Assi की रेप सर्वाइवर Kani Kusruti कौन? जिनके पैरेंट्स ने कभी नहीं की शादी, खुद ही चुना अपना सरनेम; जानें एक्ट्रेस की जर्नी

केरल के छोटे गांव से निकलकर इंटरनेशनल सिनेमा तक पहुंचीं कनी कुश्रुति आज हिंदी फिल्म ‘अस्सी’ में अहम भूमिका निभा रही हैं. 15 साल की उम्र में खुद सरनेम चुनने वाली कनी की जिंदगी बेहद प्रगतिशील और प्रेरणादायक रही है.

( Image Source:  Instagram: kantari_kanmani )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 22 Feb 2026 9:19 PM IST

हाल ही में तापसी पन्नू की फिल्म 'अस्सी' (Assi) रिलीज हुई है. जिसमें सीमा पाहवा, मनोज पाहवा, सुप्रिया पाठक, मोहम्मद ज़ीशान अयूब, कुमुद मिश्रा समेत अन्य कई बड़े स्टार्स नजर आ रहे है. फिल्म आज के सामाजिक अपराध को उजागर करती है. फिल्म में तापसी एक वकील के किरदार में जो एक रेप पीड़िता महिला को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ती है. हालांकि यह लड़ाई इतनी आसान नहीं होती उसमें कई तरह की चुनौतियां सामने आती है. रेप पीड़िता का किरदार कनी कुश्रुति ने निभाया है. जिन्हें इससे पहले कान्स विनर फिल्म 'ऑल वी इमेजिन एज लाइट' में देखा जा चुका है. जिसे पायल कापड़िया ने निर्देशित किया और इस महिला प्रधान फिल्म से पायल भारत की पहली कान्स ग्रैंड प्रिक्स विनर महिला डायरेक्टर बनी.

कनी की करियर जर्नी बेहद शानदार रही है. वह हिंदी सिनेमा में काम करने से पहले मलयालम सिनेमा में काम करती थी लेकिन हाल ही में हिंदी और इंटरनेशनल फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ रही हैं. उन्होंने 2009 में फिल्म 'केरला कैफे' से डेब्यू किया, जहां उनकी परफॉर्मेंस को काफी सराहा गया. वह 'बिरियानी' (2020) के लिए केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीत चुकी हैं, जहां उन्होंने बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड हासिल किया. उनकी हिंदी डेब्यू फिल्म 'अस्सी' (2026) है, जिसमें वह एक रेप सर्वाइवर का किरदार निभा रही हैं.

कहां से हैं?

कनी कुश्रुति का जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में एक छोटे से गांव चेरुवक्कल में हुआ था. उनके माता-पिता जयश्री ए.के. और मैत्रेय मैत्रेयन सामाजिक कार्यकर्ता और तर्कवादी (रेशनलिस्ट) हैं. उन्होंने कभी शादी नहीं की और जाति-आधारित सरनेम को पूरी तरह त्याग दिया था ताकि समाज में ऊंच-नीच की भावना से दूर रहें. कनी का बचपन एक बहुत ही प्रगतिशील और खुले विचारों वाले माहौल में बीता. जो केरल के आम रूढ़िवादी समाज से काफी अलग था. इस घर में कनी अपने माता-पिता को उनके पहले नाम से ही पुकारती थीं जयश्री और मैत्रेयन. यह बात केरल जैसे पारंपरिक समाज में बहुत असामान्य और साहसिक कदम मानी जाती है.

खुद ही रखा सरनेम

उनके माता-पिता ने कभी नहीं कहा कि कनी को उनके जैसे बनना है या उनके विचारों को फॉलो करना है. उन्होंने उसे पूरी आजादी दी कि वह खुद सोचे, समझे और अपना रास्ता चुनें. कनी के माता-पिता ने कभी कोई सरनेम नहीं रखा था न खुद के लिए न कनी के लिए. भारत में सरनेम अक्सर जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति बताते हैं, इसलिए उन्होंने इसे खत्म करने का फैसला किया. लेकिन जब कनी 15 साल की हुईं और 10वीं क्लास की परीक्षा फॉर्म भरना था, तो उपनाम भरना जरूरी था. तब कनी ने खुद अपना सरनेम चुन लिया कुश्रुति, मलयालम भाषा में 'कुश्रुति' का मतलब होता है 'शरारती' या 'मस्ती' करने वाली. 

एक्टिंग में कैसे आईं?

कनी की एक्टिंग की शुरुआत थिएटर से हुई. 14 साल की उम्र से वह थिएटर में एक्टिव थीं. उन्होंने तिरुवनंतपुरम के एक्टिंग थिएटर रिसर्च सेंटर में ट्रेनिंग ली, जहां उन्होंने 'भगवदज्जुकम' ड्रामा में वसंतसेना का लीड रोल निभाया (2000-2006). फिर थ्रिसुर स्कूल ऑफ ड्रामा (2005-2007) में थिएटर आर्ट्स का कोर्स किया और पेरिस के ल'एकोले इंटरनेशनल डे थिएटर जैक्स लेकोक में दो साल फिजिकल थिएटर की ट्रेनिंग ली. थिएटर से फिल्मों में आईं, जहां 'केरला कैफे' उनकी पहली बड़ी सफलता थी. वह पॉन्डिचेरी के आदि शक्ति थिएटर स्कूल और लंदन के शेक्सपियर ग्लोब थिएटर में भी परफॉर्म कर चुकी हैं. उनकी एक्टिंग में नवरस साधना (प्राचीन भारतीय कला रूप) का बड़ा प्रभाव है, जिसे उन्होंने थ्रिसुर में सीखा. 

एक और रोचक बात

फिल्म 'ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट' के डायरेक्टर पायल कपाड़िया ने उन्हें 8-9 साल पहले एक शॉर्ट फिल्म देखकर अप्रोच किया था. तब वह 30 साल की थीं और छोटे रोल के लिए सोचा गया था. लेकिन फिल्म बनने में देरी हुई और वक्त के साथ वह बड़ी भूमिका में फिट हो गईं. जो अब उनकी सबसे बड़ी अचीवमेंट बनी. कनी अक्सर बोल्ड और जटिल रोल चुनती हैं, लेकिन वह कॉमेडी रोल्स की तलाश में हैं, जो उनकी वर्सटिलिटी को दिखाता है. 

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