क्या है एग्जाम सर्विलांस सिस्टम, कैसे करता है काम? 4 पॉइंट्स कर रहे विवाद खड़ा

एग्जाम सर्विलांस सिस्टम, खासकर AI और CCTV आधारित निगरानी को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है. हालांकि, जहां एक ओर इसे नकल रोकने का मजबूत उपाय माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सिस्टम गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़े विवाद का कारण बन गया है.

Exam surveillance system

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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Exam Surveillance System: भारत में NEET, UGC NET और UP Board Exam जैसी बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोपों ने पूरे परीक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए. इन घटनाओं के बाद सरकार और शिक्षा संस्थानों ने परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है.

इसी कड़ी में अब एग्जाम सर्विलांस सिस्टम, खासकर AI और CCTV आधारित निगरानी को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है. हालांकि, जहां एक ओर इसे नकल रोकने का मजबूत उपाय माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सिस्टम गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़े विवाद का कारण बन गया है.

क्या है एग्जाम सर्विलांस सिस्टम?

एग्जाम सर्विलांस सिस्टम यानी परीक्षा निगरानी प्रणाली का उद्देश्य परीक्षाओं को निष्पक्ष, सुरक्षित और नकल-मुक्त बनाना है. इस सिस्टम में पारंपरिक सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग और डेटा मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है. परीक्षा केंद्रों से सीधे कंट्रोल रूम जैसे जिला प्रशासन या शिक्षा बोर्ड मुख्यालय तक लाइव वीडियो फीड भेजी जाती है, जहां अधिकारी रियल टाइम में हर गतिविधि पर नजर रखते हैं.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

इस प्रणाली में एआई आधारित सॉफ्टवेयर छात्रों की गतिविधियों का विश्लेषण करता है. अगर कोई संदिग्ध हरकत दिखाई देती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है. इसके अलावा, कई जगहों पर फेशियल रिकग्निशन और बायोमेट्रिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उम्मीदवार की पहचान की पुष्टि की जाती है और फर्जीवाड़े को रोका जा सके.

एग्जाम सर्विलांस सिस्टम से जुड़े विवाद क्या?

1. AI आधारित सिस्टम उम्मीदवारों का फेशियल रिकग्निशन, बायोमेट्रिक डेटा और लाइव वीडियो रिकॉर्ड करता है. ऐसे में इस संवेदनशील डेटा के लीक होने या गलत हाथों में जाने का खतरा बना रहता है, जो छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है.

2. कई मामलों में AI सिस्टम सामान्य गतिविधियों जैसे इधर-उधर देखना या हलचल करना को भी नकल समझ लेता है. इससे ‘फॉल्स अलर्ट’ उत्पन्न होते हैं और निर्दोष छात्रों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ सकती है.

3. परीक्षा केंद्रों पर 24/7 सीसीटीवी और एआई निगरानी के कारण छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बनता है. लगातार निगरानी में परीक्षा देने से कई छात्रों में तनाव और घबराहट बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं.

4. इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या या कैमरों के खराब होने की स्थिति में परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे छात्रों का समय बर्बाद होता है और परीक्षा का अनुभव भी खराब होता है.

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