भारत पर अमेरिका का नया 'टैरिफ अटैक'! आखिर किस बात से नाराज है US? ट्रंप प्रशासन के नए प्रस्ताव से बढ़ी टेंशन- Explainer
अमेरिका भारत समेत कई देशों पर 500 फीसद तक टैरिफ के बारे में विचार कर रहा है. आखिर ऐसा क्यों है और इसकी क्या वजह है. जानें पूरी डिटेल
America Tariff on India: अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीजफायर खत्म होने की घोषणा के बीच भारत के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है. अमेरिका के चार सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसे कानून को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिसका मकसद रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई करना है.
इस प्रस्तावित कानून के समर्थकों का कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उन देशों को निशाना बनाया जाएगा, जो रूसी ऊर्जा खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध खर्च को समर्थन दे रहे हैं. इस कानून में भारत का भी नाम सामने आया है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है.
ट्रंप प्रशासन और सांसदों के बीच क्या बनी सहमति?
अमेरिका के दो रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहमऔर रोजर विकर, और दो डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथलऔर जीन शाहीन ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन के साथ रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित कानून को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है. चारों सांसदों ने कहा कि उन्हें इस दिशा में हुए इस डेवलमेंट से खुशी है और जल्द ही इस कानून का संशोधित मसौदा पेश किया जाएगा.
रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी
सांसदों का कहना है कि रूस लगातार आम नागरिकों पर हमले कर रहा है. ऐसे में अमेरिका की संसद और सरकार को मिलकर ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर भारी आर्थिक दबाव डाला जा सके. उनका मानना है कि रूस की ऊर्जा खरीदने वाले देश इंडायरेक्ट तैर से यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं.
प्रस्तावित कानून में क्या है?
चारों सांसद Sanctioning Russia Act of 2025 के प्रमुख समर्थकों में शामिल हैं. इस प्रस्तावित कानून के तहत उन देशों से आने वाले सामान और सेवाओं पर अमेरिकी टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जो रूस से इन उत्पाद खरीदते हैं-
1. कच्चा तेल (Crude Oil)
2. प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
3. यूरेनियम (Uranium)
4. पेट्रोलियम उत्पाद (Petroleum Products)
कितना टैरिफ बढ़ाने की हो रही है बात?
कानून के शुरुआती मसौदे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफलगाने का प्रस्ताव था. डेमोक्रेट सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पहले इस प्रस्तावित टैरिफ को "हड्डियां तोड़ देने वाला" (Bone-crushing) बताया था. हालांकि, कानून में यह भी प्रावधान रखा गया है कि अगर किसी देश को छूट देना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में माना जाता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति उसे 180 दिनों की छूट (Waiver) दे सकते हैं.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिल में बाद में संशोधन किया गया और टैरिफ से जुड़े प्रावधानों को पहले के मुकाबले कुछ नरम किया गया है. हालांकि, संशोधित कानून का अंतिम स्वरूप अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.
भारत पर क्यों है नजर?
इस प्रस्तावित कानून के समर्थकों ने भारत का नाम विशेष रूप से लिया है. जून 2025 में रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था,"चीन और भारत से कहना चाहता हूं कि अगर आप पुतिन की युद्ध मशीन को समर्थन देना जारी रखते हैं, तो इसके लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे."
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक सामान्य लाइसेंस (General Licence) जारी किया था, जिसके तहत भारत समेत कई देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना किए बिना रूस से ऊर्जा खरीदने की अनुमति मिली थी. हालांकि, यह लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो गया.
क्या इस प्रस्ताव को मिल रहा मज़बूत समर्थन?
इस प्रस्तावित कानून को अमेरिकी सीनेट में व्यापक समर्थन मिला है. अब तक 84 सीनेटरइस बिल के सह-प्रायोजक (Co-sponsors) बन चुके हैं. इस बिल को और मजबूती तब मिली, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह रूस पर दबाव बनाने और यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए इस कानून पर विचार कर रहे हैं.
हालांकि, सांसद लिंडसे ग्राहम पहले यह दावा कर चुके थे कि ट्रंप इस कानून का समर्थन करेंगे, लेकिन पहली बार पेश किए जाने के एक साल से अधिक समय बाद भी Sanctioning Russia Act अभी तक पारित नहीं हो सका है.




