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सीमा पार आतंकवाद से लेकर डिजिटल जिहाद तक, 10 प्वाइंट्स में समझिए क्या है भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी Prahaar
भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ पहली बार एक समग्र राष्ट्रीय नीति ‘प्रहार’ पेश की है. यह नीति सीमा पार हमलों से लेकर डिजिटल जिहाद और ड्रोन आतंक तक हर खतरे को कवर करती है.
( Image Source:
Sora AI )
भारत सरकार ने पहली बार आतंकवाद से निपटने के लिए एक समग्र राष्ट्रीय नीति पेश की है, जिसे ‘प्रहार’ नाम दिया गया है. यह नीति सिर्फ सीमा पार से होने वाले हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हमले, कट्टरपंथी प्रचार और नई तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों को भी सीधे संबोधित करती है. सरकार के अनुसार, आज आतंकवाद जमीन, हवा और समुद्र - तीनों रास्तों से भारत के लिए खतरा बना हुआ है.
इस नीति का मकसद केवल हमलों को रोकना नहीं, बल्कि युवाओं को कट्टरपंथ की ओर जाने से बचाना, आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना भी है. ‘प्रहार’ नीति इस बात पर जोर देती है कि आतंकवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती, लेकिन यह भी स्वीकार करती है कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकी नेटवर्क लंबे समय से भारत को निशाना बनाते रहे हैं.
‘प्रहार’ नीति की 10 मुख्य बातें
- सीमा पार आतंकवाद पर फोकस : नीति में साफ कहा गया है कि भारत को सबसे बड़ा खतरा सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद से है. जिहादी संगठनों और उनके फ्रंट संगठनों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और उनके नेटवर्क को तोड़ना प्राथमिक लक्ष्य होगा.
- साइबर और डिजिटल आतंकवाद से निपटना : आतंकी संगठन सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, डार्क वेब और एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. नीति के तहत ऑनलाइन प्रचार, फंडिंग और संपर्क तंत्र को रोकने के लिए साइबर निगरानी और तकनीकी क्षमता बढ़ाई जाएगी.
- ड्रोन और नई तकनीकों पर सख्ती : ड्रोन, रोबोटिक्स और एडवांस तकनीक के जरिए हथियार और विस्फोटक भेजे जाने को गंभीर खतरा माना गया है. नीति में इन तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र विकसित करने की बात कही गई है.
- CBRNED खतरों पर नियंत्रण : रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, विस्फोटक और डिजिटल सामग्री तक आतंकियों की पहुंच रोकना बड़ी चुनौती बताया गया है. नीति इन संवेदनशील सामग्रियों की निगरानी और तस्करी रोकने पर जोर देती है.
- युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने की रणनीति : नीति में माना गया है कि आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को बहकाने की कोशिश करते हैं. ऐसे मामलों में चरणबद्ध पुलिस कार्रवाई, काउंसलिंग और सामाजिक हस्तक्षेप के जरिए उन्हें मुख्यधारा में लाने की व्यवस्था होगी.
- समुदाय और धार्मिक नेताओं की भूमिका : सरकार ने माना है कि कट्टरपंथ रोकने में समाज की बड़ी भूमिका है. नीति के अनुसार, मध्यमार्गी धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और एनजीओ को जोड़कर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जाएगा.
- जेलों में कट्टरपंथ रोकने पर ध्यान : नीति में कहा गया है कि जेलें भी कट्टरपंथ फैलने का केंद्र बन सकती हैं. इसलिए जेल प्रशासन को सतर्क रहने, कमजोर कैदियों को कट्टर विचारधारा से बचाने और डि-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
- मजबूत कानूनी कार्रवाई पर जोर : आतंकियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार करने के लिए एफआईआर से लेकर अदालत में मुकदमे तक हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने की सिफारिश की गई है, ताकि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके.
- संगठित अपराध और आतंकवाद का गठजोड़ : नीति में बताया गया है कि आतंकी संगठन अब स्थानीय आपराधिक गिरोहों की मदद से लॉजिस्टिक्स और भर्ती करते हैं. इसलिए संगठित अपराध और आतंकवाद दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति अपनाई जाएगी.
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना : दस्तावेज में कहा गया है कि आतंकवाद वैश्विक समस्या है. इससे निपटने के लिए भारत राष्ट्रीय कार्रवाई के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करेगा, ताकि सीमा पार आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके.




