावास, तेहरान ने साफ किया है कि फिलहाल औपचारिक निकासी अभियान शुरू नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. एसोसिएशन के मुताबिक, दूतावास के अधिकारी छात्रों के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर आधिकारिक चैनलों से जानकारी दी जाएगी.
एयरपोर्ट पर भावुक दृश्य
IGI एयरपोर्ट पर छात्रों के पहुंचते ही भावुक दृश्य देखने को मिले. माता-पिता बेसब्री से अपने बच्चों का इंतजार कर रहे थे. एक छात्र ने कहा, “घर लौटकर ऐसा लगा जैसे दिल से कोई भारी बोझ उतर गया हो.”
अफवाहों से दूर, संयम की अपील
हालांकि, कई छात्र सोशल मीडिया के जरिए लगातार अपील कर रहे हैं कि परिवार वाले घबराएं नहीं और अफवाहों पर भरोसा न करें. वे सरकार और दूतावास से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग भी कर रहे हैं.
“हम सुरक्षित थे”, छात्रा का बयान
तेहरान यूनिवर्सिटी की फाइनल ईयर MBBS छात्रा जोहा सईदा, जो जम्मू-कश्मीर से हैं और दिल्ली लौटी हैं, ने बताया, “ज्यादातर खबरें अफवाहों पर आधारित थीं. कैंपस में कोई अराजकता नहीं थी. पुलिस लगातार गश्त कर रही थी और यूनिवर्सिटी ने बाहर न निकलने की सलाह दी थी. हम सुरक्षित हाथों में थे.” उनके पिता ने कहा कि असली चिंता हालात से ज्यादा संचार व्यवस्था के ठप होने की वजह से थी. एहतियात के तौर पर हमने उसे वापस बुला लिया है. हालात सुधरते ही उसे दोबारा भेजेंगे.
कुछ छात्र अब भी ईरान में
अब्दुलहद, जिनके बेटे ने ईरान में ही रुकने का फैसला किया है, ने कहा, “वह कहता है कि हालात नियंत्रण में हैं और वह खुद को सुरक्षित महसूस करता है. स्थिति बिगड़ने या सलाह मिलने पर ही लौटेगा.”