क्या है STT जिसका Budget 2026 में बढ़ने का हुआ एलान, तो शेयर बाजार रह गया हैरान
Budget 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने F&O पर STT बढ़ाने का ऐलान किया. इसके बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और सेंसेक्स 1547 अंक टूट गया. जानिए STT क्या है और बाजार क्यों गिरा.
केंद्रीय बजट 2026 के ऐलान के साथ ही शेयर बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली. बजट के तुरंत बाद सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई. बाजार की इस बड़ी टूट के पीछे कोई वैश्विक कारण नहीं, बल्कि बजट से जुड़ा एक अहम टैक्स फैसला जिम्मेदार माना जा रहा है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 9वें बजट में डेरिवेटिव सेगमेंट को लेकर बड़ा कदम उठाया. फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर लगने वाले सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने के ऐलान ने ट्रेडर्स के सेंटीमेंट को झटका दिया और बाजार देखते ही देखते धड़ाम हो गया.
STT बढ़ा और बाजार में मच गया हड़कंप
बजट में सरकार ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर लगने वाले STT में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा. जैसे ही यह घोषणा हुई, बाजार ने इसे ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ने के संकेत के तौर पर लिया. खासकर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स और F&O सेगमेंट में एक्टिव निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी.
STT क्या है, जिस पर इतना बवाल?
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) वह टैक्स है, जो शेयर बाजार में शेयर, फ्यूचर या ऑप्शन की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है. इसे साल 2004 में लागू किया गया था, ताकि कैपिटल मार्केट से सरकार को सीधा टैक्स रेवेन्यू मिल सके.
सरकार ने STT क्यों बढ़ाया?
रेवेन्यू सेक्रेटरी और वित्त मंत्री दोनों ने साफ किया कि STT बढ़ाने का मकसद सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है. सरकार का मानना है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस में जरूरत से ज्यादा रिटेल भागीदारी छोटे निवेशकों के लिए जोखिम भरी साबित हो रही है.
F&O के खिलाफ नहीं, लेकिन चेतावनी जरूर
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार डेरिवेटिव्स के खिलाफ नहीं है. लेकिन छोटे निवेशकों को बार-बार हो रहे नुकसान को देखते हुए जोखिम भरे ट्रेड से उन्हें दूर रखना जरूरी है. STT बढ़ाना इसी दिशा में एक नीतिगत कदम है.
फ्यूचर्स ट्रेडिंग अब कितनी महंगी होगी?
अगर निफ्टी फ्यूचर के एक लॉट की वैल्यू 1 लाख रुपये है, तो पहले 0.02% के हिसाब से 20 रुपये STT लगता था. बजट के बाद यह दर बढ़कर 0.05% हो गई है, यानी अब उसी लॉट पर 50 रुपये टैक्स देना होगा.
ऑप्शन ट्रेडर्स की जेब पर क्या असर?
मान लीजिए किसी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का प्रीमियम 1 लाख रुपये है. पहले 0.10% के हिसाब से 100 रुपये STT लगता था. अब 0.15% के नए रेट से 150 रुपये टैक्स देना होगा, यानी हर ट्रेड पर सीधा खर्च बढ़ेगा.
बढ़ी ट्रेडिंग कॉस्ट, बदला निवेशकों का मूड
STT बढ़ने का मतलब है कि बार-बार ट्रेड करने वालों के लिए मुनाफा कम और जोखिम ज्यादा. यही वजह है कि बजट के बाद F&O से जुड़े स्टॉक्स में सबसे ज्यादा दबाव दिखा और बाजार का मूड अचानक नेगेटिव हो गया.
STT ऐलान का असर: सेंसेक्स 1547 अंक टूटा
बजट के दिन बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स करीब 1547 अंक टूटकर 80,722 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 495 अंक फिसलकर 24,825 के आसपास बंद हुआ. साफ है कि STT बढ़ाने के फैसले ने बाजार की दिशा एक ही झटके में बदल दी.





