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लेबनान पर हमला, होर्मुज बंद और ट्रंप आग बबूला...टूट रही है US-Israel की मजबूत दोस्ती! जानें पूरी Inside Story

ईरान के साथ हुए अंतरिम समझौते के बाद अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों नेताओं के रिश्तों में जबरदस्त खटास आई है.

लेबनान पर हमला, होर्मुज बंद और ट्रंप आग बबूला...टूट रही है US-Israel की मजबूत दोस्ती! जानें पूरी Inside Story
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अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में इस सप्ताह तनाव और गहरा होता दिखाई दिया. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रमुख अखबारों में प्रकाशित लेखों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ईरान के साथ अंतरिम समझौता कर इजरायल को उसके सबसे बड़े दुश्मन के सामने अकेला छोड़ दिया है. इसक उदाहरण लेबनान पर हुआ हमला भी कहा जा सकता है. शर्त पर साइन होने के बावजूद इजराइल ने लेबनान पर अटैक किया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते को लेकर इजरायल में खुद को ठगा हुआ महसूस करने की भावना बढ़ी है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए युद्ध को समाप्त करने के लिए किए गए इस समझौते की शर्तों को लेकर जनता और राजनीतिक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है.

ईरान से समझौता, इजराइल में कैसा है माहौल?

इजरायल के प्रमुख अखबार Israel Hayom में प्रकाशित एक तीखे लेख का शीर्षक था, "आप अब तक के सबसे महान राष्ट्रपति बन सकते थे, लेकिन आप असफल रहे." इस लेख में ट्रंप पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने "एक क्रूर और आतंकवादी शासन के साथ आत्मसमर्पण समझौते" पर हस्ताक्षर किए हैं.

यह अखबार ट्रंप की बड़ी समर्थक और दानदाता मिरियम एडेलसन के स्वामित्व में है. लेख को ट्रंप के नाम एक पत्र के रूप में लिखा गया था और इसमें कहा गया कि इस समझौते ने एक नए युद्ध की उलटी गिनती शुरू कर दी है तथा इससे इजरायल का अपमान हुआ है.

बराक ओबामा के बारे में क्या कहा गया?

लेख में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी जिक्र किया गया. इसमें कहा गया कि ओबामा के चेहरे पर मुस्कान उस व्यक्ति का मजाक उड़ाती दिख रही थी, जिसने कभी उनके 2015 के परमाणु समझौते को सबसे खराब समझौता बताया था. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2018 में उस समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था.

अमेरिका और इजराइल का कैसा रहा इतिहास?

अमेरिका और इजरायल के संबंधों को आधुनिक इतिहास के सबसे करीबी रणनीतिक गठबंधनों में गिना जाता है. 1948 में इजरायल की स्थापना से लेकर अब तक अमेरिका ने कई युद्धों और संकटों में उसका साथ दिया है. फिलिस्तीनी क्षेत्रों, विशेष रूप से गाजा पट्टी को लेकर इजरायल की नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद अमेरिका लगातार उसके समर्थन में खड़ा रहा है.

इस बार का विवाद पिछले विवादों से कैसे अलग?

हालांकि दोनों देशों के बीच पहले भी मतभेद हुए हैं, लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर पैदा हुआ विवाद हाल के वर्षों के सबसे गंभीर मतभेदों में से एक है. इसके बावजूद दोनों देशों के बीच रणनीतिक गठबंधन अभी भी बरकरार माना जा रहा है. हाल ही में रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ट्रंप लेबनान में इजराइल के ऑपरेशन्स से नाखुश थे. इस दौरान उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री को सलाह भी दी थी कि उन्हें पूरी दुनिया के क्रिमनल के तौर पर देख रही है.

ईरान और हिज़बुल्लाह पर क्या कहता आया है इजराइल?

इजरायल में ईरान को लंबे समय से सबसे बड़े क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई इजरायली नेताओं का दावा रहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के करीब है और उसके सहयोगी संगठन, जिनमें हिज्बुल्लाह भी शामिल है, इजरायल के लिए खतरा बने हुए हैं.

