बालाकोट एयरस्ट्राइक के 7 साल : बदला नहीं रुख, इजरायल से पीएम मोदी ने PAK को दिए ये 5 बड़े संदेश
बालाकोट एयरस्ट्राइक के 7 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने इजरायल से आतंकवाद पर सख्त रुख दोहराया. पाकिस्तान को बिना नाम लिए 5 बड़े संदेश दिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे ने न सिर्फ भारत–इजराइल रिश्तों को मजबूत किया बल्कि पाकिस्तान के लिए साफ संदेश भी दिए. आतंकवाद, रक्षा और कूटनीतिक गठबंधनों पर केंद्रित यह दौरा क्षेत्रीय रणनीति में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. भारत-पाकिस्तान तकरार के संदर्भ में हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत ने अपनी कूटनीतिक भाषा को और अधिक सख्त लेकिन संतुलित बनाया है. पहली बात, सीमा पार से होने वाली गतिविधियों को लेकर भारत ने स्पष्ट रूप से “आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” जैसा संदेश दिया.
दूसरी, बिना सीधे नाम लिए भारत ने “पड़ोसी देश” और “ऐसे तत्व जो शांति भंग करते हैं” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर इशारा किया, जो साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर माना गया. तीसरी, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने यह रेखांकित किया कि “कुछ देश आतंकवाद को पनाह देते हैं”, जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर आरोप है. चौथी, सैन्य स्तर पर सतर्कता बढ़ाते हुए भारत ने “जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित” रखने की बात कही. पांचवीं, कूटनीतिक स्तर पर यह भी दोहराया गया कि “वार्ता और आतंक साथ-साथ नहीं चल सकते”, जो बिना नाम लिए पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है. इस तरह भारत ने सीधे नाम लिए बिना भी सटीक और कड़ा रुख जाहिर किया है. दुनिया में कहीं भी आतंकवाद क्यों न हो उसके लिए हमारी एक ही नीति है जीरो टॉलरेंस. जानें कैसे भारत बढ़ा रहा है सुरक्षा और वैश्विक समर्थन.
1. आतंकवाद पर सख्त रुख
भारत ने हाल के वर्षों में आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी नीति को और अधिक स्पष्ट और आक्रामक बनाया है. सरकार लगातार यह दोहराती रही है कि “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते” और किसी भी प्रकार के आतंकवादी हमले का जवाब निर्णायक तरीके से दिया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत ने यह मुद्दा मजबूती से उठाया है कि कुछ देश आतंकवाद को संरक्षण देते हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को खतरा होता है. इजरायली संसद में पाकिस्तान का सीधे नाम लिए बिना भारत का यह रुख स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा करता है, जिसे वैश्विक स्तर पर भी कई बार इस मुद्दे पर घेरा गया है.
2. रक्षा और तकनीकी सहयोग
भारत ने अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने के लिए कई देशों के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाया है. अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अमेरिका, फ्रांस और इजराइल जैसे देशों के साथ बढ़ते सहयोग ने भारत की सैन्य क्षमता को नई मजबूती दी है, जिससे वह किसी भी संभावित खतरे का बेहतर तरीके से सामना कर सके. इस बीच इजरायल से रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर को पाकिस्तान के खिलाफ भारत की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.
3. मिडिल ईस्ट कूटनीति
भारत के खिलाफ पाकिस्तान मुस्लिम देशों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता आया है. उसके इस धार को कुंद करने के लिए मध्य पूर्व में भारत की कूटनीति ने भी संतुलन और रणनीतिक समझदारी का परिचय दिया है. भारत ने एक तरफ इजरायल के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब, यूएई ईरान, ओमान, बहरीन जैसे देशों के साथ भी अपने रिश्तों को संतुलित रखा है. इस संतुलित नीति से भारत को ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में लाभ मिला है. साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता में भी उसकी भूमिका मजबूत हुई है. इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते असर भी पाकिस्तान को चुभ रहा है. इसलिए पाकिस्तान ने इस्लामिक नाटो बनाने की भी घोषणा की थी, जिसकी हवा निकल चुकी है.
4. वैश्विक समर्थन
इजरायल की धरती से पीएम कोदी का आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर जोर देना और वैश्विक शांति की पहल को और तेज करने पर जोर दिया है. इस रणनीति के तहत भारत को अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई अन्य शक्तियों का समर्थन मिला है. यूएन जैसे मंचों पर भी भारत की आवाज पहले से अधिक प्रभावशाली हुई है, जिससे उसकी कूटनीतिक ताकत का विस्तार हुआ है और पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हुई है. पीएम के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी इस रणनीति पर अमल करते रहेंगे. यानी पाकिस्तान जब तक आतंकवाद का सहारा लेता रहेगा, भारत से उसकी बातचीत होना मुश्किल है.
5. खुफिया और सुरक्षा साझेदारी
जहां तक खुफिया सुरक्षा की बात है तो पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तानी आईएसएस कमजोर हुई है, वहीं भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी ज्यादा प्रभावी हुई है. ऐसे में इजरायल से खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में राजनयिक संबंधों को आगे बढ़ाना भी पाकिस्तान के लिए शुभ संकेत नहीं है. ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान इजरायल को भी अपना दुश्मन मानता है. पाकिस्तान के हुक्मरान बार-बार इस बात का जिक्र करते भी आए हैं कि इजरायल भारत के साथ मिलकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है. विभिन्न देशों के साथ इंटेलिजेंस शेयरिंग, आतंकवादी नेटवर्क की निगरानी और साइबर खतरों से निपटने के लिए साझेदारी बढ़ाई गई है. इससे संभावित हमलों को पहले ही रोकने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिली है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है.
पीएम मोदी ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को यह संदेश पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ सात साल पहले भारतीय सेना के बालाकोट एयरस्ट्राइक यानी सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन पहले दिया. बता दें कि 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना के विमानों ने नियंत्रण रेखा को पार कर पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा चलाए जा रहे आतंकवादी शिविरों को निशाना ध्वस्त कर दिया था.