Begin typing your search...

Chinese Robot Dog Controversy : AI समिट में गलगोटिया को कैसे मिल गई 5 IIT से भी ज्यादा जगह?

Chinese Robot Dog Controversy : इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो में चीनी रोबोट डॉग डिस्प्ले करने पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एग्जिबिटर सूची से हटा दिया गया. IITs से ज्यादा स्पेस मिलने और 14 लाख भुगतान के बावजूद यह कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है.

Chinese Robot Dog Controversy : AI समिट में गलगोटिया को कैसे मिल गई 5 IIT से भी ज्यादा जगह?
X
( Image Source:  x@shubham43027700 )

Chinese Robot Dog Controversy : भारत की तकनीकी ताकत दिखाने के लिए आयोजित AI समिट में एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए. नोएडा स्थित Galgotias University को समिट में 155 स्क्वेयर मीटर का बड़ा स्पेस मिला, जो पांच प्रतिष्ठित IIT संस्थानों को संयुक्त रूप से मिली जगह से भी अधिक था, लेकिन चर्चा उस स्पेस की नहीं, बल्कि वहां प्रदर्शित किए गए कथित चीनी रोबोट डॉग की वजह से भड़क उठी.

जब यह मामला सामने आया तो आयोजकों और मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) को कार्रवाई करनी पड़ी और यूनिवर्सिटी को एग्जिबिशन से बाहर कर दिया गया. सवाल अब सिर्फ एक रोबोट डॉग का नहीं है, बल्कि यह है कि आखिर स्पेस अलॉटमेंट की प्रक्रिया क्या थी, जांच क्यों नहीं हुई, और कैसे एक निजी संस्थान को पांच IIT से ज्यादा जगह मिल गई? यही मुद्दा अब AI समिट के सबसे बड़े विवाद के केंद्र में है. एक अहम सवाल यह है ​कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ऐसी गलती क्यों की, यह जानते हुए कि एआई समिट इंटरनेशनल इवेंट है.

क्या है पूरा इंडिया AI एक्सपो विवाद?

देश-दुनिया में चर्चित इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो में नोएडा स्थित Galgotias University को बड़ा झटका लगा. चीनी रोबोट डॉग प्रदर्शित करने और उससे जुड़े दावों के बाद मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड IT (MeitY) ने यूनिवर्सिटी को एग्जिबिटर लिस्ट से हटा दिया. यह एक्सपो भारत मंडपम में आयोजित हुआ था और प्रदर्शनी स्पेस का आवंटन Software Technology Parks of India (STPI) की देखरेख में 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया गया था.

5 IITs से ज्यादा स्पेस गलगोटिया को कैसे मिला?

फ्लोर प्लान के मुताबिक, गलगोटिया यूनिवर्सिटी को हॉल 6 में 155 स्क्वेयर मीटर का बूथ आवंटित किया गया था. वहीं चार IIT और एक रिसर्च संस्थान IIT बॉम्बे (35 sqm), IIT मद्रास (35 sqm), IIT खड़गपुर (24 sqm), IIT गांधीनगर (18 sqm) और IIT कानपुर के ऐरावत रिसर्च फाउंडेशन (18 sqm) मीटर जगह मिल पाई थी. इन सभी को मिलाकर करीब 130 स्क्वेयर मीटर जगह मिली. यानी अकेले गलगोटिया को इन पांच संस्थानों से लगभग 15% ज्यादा स्पेस मिला था. ऑर्गेनाइजर के अनुसार, स्पेस का अलॉटमेंट डिमांड के आधार पर किया गया था.

14 लाख रुपये देकर भी क्यों हुई कार्रवाई?

अकादमिक संस्थानों के लिए तय दर 9,000 रुपये प्रति स्क्वेयर मीटर थी. 155 स्क्वेयर मीटर स्पेस के लिए गलगोटिया ने करीब 14 लाख रुपये (टैक्स और अन्य चार्ज अलग) का भुगतान किया था, लेकिन चीनी रोबोट डॉग के प्रदर्शन और उससे जुड़े दावों पर सवाल उठने के बाद MeitY ने सख्त कदम उठाया और यूनिवर्सिटी को वेन्यू से बाहर कर दिया.

क्या एग्जिबिटर से चयन प्रक्रिया में चूक हुई?

एक अधिकारी के मुताबिक, आयोजकों ने यह मान लिया था कि एग्जिबिटर स्वयं सुनिश्चित करेंगे कि वे केवल अपने स्वामित्व या अधिकृत टेक्नोलॉजी ही प्रदर्शित करेंगे. किसी भी संस्थान से पहले से यह जांच नहीं की गई कि वे क्या प्रदर्शित करने जा रहे हैं। यही प्रशासनिक चूक अब विवाद का बड़ा कारण बन गई है.

क्या इस घटना से भारत की टेक इमेज पर होगा असर?

इंडिया AI एक्सपो जैसे ग्लोबल मंच का उद्देश्य भारत की स्वदेशी AI उपलब्धियों को प्रदर्शित करना था. IITs ने जहां AI-आधारित फ्लड अलर्ट सिस्टम, स्पीच सिंथेसिस और वेस्ट सेग्रीगेशन जैसे इनोवेशन पेश किए, वहीं चीनी रोबोट डॉग विवाद ने आयोजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए. यह घटना न केवल स्पेस अलॉटमेंट नीति बल्कि टेक्नोलॉजी वेरिफिकेशन सिस्टम पर भी नई बहस छेड़ रही है.

कहां हुई गलगोटिया से बड़ी गलती?

एक चूक की वजह से देश और दुनिया में चर्चित इंडिया एक्स्पो में नोएडा के गलगोटिया यूनिवर्सिटी बड़ी फजीहत हुई है. चीनी रोबोट डॉग दिखाने और दावा करने पर मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड IT (MeitY) ने उसे एग्जिबिस्ट से बाहर कर दिया. इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो में एग्जिबिशन की जगह सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) की देखरेख में 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर लीज पर दी गई थी. इस मामले में सरकारी स्तर पर चूक ये हुई कि संस्थानों ने क्या दिखाने का प्लान बनाया है, इसकी कोई फॉर्मल जांच नहीं की गई.

India NewsIndia
अगला लेख