EXCLUSIVE: वेनेजुएला के बाद किसका नंबर? आज नहीं तो कल बेकाबू ट्रंप भारत की ओर घूरने में नहीं शरमाएगा!

विदेश मामलों के जानकार डॉ. सतीश मिश्रा ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि अगर ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय अपराधी कहा जाए, तो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो भी कोई संत नहीं हैं. डॉ. मिश्रा के मुताबिक अमेरिका ने जिस तरह वेनेजुएला के साथ ताकत के बल पर कार्रवाई की, वह उसकी दशकों पुरानी ‘गुंडा नीति’ का हिस्सा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को हैरान करने वाला बताया.;

By :  संजीव चौहान
Updated On : 5 Jan 2026 4:45 PM IST

‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह से बीते कल के दुनिया के चौथे नंबर के धन्नासेठ देश और आज के बर्बाद हो चुके वेनेजुएला पर हथियारबंद गुंडों की तरह हमला बोलकर, रात के वक्त वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया. यह दुनिया के लिए चौंकाने वाला होगा. मैं इसे किसी हैरानी वाली नजर से नहीं देखता हूं. क्योंकि मैंने अमेरिका की गुंडई बीते 60-70 साल में अपनी आंखों से देखी है.'

'न तो अमेरिका और उसका मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शरीफ है. न ही अमेरिका द्वारा घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया वेनेजुएला का राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ही कोई शरीफ इंसान है. ट्रंप को तो मैं इंटरनेशनल क्रिमिनल मानता ही हूं वह है भी. जहां तक बात निकोलस मादुरो की करूं तो जो लोग आज अमेरिका द्वारा उसे इतनी बेशर्मी के साथ पकड़े जाने की बात है, तो यह भी मातम मनाने का मुद्दा नही हैं. निकोलस मादुरो ने किस तरह लोकतंत्र को पावों तले कुचलकर अपना पिछला चुनाव जीतकर सत्ता हथियाई दुनिया ने यह भी देखा है. जिसने निकोलस मादुरो का वह खूंखार रूप देखा-भोगा वह कभी नहीं कहेगा कि छंटे हुए गुंडा टाइप ट्रंप ने मादुरो के संग कुछ भी गलत किया है.’

मैं भारत की खामोशी पर हैरान हूं

यह तमाम बेबाक बातें डॉ. सतीश मिश्र ने नई दिल्ली में बयान कीं. ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के पूर्व सीनियर फ़ेलो, विदेश मामलों के विशेषज्ञ, भारत और जर्मनी में पांच दशक तक राजनीतिक-आर्थिक पत्रकारिता के अनुभवी, राजनीतिक विश्लेषण, विदेश मामले, गांधीवादी विचार, भारत और GDR: संबंधों के तीन दशक, भारत और अंटार्कटिक संधि (योगदान), जलियांवाला बाग हत्याकांड और द ट्रिब्यून (योगदान), प्रज्ञान वार्षिकी एवं ज्ञान कोष (हिंदी माइक्रोपीड़िया) (योगदान) के लेखक रह चुके डॉ. सतीश मिश्र “स्टेट मिरर हिंदी” के एडिटर इनवेस्टीगेशन से एक्सक्लूसिव बात कर रहे थे. उन्होंने कहा, “बेशक मैं ट्रंप के द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिए जाने पर हैरान न होऊं. हां, इस मुद्दे पर हिंदुस्तानी हुकूमत और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर जरूर हैरान हूं. यह हैरानी की बात भी है.”

रूस-क्यूबा खुलकर सामने हैं, भारत गायब

भारत की खामोशी पर मैं हैरान इसलिए नहीं हूं कि भारत इस मुद्दे पर सीधे-सीधे अमेरिका से टकराने और वेनेजुएला को इस संकट की घड़ी में बचाने को क्यों नहीं कूदा. मैं यह सोच रहा हूं कि जो मोदी जी भारत के तमाम पूर्व प्रधानमंत्रियों की विदेश-नीतियों का रिकॉर्ड तोड़कर आए दिन छोटे-छोटे देशों की भी यात्रा करके भारत की विदेश नीति की अलग ही छाप दुनिया के माथे पर छोड़ रहे हैं. वह मोदी और ऐसे प्रधानमंत्री मोदी वेनेजुएला के मुद्दे पर श्‍मशानी खामोशी अख्तियार करके ‘सन्नाटे’ में क्यों हैं? वह भी तब भारत के मजबूत दोस्त रूस (पुतिन) और क्यूबा जैसे भारत के सामने बेहद छोटे देश ने भी वेनेजुएला के साथ ट्रंप की इस बेजा शर्मनाक हरकत का खुलकर विरोध जाहिर कर डाला है. क्यूबा के तो राष्ट्रपति और वहां की जनता ही वेनेजुएला के पक्ष में और ट्रंप व अमेरिका के विपक्ष में खुलकर सड़कों पर आ खड़े हुए हैं. फिर वह भारत और मोदी जी जो दुनिया में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश और देश का प्रधानमंत्री का राग अलापते फिरते रहते हैं, आखिर इतने अहम अंतरराष्ट्रीय मसले पर खामोश क्यों?

