Gold Price: सोना हुआ सस्ता तो क्या खरीद रहे लोग, Jewellery नहीं पहली पसंद, Report से जानें निवेश किसमें ज्यादा

सोने की कीमतों में नरमी के बावजूद लोगों की खरीदारी का ट्रेंड बदलता नजर आ रहा है. अब लोग ज्वेलरी नहीं खरीद रहे हैं बल्कि दूसरी चीजों पर इंवेस्ट कर रहे हैं, जो उन्हें लॉन्ग टर्म फायदा देगी.

( Image Source:  ANI )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 25 March 2026 5:52 PM IST

सोना सस्ता हुआ तो क्या लोग ज्यादा ज्वेलरी खरीद रहे हैं? पहली नजर में जवाब हां लग सकता है, लेकिन हालिया रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बता रही है. कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच लोगों का रुझान बदलता दिख रहा है, और जो ट्रेंड सामने आया है, वह चौंकाने वाला है.

ICRA और Assocham की जॉइंट रिपोर्ट के मुताबिक, लोग अब सोने को पहनने से ज्यादा निवेश के तौर पर देख रहे हैं. ज्वेलरी की बजाय गोल्ड बार, सिक्के और ETF जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और लोग किस दिशा में पैसा लगा रहे हैं.

गहनों की मांग में आई बड़ी गिरावट

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने के गहनों की मांग में पिछले कुछ समय से लगातार कमी देखी जा रही है. फाइनेंशियल ईयर 2025 में यह मांग लगभग 15% घटी, जबकि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में इसमें और 17% की गिरावट दर्ज की गई. इसकी सबसे बड़ी वजह सोने की बढ़ती कीमतें हैं. महंगा होने के कारण आम लोग गहने खरीदने से बच रहे हैं या अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं.

इंवेस्टमेंट के रूप में सोना बना पहली पसंद

जहां गहनों की मांग घटी है, वहीं सोने में निवेश का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. गोल्ड बार, सिक्के और गोल्ड ETF जैसे ऑप्शन की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. वित्त वर्ष 2025 में निवेश के लिए सोने की मांग में करीब 74% की बढ़ोतरी हुई, जबकि FY2026 की पहली छमाही में यह 60% तक बढ़ गई. इससे साफ है कि लोग अब सोने को पहनने के बजाय निवेश के रूप में ज्यादा देख रहे हैं.

क्यों बढ़ रहा है सोने में निवेश?

आर्थिक अनिश्चितता और दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है. ऐसे में सोना एक “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरकर सामने आया है. इसके अलावा, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी लगातार सोना खरीद रहे हैं ताकि अपने भंडार को सुरक्षित और मजबूत बना सकें. इससे सोने की कीमतों को और सपोर्ट मिला है.

भारत में भी बदला ट्रेंड

भारत में भी सोने के बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. हालांकि गहनों की मांग में गिरावट आई है, लेकिन निवेश के रूप में सोने की खरीद बढ़ी है. वित्त वर्ष 2025 में भारत गहनों की खपत के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर रहा और उसने चीन को पीछे छोड़ दिया. इसके बावजूद, उसी साल गहनों की मांग में करीब 7% की कमी आई और FY2026 की पहली छमाही में यह गिरावट बढ़कर लगभग 26% हो गई.

कस्टम ड्यूटी में राहत, लेकिन असर सीमित

सरकार ने जुलाई 2024 में सोने पर आयात शुल्क को 15% से घटाकर 6% कर दिया था, जिससे कुछ समय के लिए कीमतों में राहत मिली और लोगों का रुझान बढ़ा. लेकिन वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण घरेलू कीमतें भी फिर से ऊंची हो गईं, जिससे गहनों की मांग पर असर पड़ा.

तेजी से बढ़ती सोने की कीमतें

पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. वैश्विक स्तर पर FY2024 में 10%, FY2025 में 30% और FY2026 के पहले नौ महीनों में करीब 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारत में कीमतें और तेजी से बढ़ीं, जहां इसी अवधि में 14%, 33% और 52% तक की बढ़ोतरी हुई. इसकी एक बड़ी वजह रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना भी है.

आगे क्या रह सकता है रुख?

रिपोर्ट के अनुसार, अगर सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो गहनों की मांग पर दबाव जारी रह सकता है. हालांकि, निवेश की बढ़ती मांग, संगठित बाजार का विस्तार, गोल्ड लोन का बढ़ता चलन और सरकार की नीतियां आने वाले समय में भारत के सोने के बाजार को मजबूती दे सकती हैं. कुल मिलाकर, सोने का बाजार तेजी से बदल रहा है. जहां पहले लोग इसे गहनों के रूप में ज्यादा खरीदते थे, वहीं अब निवेश के तौर पर इसकी अहमियत बढ़ गई है. महंगे दामों ने भले ही गहनों की चमक थोड़ी कम कर दी हो, लेकिन निवेश के रूप में सोना अभी भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.

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