I-PAC के पास है हवाला का पैसा! ममता बनर्जी की एंट्री के बाद उठने लगे सवाल, 100 करोड़ की हकीकत क्या है?
I-PAC दफ्तर पर Enforcement Directorate की छापेमारी के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि क्या वाकई पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के पास हवाला का पैसा है. विपक्षी नेता Suvendu Adhikari ने दावा किया है कि अगर मुख्यमंत्री आवास पर छापा पड़ा तो 100 करोड़ रुपये मिल सकते हैं. हालांकि अब तक ED की ओर से किसी भी तरह की नकदी बरामदगी या हवाला नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे में यह मामला जांच से ज्यादा सियासी बयानबाज़ी का केंद्र बनता दिख रहा है.;
कोलकाता में Enforcement Directorate की I-PAC दफ्तर पर छापेमारी के बाद एक सवाल तेजी से तैरने लगा कि क्या वाकई I-PAC के पास हवाला का पैसा है? और क्या 100 करोड़ रुपये मिलने के दावे में कोई सच्चाई है? जांच एजेंसी की कार्रवाई ने इस मामले को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पूरी तरह सियासी बहस में बदल दिया है. अभी तक ED ने बरामदगी या आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बयानबाज़ी तेज हो चुकी है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने ED की रेड के बाद तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि I-PAC कोई पार्टी कार्यालय नहीं, बल्कि एक कॉरपोरेट संस्था है, ऐसे में उसके पास वोटर लिस्ट जैसे दस्तावेज क्यों हैं, यह जांच का विषय है. सुवेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि वह ED की जांच पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार केंद्रीय एजेंसियों के काम में दखल देना गंभीर सवाल खड़े करता है.
‘100 करोड़ मिलेंगे’ का दावा या सियासी तीर?
सबसे ज्यादा चर्चा सुवेंदु अधिकारी के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अगर मुख्यमंत्री आवास पर छापा पड़ा, तो कम से कम 100 करोड़ रुपये की बरामदगी होगी. यह बयान कानूनी सबूत से ज्यादा राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. अभी तक न तो ED और न ही किसी अन्य एजेंसी ने ऐसे किसी हवाला नेटवर्क या रकम की पुष्टि की है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दावा फिलहाल सियासी बयानबाज़ी के दायरे में ही आता है.
जांच के घेरे में I-PAC क्यों?
I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो चुनावी रणनीति और डेटा एनालिटिक्स का काम करती है. इसकी स्थापना पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी. लंबे समय तक यह फर्म Trinamool Congress के साथ काम करती रही है. ED की दिलचस्पी कथित वित्तीय लेन-देन और फंडिंग पैटर्न में बताई जा रही है, न कि किसी घोषित राजनीतिक गतिविधि में.
ममता बनर्जी पर ‘हस्तक्षेप’ का आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का केंद्रीय एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप का पुराना रिकॉर्ड रहा है. उन्होंने 2021 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी ममता बनर्जी CBI कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी थीं. अधिकारी के मुताबिक, एक संवैधानिक पद पर बैठी मुख्यमंत्री का इस तरह जांच एजेंसियों के खिलाफ सड़कों पर उतरना जांच प्रक्रिया को प्रभावित करता है.
क्या हवाला का कोई ठोस सबूत है?
अब तक सार्वजनिक रूप से हवाला नेटवर्क या अवैध नकदी को लेकर कोई ठोस दस्तावेज या बरामदगी सामने नहीं आई है. ED की कार्रवाई अभी तलाशी और दस्तावेज़ों की जांच तक सीमित बताई जा रही है. कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक चार्जशीट या आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक हवाला और 100 करोड़ जैसे दावे केवल आरोप माने जाएंगे, तथ्य नहीं.
जांच vs राजनीति की जंग
यह पूरा मामला अब कानून से ज्यादा राजनीति का अखाड़ा बनता दिख रहा है. एक तरफ विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और अवैध फंडिंग का मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश कर रहा है. I-PAC की छापेमारी ने बंगाल की राजनीति में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है.
सच सामने आएगा या बयानबाज़ी चलेगी?
असल सच्चाई अब ED की जांच पर निर्भर करती है. अगर हवाला या अवैध रकम के ठोस सबूत मिलते हैं, तो मामला कानूनी मोड़ लेगा. लेकिन अगर जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आता, तो 100 करोड़ का दावा महज सियासी शोर बनकर रह जाएगा. फिलहाल, I-PAC की रेड ने बंगाल की राजनीति में सवाल ज्यादा खड़े किए हैं, जवाब अभी बाकी हैं.