कहीं ऐसा तो नहीं है कि...

संभव है कि मेरा यह जायज तर्क आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी हुकूमत के गले आसानी से न उतरे. या मेरे इस बेबाक और सटीक कथन को अन्यथा लिया जाए. लेकिन अगर मेरे जैसे बुद्धिजीवी लेखक पत्रकार विदेश मामलों के बीच में बीते 60-70 साल से जीवन गुजारने वाले भी खामोश हो जाएंगे तो फिर वही सवाल कि, बोलेगा कौन और क्यों? भारत और मोदी तो पहले से ही खामोश बैठे हैं. जमाना देख रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि मोदी की अमेरिका और वहां के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जबरदस्त ट्यूनिंग और दोस्ती है? इसलिए मोदी जी और भारत ने वेनेजुएला के मुद्दे पर अमेरिका के खिलाफ जाने की बजाए खामोश रहने में ही खैर समझी हो? मोदी जी ने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच मचे घमासान में इसीलिए देश हित में खामोश रहने में ही भलाई समझी हो. क्योंकि यह दो मोहल्लों की लड़ाई नहीं अपितु दो देशों के बीच आन पड़ी खून-खराबे की नौबत का सवाल है.

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तब मोदी और ट्रंप की दोस्ती कहां थी

स्टेट मिरर हिंदी के इस सवाल के जवाब में विदेश मामलों मर्मज्ञ डॉ. सतीश मिश्रा बोले, “नहीं ऐसा नहीं होता है. मान भी लिया जाए कि मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती बॉन्डिंग अगर इतनी ही जबरदस्त थी कि अब मोदी जी वेनेजुएला के मुद्दे पर मुंह बंद किए बैठे हैं, तो ऐसे में मोदी जी अपनी दोस्ती के ही हवाले से यह भी बताएं कि मेरी नजर में जब यही इंटरनेशनल क्रिमिनल गुंडाटाइप अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका से हथकड़ियों-बेड़ियों में बांधकर भारतीयों को हम-वतन भेज रहा था, तब उस ट्रंप ने मोदी जी से अपनी दोस्ती की शर्म क्यों नहीं की? दूसरी बात, जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में त्राहि-माम त्राहि-माम मची थी, तब फिर यही मोदी जी का दोस्त ट्रंप क्यों सीज-फायर सीज-फायर का रोना रोने लगा और मोदी जी को इसके आगे क्यों झुकना पड़ा?

अमेरिका भारत को भी घूरने में नहीं हिचकेगा

कहां थी मोदी जी और ट्रंप की पक्की दोस्ती तब जब साल 2025 में इसी अमेरिका और इसी मक्कार डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा 50 फीसदी टैरिफ लगाया था? तब तो ट्रंप ने मोदी जी और भारत से अपने मधुर संबंधों-दोस्ती की ओर फूटी आंख उठाकर भी नहीं देखा था. मैं आपको साफ साफ बताना चाहता हूं और फिर दोहराता हूं कि मोदी जी की यह गलतफहमी है कि ट्रंप और अमेरिका मोदी जी का दोस्त या शुभचिंतक है. अमेरिका जन्मजात मक्कार है. और वहां का मौजूदा राष्ट्रपति मेरी नजर में नहीं दुनिया के तमाम शांति चाहने वाले देशों की निगाह में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल है. जिसकी नजरें सिर्फ इस बात पर लगी रहती हैं कि कब कौन से कमजोर देश को अपने काबू में किया जाए. कब किस उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले और सैन्य ताकत में बढ़ते हुए देश को नियंत्रित करके उसे बेदम किया जाए. ऐसे ही एक देश के रूप में अमेरिका की नजर में हम भी (भारत) हैं. थोड़ा इंतजार कीजिए अभी तो ट्रंप ने सिर्फ 50 फीसदी टैरिफ लगाकर और हमारे लोगों को बेड़ियों-हथिकड़ियों में जकड़कर ही हमें हमारी औकात बताई-जताई है. आने वाले वक्त में भी अगर हिंदुस्तानी हुकूमत की आंखें नहीं खुलीं तो यही ट्रंप भारत को भी घूरने में नहीं शरमाएगा.”

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