इस साल के बजट में ऐसा क्या कि शेयर बाजार का हो गया बंटाधार? 2% तक टूटा मार्केट, निवेशकों में हड़कंप

बजट 2026 पेश होते ही शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली और सेंसेक्स-निफ्टी करीब 2% तक टूट गए। इसकी सबसे बड़ी वजह फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान रहा, जिससे ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ गई। साथ ही बजट में बाजार को तुरंत राहत देने वाले किसी बड़े पॉजिटिव एलान की कमी भी खली। पहले से जारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने दबाव और बढ़ा, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।;

( Image Source:  Sora AI )

केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होते ही भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को कारोबार के दौरान बाजार करीब 2% तक लुढ़क गया. बजट में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) से जुड़े सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी के प्रस्ताव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया. सरकार ने इसे सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश बताया, लेकिन बाजार ने इस फैसले को झटके के रूप में लिया.

बजट के दिन सेंसेक्स और निफ्टी में आई यह गिरावट 2014 के बाद दूसरी सबसे बड़ी बजट-डे गिरावट मानी जा रही है. किसी बड़े पॉजिटिव ट्रिगर की गैरमौजूदगी और पहले से जारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार के दबाव को और बढ़ा दिया.

बजट के बाद सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

बजट ऐलान के बाद 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स इंट्राडे में करीब 2.9% तक टूट गया. कारोबार के अंत में यह 1.9% गिरकर 80,722.94 अंक पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 भी 2% की गिरावट के साथ 24,825.45 अंक पर बंद हुआ. बाजार की घबराहट इंडिया VIX में भी साफ नजर आई. वोलैटिलिटी का संकेतक इंडिया VIX 13% उछलकर 15.10 के स्तर पर बंद हुआ, जो निवेशकों के बढ़ते डर को दर्शाता है.

STT बढ़ाने का एलान, सरकार की दलील

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि सरकार फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव कर रही है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य कैपिटल मार्केट के F&O सेगमेंट में “reasonable course correction” लाना और सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाना है.

इसके अलावा, ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर लगने वाला STT भी बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव रखा गया है. बजट के बाद मीडिया से बात करते हुए राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि इस कदम का मकसद “speculative tendencies को discourage करना” है.

STT से सरकार को कितनी कमाई का लक्ष्य?

बजट के मुताबिक, सरकार 2026-27 में STT से 73,700 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रख रही है. मौजूदा वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 63,670 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) है, जबकि 2025-26 के लिए STT कलेक्शन का अनुमान 78,000 करोड़ रुपये रखा गया है.

एक्सपर्ट्स की राय: बाजार क्यों टूटा?

ग्लोब कैपिटल मार्केट में इक्विटी रिसर्च के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट विपिन कुमार ने कहा कि STT में बढ़ोतरी ने बाजार को पूरी तरह चौंका दिया, जिससे लगातार हो रही विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली का असर और भी ज्यादा बढ़ गया. उन्होंने आगे कहा कि यह उतार-चढ़ाव अस्थायी हो सकता है, लेकिन ऐसे फैसले निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाते हैं और व्यापक बिकवाली को जन्म देते हैं.

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट के एमडी और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पार्ट-टाइम सदस्य निलेश शाह के मुताबिक, हालांकि बजट में दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करने वाले कई अहम ऐलान किए गए हैं, लेकिन इनका सही क्रियान्वयन और प्रभावी अमल ही सबसे बड़ा निर्णायक रहेगा. उनका कहना है कि बाजार पहले से ही ऊंचे वैल्यूएशन और सीमित अर्निंग ग्रोथ के कारण दबाव में था.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव

भारतीय बाजार पर यह असर ऐसे समय में आया है जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार पैसे निकाल रहे हैं. जनवरी में ही FIIs ने करीब 4 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए. पिछले सात महीनों में से छह बार वे नेट सेलर रहे हैं. साल 2025 में कुल मिलाकर FII आउटफ्लो करीब 19 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.

डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर पहले से सख्ती

STT बढ़ाने का यह कदम रिटेल निवेशकों की डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगाम लगाने की सरकार की कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है. सेबी की एक स्टडी के मुताबिक, 2024-25 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में रिटेल निवेशकों का नुकसान 41% बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जो ट्रेडर बाजार में टिके रहे, उनके औसत नुकसान में और इजाफा हुआ. वहीं, 2023-24 में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स का ग्रॉस प्रॉफिट 33,037 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

ब्रोकिंग और एक्सचेंज शेयरों पर सबसे ज्यादा मार

बजट के बाद ब्रोकिंग और डिपॉजिटरी कंपनियों के शेयरों में 5% से 9% तक की गिरावट दर्ज की गई. Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures, Angel One और CDSL जैसे शेयरों पर दबाव दिखा. बीएसई के शेयर भी करीब 8% टूट गए, क्योंकि डेरिवेटिव ट्रेडिंग घटने से इनके रेवेन्यू पर असर पड़ने की आशंका है.

कुछ सेक्टर्स में राहत

हालांकि, हर सेक्टर में निराशा नहीं दिखी. IT शेयरों में सेफ हार्बर से जुड़े बजट प्रस्तावों के बाद तेजी देखने को मिली. हेल्थकेयर सेक्टर को भी फायदा हुआ, क्योंकि सरकार ने मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच रीजनल मेडिकल हब स्थापित करने की घोषणा की. इसके अलावा, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट बनाने वाली Cosco India के शेयर 8% चढ़ गए, जब बजट में स्पोर्ट्स गुड्स के लिए एक समर्पित पहल का ऐलान किया गया.

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