Borderline Personality Disorder क्या है, जिसके पीड़ित आधे लोग हैं 'शराबी'?
एक नई मेटा-स्टडी में सामने आया है कि (BPD) से पीड़ित 55% से ज्यादा लोगों को Alcohol Use Disorder भी है. विशेषज्ञों ने ऐसे लोगों के लिए इंटीग्रेटेड स्क्रीनिंग और डुअल-ट्रीटमेंट मॉडल की तत्काल जरूरत बताई है.
एक बड़े मेटा-एनालिसिस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अस्थायी व्यक्तित्व परेशानी (Borderline Personality Disorder) से पीड़ित 55 प्रतिशत से अधिक लोगों को शराब पीने होने वाले परेशानी (Alcohol Use Disorder) है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों को हाई रिस्क स्वास्थ्य समस्या यानी कोमोरबिडिटी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में इंटीग्रेटेड स्क्रीनिंग और संयुक्त इलाज की तत्काल जरूरत है.
बीपीडी डिसऑर्डर क्या है?
BPD एक जटिल मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति भावनात्मक रूप से अत्यधिक अस्थिर रहता है. इसके प्रमुख लक्षणों में मूड में अचानक बदलाव, नशे की लत, आवेगपूर्ण व्यवहार, रिश्तों में अस्थिरता, आत्म-नुकसान या आत्महत्या की प्रवृत्ति और खालीपन या असुरक्षा की भावना का अहसास होता है. यह विकार आमतौर पर किशोरावस्था या युवावस्था में शुरू होता है और लंबे समय तक व्यक्ति के सामाजिक और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है.
बीपीडी का जोखिम क्यों बढ़ता है?
BPD एक जटिल दिमागी रोग है, जिसमें भावनात्मक अस्थिरता, आवेगपूर्ण व्यवहार, रिश्तों में अस्थिरता और आत्म-नुकसान की प्रवृत्ति देखी जाती है. पहले की कई शोधों में यह संकेत मिला था कि BPD और नशे की लत, खासकर शराब के दुरुपयोग के बीच गहरा संबंध है. हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों में इसके आंकड़े काफी भिन्न रहे थे.
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार शराब का दुरुपयोग BPD के लक्षणों को और गंभीर बना सकता है. आत्महत्या या स्वयं को नुकसान पहुंचाने के खतरे को बढ़ा सकता है और इलाज के पालन (ट्रीटमेंट एडहेरेंस) को कठिन बना देता है.
मेटा-एनालिसिस में क्या सामने आया?
मेटा स्टडी में 15 प्रतिशत शोधों की समीक्षा की गई, जिनमें 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के कुल 15,603 BPD मरीज शामिल थे. शोधकर्ताओं ने मार्च 2024 तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस में उपलब्ध अध्ययनों का विश्लेषण किया और सिस्टमैटिक रिव्यू गाइडलाइंस का पालन किया.
इस स्टडी में नतीजा यह निकला कि कुल बीपीडी मरीजों में 55.28% लोग अल्कोहल यूज डिसऑर्डर यानी शराबी पाए गए. 44.59% मरीज अल्कोहल डिपेंडेंस के मानकों पर खरे उतरे. 18.84% को अल्कोहल एब्यूज के रूप में चिन्हित किया गया.
इसके मुकाबले, सामान्य आबादी में अल्कोहल यूज डिसऑर्डर का अनुमानित प्रिवेलेंस पुरुषों में 8.6% और महिलाओं में 1.7% है. यह तुलना बताती है कि BPD से ग्रस्त लोगों में शराब पीने की आदतन कई गुना अधिक है.
क्यों जरूरी है इंटीग्रेटेड ट्रीटमेंट?
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अल्कोहल से जुड़े विकार BPD में एक आम और क्लिनिकली हाई रिस्क जोन वाले हैं. ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों में नियमित स्क्रीनिंग और बेहतर हेल्थ प्रबंधन पर जोर देने की जरूरत है.
स्टडी में ऐसे लोगों का “डुअल-डायग्नोसिस” अप्रोच पर जोर दिया गया है. यानी ऐसा उपचार मॉडल जो एक साथ मानसिक विकार और नशे की लत दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सके.
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा कर बीपीडी मरीजों को समस्याओं से पार पाने में मदद मिल सकती है. मनोवैज्ञानिक और नशा-निवारण हस्तक्षेप इलाज की सफलता बढ़ा सकते हैं. ट्रीटमेंट एडहेरेंस और दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हो सकते हैं
गंभीर क्लिनिकल चुनौती क्यों?
फिलहाल, मेटा-एनालिसिस दर्शाता है कि BPD और अल्कोहल यूज डिसऑर्डर का संबंध केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर क्लिनिकल चुनौती है. इसलिए मानसिक स्वास्थ्य नीतियों और क्लिनिकल प्रैक्टिस में इंटीग्रेटेड स्क्रीनिंग और डुअल-फोकस ट्रीटमेंट मॉडल को प्राथमिकता देना वक्त की मांग है.
खुद को भी क्यों नुकसान पहुंचाते हैं इसके मरीज?
शराब का गलत इस्तेमाल लक्षणों की गंभीरता को बढ़ाने, खुद को नुकसान पहुंचाने के खतरे को बढ़ाने और इलाज के पालन को मुश्किल बनाने के लिए जाना जाता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमजोर मरीजों की जल्दी पहचान करने और साइकेट्रिक लक्षणों और नुकसानदायक ड्रिंकिंग बिहेवियर, दोनों को ठीक करने के लिए कोऑर्डिनेटेड मैनेजमेंट अप्रोच से ठीक करना आवश्यक है.