Doha Talks के बीच US की बड़ी स्ट्राइक! ईरानी ठिकानों पर बरसाए बम, क्या टूट जाएगी शांति वार्ता और फिर सुलग उठेगा मिडिल ईस्ट?
दोहा में जारी शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमला किया, जबकि इजरायल ने हिजबुल्लाह पर हमले तेज कर दिए. जानिए कैसे इन सैन्य कार्रवाइयों से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है.
दोहा में पश्चिम एशिया संकट को लेकर जारी अहम बातचीत के बीच अमेरिका और इजरायल की ओर से हुई दो नई सैन्य कार्रवाइयों ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है. माना जा रहा है कि इन घटनाओं का असर उस नाजुक सीजफाय प्रक्रिया पर पड़ सकता है, जिसे लेकर पर्दे के पीछे लगातार बातचीत चल रही है.
पहला मिलिट्री ऑपरेशन दक्षिणी ईरान के पास हुआ. अमेरिकी सेना ने होर्मुज के नजदीक ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किए. अमेरिका ने इसे “आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई” बताया है. वहीं दूसरा स्ट्राइक मिसाइल साइट्स पर हुआ है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, कार्रवाई उन मिसाइल लॉन्च साइट्स और ईरानी नौकाओं के खिलाफ की गई, जो कथित तौर पर समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थीं. होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से हर दिन बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है.
फॉक्स न्यूज से बातचीत में हॉकिन्स ने कहा, “यह ऑपरेशन अमेरिकी सैनिकों को ईरानी बलों से पैदा हुए तत्काल खतरे से बचाने के लिए अंजाम दिया गया.”
अमेरिका ने क्यों बरसाए बम?
फॉक्स न्यूज ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़ी दो नौकाओं को होर्मुज में समुद्री सुरंगें बिछाते हुए देखा गया था. इसके बाद अमेरिकी सेना ने दोनों नौकाओं को नष्ट कर दिया. साथ ही बंदर अब्बास में मौजूद एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट पर भी हमला किया गया, जिस पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने का आरोप था.
क्या पीस टॉक पर पड़ेगा कोई कोई असर?
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” के तौर पर देखा जा रहा है. उनका कहना है कि इससे यह नहीं माना जाना चाहिए कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत पूरी तरह टूट गई है. कुछ ईरानी मीडिया रिपोर्टों में इस कार्रवाई में लोगों के हताहत होने की भी जानकारी दी गई है.
इजराइल ने क्या किया?
दूसरी बड़ी सैन्य गतिविधि लेबनान में देखने को मिली, जहां इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने सेना को अभियान और अधिक तेज करने का निर्देश दिया है, ताकि ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह को “कुचल” दिया जाए.
टेलीग्राम पर जारी वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा, “मैंने हमारे सैन्य ऑपरेशन को और तेज करने का आदेश दिया है.” यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान व्यापक क्षेत्रीय समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. इस प्रस्तावित समझौते में लेबनान मोर्चा भी शामिल माना जा रहा है, जहां 2 मार्च से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार संघर्ष जारी है.
हालांकि 17 अप्रैल से युद्धविराम लागू होने की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच लगभग रोजाना गोलीबारी और हमले जारी हैं. इससे क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय लगातार बना हुआ है.
अब तक इन नई सैन्य कार्रवाइयों पर ईरान या कतर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. कतर इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
शांति वार्ता पर क्या है अपडेट?
दोहा में जारी बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दोल्नासेर हेम्मती समेत कई वरिष्ठ अधिकारी इस समय कतर की राजधानी में मौजूद हैं. इस दौर की वार्ता को संघर्ष शुरू होने के बाद की सबसे महत्वपूर्ण बातचीतों में से एक माना जा रहा है.
अल जजीरा ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच ईरान की विदेशों में जमी संपत्तियों को लेकर शुरुआती सहमति बन चुकी है. यह मुद्दा तेहरान की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है.




