Iran-Israel War से भारत में मचा त्राहिमाम! इन 5 बड़े सेक्टर पर मंडराया खतरा, GDP का क्या होगा?
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अब मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत के प्रमुख उद्योगों पर भी साफ देखने को मिल रहा है. इस जंग ने सप्लाई चेन को काफी ज्यादा प्रभावित किया है.
iran israel war
(Image Source: AI: Sora )Iran-Israel War: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. ईरान झुकने को तैयार नहीं है, जबकि इजरायल-अमेरिका लगातार ईरान पर हमला कर रहे हैं. अब इस जंग का असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है. जहां ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रोक लगा रकी है, जिससे पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई पर असर देखने को मिल रहा है. दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अब मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत के प्रमुख उद्योगों पर भी साफ देखने को मिल रहा है. इस जंग ने सप्लाई चेन को काफी ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे भारत में अब केमिकल, स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल और ब्रेवरी जैसे कई सेक्टर प्रभावित होते दिख रहे हैं. अगर ये जंग लंबी चलती है तो भारत की GDP पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.
रिपोर्ट्स की माने तो ये जंग अभी और लंभी चलने वाली है. जिससे भारत के निर्यात-आधारित उद्योगों के साथ-साथ घरेलू उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है. वहीं अब कच्चे माल की आपूर्ति में देरी और कीमतों में उछाल से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है. चलिए हम आपको बताते है कि भारत में किन उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर इस जंग का देखने को मिल रहा है?
1. केमिकल उद्योग पर कितना असर?
पश्चिम एशिया क्षेत्र भारत के केमिकल उद्योग के लिए कच्चे माल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. मौजूदा संकट के कारण सप्लाई में रुकावट आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है. कई कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गई हैं, लेकिन इससे लागत और बढ़ सकती है.
2. स्टील और एल्युमिनियम सेक्टर में कितना असर?
स्टील और एल्युमिनियम उद्योग भी इस संकट से अछूते नहीं हैं. कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है. निर्यात बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे कंपनियां सतर्क रुख अपना रही हैं.
3. टेक्सटाइल पर कितना असर?
टेक्सटाइल सेक्टर, जो बड़े पैमाने पर निर्यात पर निर्भर है, इस भू-राजनीतिक संकट से खासा प्रभावित हो रहा है. पश्चिम एशिया के कई देशों में मांग घटने और भुगतान चक्र में देरी की समस्या सामने आ रही है. इससे छोटे और मध्यम उद्योगों पर विशेष दबाव पड़ रहा है.
4. ब्रेवरी उद्योग पर कितना असर?
ब्रेवरी उद्योग को भी कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और सप्लाई चेन में बाधा के कारण नुकसान झेलना पड़ रहा है. आयातित सामग्री महंगी होने से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है, जिसका असर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है.
5. लॉजिस्टिक्स और शिपिंग लागत में उछाल
इस संकट के चलते शिपिंग रूट्स पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे माल ढुलाई महंगी हो गई है. बीमा प्रीमियम में वृद्धि और रूट डायवर्जन के कारण कंपनियों को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है. इससे निर्यात-आयात दोनों प्रभावित हो रहे हैं.