होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल, कतर का फोर्स मेजर… क्या डगमगाएगा भारत का तेल सप्लाई सिस्टम, सरकार के पास कितना स्टॉक?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं. कतर के फोर्स मेजर और होर्मुज में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को चिंतित कर दिया है. हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास फिलहाल पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है.
Iran War Impact: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बाद तेल संकट का बड़ा खतरा महसूस हो रहा है. सवाल उठ रहा है कि अगर ये संकट गहराता है तो भारत इसके लिए कितना तैयार, क्या भारत के पास इतना स्टॉक है कि वह मुश्किल वक्त को आसानी से टाल सके. क्योंकि कतर का फोर्स मेजर का ऐलान और ईरान का हार्मोज़ पर कब्जा दोनों ही भारत के फ्यूल स्टॉक पर असर डाल सकते हैं.
बता दें, 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था. इस हमले में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी और इसके बाद से ही तीनों देश जंग की आग में जल रहे हैं. ईरान मिडिल ईस्ट के कई दोशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर चुका है और होर्मुज, जिसके जरिए दुनिया भर का 20 फीसद तेल सप्लाई होता है, उस पर पूरी तरह के कंट्रोल हासिल कर लिया है.
क्या भारत के पास है पर्याप्त भंडार?
सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल या डीजल की राशनिंग करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा समय में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जो घरेलू मांग को पूरा करने के लिए काफी है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर आया है, लेकिन भारत के पास अभी पर्याप्त भंडार है.
गेल (इंडिया) लिमिटेड जरूरत पड़ने पर फोर्स मेजर लागू कर सकती है, ताकि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस की आपूर्ति जारी रखी जा सके. फोर्स मेजर एक ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें असामान्य परिस्थितियों में कंपनियां अपने कॉन्ट्रैक्ट की कुछ शर्तों को अस्थायी रूप से रोक सकती हैं और इसके लिए उन पर कोई जुर्माना नहीं लगता.
क्या कतर की वजह से आएगा संकट?
यह कदम उस समय सामने आया है जब कतर एनर्जी ने भी फोर्स मेजर की घोषणा की है. कतर भारत के लिए गैस का एक बड़ा सप्लायर है. भारत हर दिन लगभग 195 एमएमएससीएमडी (Million Metric Standard Cubic Meters per Day) एलएनजी (Liquefied Natural Gas) आयात करता है, जिसमें से करीब 60 एमएमएससीएमडी गैस कतर से आती है. कतर दुनिया की कुल एलएनजी सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा देता है.
बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी भारत को गैस सप्लाई करने की पेशकश की है. सरकार गैस के आयात को अलग-अलग स्रोतों से सुनिश्चित करने के लिए नए विकल्पों पर भी विचार कर रही है.
क्या है भारत का प्लान?
भारत कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े तेल उत्पादक देशों और ट्रेडर्स से भी बातचीत कर रहा है. इसके अलावा सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन जैसे वैश्विक ऊर्जा संगठनों के साथ भी संपर्क में है. उधर, अमेरिका ने भारत को रूसी तेल लेने की स्थायी इजाजत दे दी है. इसकी मीयाद केवल 30 दिनों की है.
इसके अलावा भारत ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ समझौते किए हैं, ताकि ऊर्जा के स्रोतों को और विविध बनाया जा सके. अधिकारियों के अनुसार सरकार रोजाना दो बार ऊर्जा की स्थिति की समीक्षा कर रही है. उनका कहना है कि देश फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है और मौजूदा भंडार पर्याप्त है, साथ ही स्टॉक को लगातार दोबारा भरा भी जा रहा है.
कच्चे तेल का कितने दिनों का भंडार मौजूद?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग आठ सप्ताह का भंडार मौजूद है, जिसमें रणनीतिक भंडार भी शामिल हैं. इसके अलावा एलपीजी, एलएनजी या कच्चे तेल की वैश्विक स्तर पर कोई कमी नहीं है और भारत कई सप्लायर देशों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है.