शांति समझौते में क्या थी शर्त?

समझौते की शर्तों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में इजरायल की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी. समझौते में लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को तुरंत समाप्त करने और दोनों पक्षों द्वारा लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है. यह शर्त इजरायल में कई लोगों को स्वीकार्य नहीं लगी. इजरायल वर्तमान में लेबनान के लगभग पांचवें हिस्से पर नियंत्रण रखता है.

गुरुवार को इजरायल के चैनल 12 टीवी द्वारा जारी एक सर्वेक्षण में अमेरिका को लेकर जनता की सोच में बदलाव दिखाई दिया. सर्वेक्षण के अनुसार केवल 11 प्रतिशत इजरायलियों का मानना है कि ईरान के खिलाफ युद्ध में उनका देश जीता है. वहीं 71 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अब उन्हें ट्रंप प्रशासन पर भरोसा नहीं है कि वह ईरान के साथ वार्ता में इजरायल के हितों की रक्षा करेगा.

अमेरिकी नीति को लेकर असंतोष केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा टिप्पणी नहीं की है, लेकिन लेबनान पर जारी इजरायली हमलों और हिज्बुल्लाह पर समझौते के उल्लंघन के आरोपों को कई विश्लेषक इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि नेतन्याहू खुद को इस समझौते से पूरी तरह बंधा हुआ नहीं मानते.

ईरान के साथ समझौते पर क्या बोले इजराइली नेता?

उनकी सरकार के अन्य नेताओं ने समझौते की खुलकर आलोचना की है. वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर ने सार्वजनिक रूप से इस अंतरिम समझौते का विरोध किया है. बेन-गविर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका का सम्मान करते हुए भी इजरायल को दुनिया को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि उसके नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता. बाद में प्लेटफॉर्म ने उनकी पोस्ट को अपनी नीतियों के उल्लंघन के कारण सीमित कर दिया.

अमेरिका ने नेतन्याहू को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी नेताओं ने इजरायल में हो रही इन आलोचनाओं पर नाराजगी जताई है. G7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि नेतन्याहू लेबनान पर हमलों को लेकर "कुछ ज्यादा उत्साहित" हो गए थे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इजरायली आलोचकों को जवाब दिया. नेतन्याहू की नाराजगी से जुड़े सवाल पर वेंस ने कहा कि वर्तमान समय में ट्रंप दुनिया के इकलौते ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं.

अमेरिका ने इजराइल को क्या दी सलाह?

उन्होंने कहा कि अगर वे इजरायली सरकार में होते तो अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करते, क्योंकि दुनिया में इजरायल के पास अब बहुत कम मजबूत सहयोगी बचे हैं. राजनीतिक विश्लेषक ओरी गोल्डबर्ग ने इस स्थिति को साधारण विवाद नहीं बल्कि "दरार" बताया. उनके अनुसार अमेरिका के नेताओं द्वारा इजरायल की आलोचना अचानक नहीं शुरू हुई है, बल्कि यह उन तथ्यों का परिणाम है जिन्हें अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है.

लेबनान पर हमला, ईरान ने क्या उठाया कदम?

तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है. शनिवार को लेबनान पर इजरायली हमलों के जारी रहने के बाद ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज को बंद करने का फैसला किया. इससे पहले भी कई विश्लेषकों ने माना था कि होर्मुज के बंद होने के खतरे ने ट्रंप प्रशासन को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया था.

दोनों नेताओं के बीच बवाल साफ तौर पर दिख रहा है. इजराइल साफ कर चुका है कि वह अमेरिका या फिर किसी और के दबाव में काम नहीं करने वाला है. वहीं ट्रंप चाहते हैं कि ईरान के साथ समझौका हो और किसी तरह मिडिल ईस्ट में चल रही ये पूरी टेंशन जल्द से जल्द खत्म हो.

अमेरिकाडोनाल्ड ट्रंप
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