ये किसी सगे नहीं! Janhvi Kapoor के टैलेंट एजेंसी छोड़ने के बाद Karan Johar का बयान, खोल दी स्टार्स की पोल

करण जौहर ने हालिया इंटरव्यू में बॉलीवुड की टैलेंट एजेंसियों की सच्चाई उजागर की. उन्होंने बताया कि क्यों कलाकार बार-बार एजेंसी बदलते हैं और यह एक ‘विशियस सर्कल’ बन चुका है.

( Image Source:  ANI )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 27 Feb 2026 1:43 PM IST

कुछ महीनों पहले खबर आई थी कि बॉलीवुड एक्ट्रेस जहान्वी कपूर ने अपनी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी बदल ली है. पहले उनका काम करण जौहर (Karan Johar) की धर्मा कॉर्नरस्टोन आर्टिस्ट एजेंसी (DCAA) संभालती थी, लेकिन अब वे कलेक्टिव आर्टिस्ट नेटवर्क में शामिल हो गई हैं. यह सिर्फ जहान्वी की बात नहीं है. बॉलीवुड में ऐसा पहले भी कई बार हुआ है. इससे पहले रणवीर सिंह और परिणीति चोपड़ा ने भी कई सालों तक YRF (यश राज फिल्म्स) की टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी के साथ काम किया, लेकिन बाद में उन्होंने भी अपनी एजेंसी छोड़ दी. सेलेब्रिटीज के लिए उनकी एजेंसी बहुत जरुरी होती है. वे अच्छे-से-अच्छे प्रोजेक्ट्स, फिल्में, ब्रांड डील्स और दूसरे अवसर इसी एजेंसी के जरिए पाते हैं. लेकिन इस बेहद कॉम्पिटेटिव इंडस्ट्री में एक्टर्स किसी के प्रति ज्यादा वफादार नहीं रह पाते.

हाल ही में एक इंटरव्यू में करण जौहर ने सार्थक आहूजा से खुलकर इस बारे में बात की. उन्होंने कहा कि टैलेंट मैनेजमेंट करना एक 'बहुत थैंकलेस जॉब' है, क्योंकि कोई भी सच में वफादार नहीं होता. करण ने आगे समझाया, 'हर दो साल में लोग एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी में चले जाते हैं. वे इतने इनसिक्योर होते हैं कि उन्हें लगता है कि उनका समय खत्म हो रहा है. इस बिजनेस में कोई वफादार नहीं है. कलाकार बस इधर-उधर भटकते रहते हैं. आप किसी एक टैलेंट पर अपने जीवन के दो साल लगा देते हैं, मेहनत करते हैं, लेकिन अचानक वे कहीं और चले जाते हैं. फिर वहां उन्हें अच्छा नहीं लगता, तो वे वापस आपके पास आने की कोशिश करते हैं यह एक विशियस सर्कल है.'

सेलेब्स का ईगो ही संभालते रह जाओ 

करण ने यह भी बताया कि सिर्फ एक्टर्स के साथ पार्टनरशिप करके और कमीशन से पैसा कमाना अब बहुत मुश्किल हो गया है, क्योंकि कलाकार 'किसी के नहीं होते' वे बिल्कुल गुमनाम (नोबडी) जैसे होते हैं, किसी एक एजेंसी के प्रति पूरी तरह से नहीं जुड़ते. इसलिए अब कई टैलेंट एजेंसियां नए तरीके अपना रही हैं. वे अपने कलाकारों के साथ इक्विटी पार्टनरशिप कर रही हैं यानी एजेंसी कलाकार की फिल्मों या प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी लेती है और उसी से मुनाफा कमाने की कोशिश करती है. कमीशन से ज्यादा अब इसी से फायदा होने की उम्मीद की जा रही है. करण ने कहा कि उन्होंने टैलेंट मैनेजमेंट इसलिए शुरू किया क्योंकि यह उनके लिए स्वाभाविक था. लेकिन उन्होंने यह भी माना कि इस काम का 90 प्रतिशत हिस्सा लोगों के ईगो और इन्सेक्युरिटीज़ को संभालने में ही निकल जाता है. यह बिल्कुल आसान नहीं है. अगर कोई इसे सिर्फ एक बिजनेस ऑपर्च्युनिटी की तरह देखेगा, तो उसे कुछ खास हासिल नहीं होगा.

'मैं आईसीयू में पहुंच जाऊंगा'

31 साल इस इंडस्ट्री में बिताने के बाद करण अब सफलता और असफलता दोनों के प्रति बहुत अलर्ट हो गए हैं. उन्होंने कहा, 'मेरी खुशी और दुख मेरी सफलता या असफलता पर निर्भर नहीं हो सकते, वरना तो मैं आईसीयू में पहुंच जाऊंगा.' करण की एजेंसी अभी भी कई युवा और टैलेंटेड कलाकारों को हैंडल करती है, जैसे रोहित सराफ, सारा अली खान, शनाया कपूर, राशा थडानी वगैरह. इसी इंटरव्यू में करण ने अदार पूनावाला के साथ अपनी पार्टनरशिप के बारे में भी बात की. बता दें कि पिछले साल पूनावाला ने धर्मा प्रोडक्शंस में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी है. करण ने कहा कि अदार के लिए यह कदम डायवर्सिफिकेशन की दिशा में था. लेकिन एक बिजनेसमैन होने के नाते अदार किसी समय इस सौदे से बाहर भी निकल सकते हैं.

बैलेंस बनाए रखना बेहद जरुरी है  

करण ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह उनके लिए एक डायवर्सिफिकेशन का कदम था, लेकिन बैलेंस बनाए रखना बेहद जरुरी होता है. मुझे यकीन है कि किसी समय वे इस डील से बाहर निकलने के बारे में सोचेंगे, क्योंकि वे बिजनेसमैन हैं और यह एक बिजनेस है. लेकिन साथ ही वे कला के भी शौकीन हैं. वे इस बारे में बहुत स्पष्ट हैं. हो सकता है कि 8-10 साल बाद या जब भी वे इस पर विचार करें, तो फाइनेंशियल रिटर्न बहुत बड़ा न हो, लेकिन इतना जरूर होगा कि उनकी रचनात्मक जरूरतें पूरी हों और उन्हें एक तरह की प्रसिद्धि भी मिले।'

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