क्यों जानी दुश्मन बन गए Afghanistan और Pakistan, बीच में कहां से आ गया Taliban? क्या अब शुरू हो गई पड़ोस में जंग
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूद एक अस्पताल पर हमला कर दिया. जिससे दोनों देशों के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं. इस हमले में 400 लोगों की मौत हुई है.
Reason of Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बने अस्पताल पर हमला किया है. इस हमले में 400 लोगों की मौत हो गई है. इसे अभी तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है. दोनों देशों के बीच कई महीनों से जंग चल रही है. लेकिन, इस हमले ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों देश आपस में क्यों लड़ रहे हैं. खुद को मुसलमानों का लीडर बताने वाला मुल्क पाकिस्तान आखिर मासूमों की जान क्यों ले रहा है? आइये जानते हैं पूरी डिटेल
पाकिस्तान और अफगानिस्ता लड़ाई की वजह क्या है?
इस संघर्ष के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान का यह आरोप है कि अफगान तालिबान पाकिस्तान के आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को सुरक्षित ठिकाने दे रहा है. टीटीपी को पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है. पाकिस्तान का कहना है कि यह संगठन अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहा है, जबकि अफगान तालिबान बार-बार इस आरोप से इनकार करता रहा है.
अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एक हवाई हमला भी किया था. पाकिस्तान की सेना ने कहा था कि यह हमला पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच सबसे घातक टकराव हुआ, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से सबसे बड़ा माना गया. उसी महीने कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति समझौता कराया गया था. लेकिन सऊदी अरब की मध्यस्थता में चल रही बाद की बातचीत 2025 के अंत तक टूट गई.
इसके बाद से सीमा पर हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं. 16 फरवरी को एक आत्मघाती हमलावर ने सीमा सुरक्षा चौकी पर हमला किया, जिसमें 11 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी और एक बच्चे की मौत हो गई. यह जानकारी पाकिस्तान की सेना ने दी. 22 फरवरी को पाकिस्तान ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए. पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया. वहीं अफगान अधिकारियों का कहना था कि इन हमलों में कम से कम 18 लोग, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे, मारे गए. इसके बाद अफगानिस्तान ने बदले की चेतावनी दी और दोनों देशों के बीच ताजा संघर्ष शुरू हो गया.
दोनों तालिबान के बीच संबंध क्या हैं
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अपने गठन के समय से ही खुद को अफगान तालिबान का विस्तार बताता रहा है. यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा उग्रवादी संगठन है और अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है.
टीटीपी का गठन 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद की स्थिति से जुड़ा हुआ है. उस समय कई पाकिस्तानी उग्रवादी, जो अफगान लड़ाकों के साथ लड़ चुके थे, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ हो गए क्योंकि पाकिस्तान ने अमेरिका के आतंकवाद विरोधी अभियान का समर्थन किया था. ये उग्रवादी बाद में टीटीपी के शुरुआती सदस्य बने और उन्होंने अफगान तालिबान, अल-कायदा और अन्य उग्रवादी समूहों को शरण दी.
अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान सरकार ने बाद में इन ठिकानों पर कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तानी उग्रवादियों, अफगान तालिबान और अल-कायदा के बीच संबंध और मजबूत हो गए. टीटीपी की आधिकारिक स्थापना 2007 में हुई.
टीटीपी एक ढीले ढांचे वाला संगठन है. इसके कई गुट हैं जिनका मुख्य लक्ष्य पाकिस्तान की सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई करना, पश्चिमी प्रभाव का विरोध करना और अपने नियंत्रण वाले इलाकों में शरीयत कानून लागू करना है. समय के साथ इसकी रणनीति में बदलाव भी हुआ है. 2013 में मुल्ला फजलुल्लाह के नेतृत्व में यह संगठन अल-कायदा के और करीब आ गया और सीमा पार हमले बढ़ गए. 2020 में फजलुल्लाह की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के दो साल बाद टीटीपी ने कहा था कि उसका मुख्य लक्ष्य केवल पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाना है.
तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध कैसे रहे?
हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध खराब हुए हैं, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में दोनों देश सहयोगी थे. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने अफगान तालिबान के गठन में मदद की थी. 2001 से पहले पाकिस्तान ने तालिबान सरकार को सैन्य सलाहकार, विशेषज्ञ और सैनिक उपकरण चलाने के लिए कर्मियों की सहायता भी दी थी.
2001 में अमेरिका और नाटो के साथ आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के बाद पाकिस्तान का तालिबान के प्रति समर्थन गुप्त हो गया. अमेरिकी विदेश विभाग और कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्टों के अनुसार, साथ ही 2012 में लीक हुई एक नाटो रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने अफगान तालिबान की सीधे मदद की और उन्हें शरण भी दी.
2021 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुलाए और तालिबान सत्ता में आया, तब पाकिस्तान ने शुरू में नई सरकार का स्वागत किया. उस समय पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने तालिबान की वापसी को अफगानों द्वारा “गुलामी की जंजीरों को तोड़ने” जैसा बताया था.




