आज 22 सितंबर को देश में नई GST 2.0 रिफॉर्म्स लागू हो चुकी है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी और आम आदमी की जेब पर बोझ कम होगा. यह कदम त्योहारों और विधानसभा चुनाव के अहम राज्य में जनता के बीच उत्साह पैदा कर सकता है. खासकर छठ पूजा और दिवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के ठीक पहले यह सुधार आया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'खुशियों का डबल धमाका' कहा है और कहा कि अब सबका मुंह मीठा होगा.

छठ पूजा और दिवाली के समय पूजा सामग्री और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी से लोगों की खरीदारी आसान होगी. बाजारों में त्योहारी रौनक बढ़ने की संभावना है और स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह बड़ा लाभ है.

रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती

GST 2.0 के तहत कई रोजमर्रा की चीजें पहले की तुलना में सस्ती होंगी. टूथपेस्ट, साबुन, शैंपू, बिस्कुट, पैकेज्ड स्नैक्स, जूस, दूध से बनी चीजें, स्टेशनरी और साइकिलें अब 5% टैक्स स्लैब में आ जाएंगी. इसके अलावा कपड़े और जूते भी निश्चित दाम से कम कीमत में मिलेंगे. छोटी कारों (1,200 सीसी तक) पर टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है, जिससे आम आदमी को भी वाहन खरीदने में राहत मिलेगी.

इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरण

28% टैक्स वाली इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं और घरेलू उपकरणों जैसे एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, डिशवॉशर और बड़े स्क्रीन वाले टीवी पर अब 18% ही टैक्स लगेगा. इससे इनकी कीमत में 7-8% की कमी आएगी. यह बदलाव त्योहारी खरीदारी और आम आदमी की सुविधा के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है.

वित्तीय और चुनावी असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम से बिहार के ग्रामीण और मध्यम वर्ग के मतदाताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा. रोजमर्रा की चीजों की कीमत में कमी और त्योहारी सामान सस्ता होने से भाजपा के लिए चुनावी माहौल में फायदा हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'जीएसटी 2.0 न केवल आम लोगों की जेब पर बोझ कम करेगा, बल्कि यह छठ और दिवाली जैसे पवित्र त्योहारों को और खास बनाएगा. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है.'

आज क्या हो जाएगा महंगा?

हालांकि GST 2.0 में हर चीज सस्ती नहीं होगी. 40% स्लैब में शामिल “पाप कर” (SIN Tax) वाली वस्तुएं महंगी होंगी. इनमें तंबाकू, शराब, पान मसाला और ऑनलाइन सट्टेबाजी/गेमिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं. पेट्रोलियम उत्पाद, पेट्रोल और डीजल, GST के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इनके दामों में कोई कमी नहीं आएगी.

फेस्टिवल खरीदारी पर असर

छठ पूजा, दिवाली और नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में कमी से आम आदमी और श्रद्धालु सीधे लाभान्वित होंगे. यह कदम न केवल त्योहारी खरीदारी को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाजार की गतिविधियों में तेजी लाएगा.