आतंक की फैक्ट्री से ‘फ्रेंकस्टीन स्टेट’ तक: UN में PAK को India ने क्यों सुनाई 208 साल पुरानी कहानी?
UN में भारत द्वारा पाकिस्तान को 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' कहे जाने के पीछे क्या संदेश था? जानिए इस रूपक का अर्थ, मैरी शेली की कहानी और आतंकवाद से जुड़े विवादों का इतिहास.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने जब पाकिस्तान को "फ्रेंकस्टीन स्टेट" कहा, तो यह सिर्फ उस पर कूटनीतिक तंज नहीं था, बल्कि 208 साल पुरानी एक साहित्यिक कहानी के जरिए आतंकवाद पर बड़ा राजनीतिक संदेश भी था. अंग्रेजी लेखिका मैरी शेली की 1818 में लिखी उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' का जिक्र किया है. इसमें एक वैज्ञानिक अपने ही बनाए राक्षस पर नियंत्रण खो देता है और वो उसी के लिए भस्मासुर साबित होता है.
भारत का आरोप है कि पाकिस्तान ने भी दशकों तक ऐसे आतंकी नेटवर्कों को पनपने दिया, जो न केवल पड़ोसी देशों बल्कि अब वह खुद उसके लिए भी खतरा बन गए. 26/11 मुंबई हमले से लेकर पुलवामा और हालिया पहलगाम हमले तक, आतंकवाद को लेकर भारत लगातार पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करता रहा है. आखिर "फ्रेंकस्टीन स्टेट" का अर्थ क्या है, और पाकिस्तान के संदर्भ में इसका इस्तेमाल क्यों किया गया? आम भाषा में समझे पूरी बात कि भारत ने यूएन में पाकिस्तान को "फ्रेंकस्टीन स्टेट" क्यों कहा?
दरअसल, एक दिन पहले यूएन मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई तीखी बहस के दौरान एक शब्द अचानक दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया. वो शब्द है, "फ्रेंकस्टीन स्टेट." यूएनएचआरसी की बैठक में भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को "फ्रेंकस्टीन स्टेट" बताते हुए कहा कि वह ऐसा देश है जिसने जिन ताकतों को कभी बढ़ावा दिया, आज वही उसके लिए भी खतरा बन चुकी हैं.
अनुपमा सिंह का यह तंज केवल कूटनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि आतंकवाद और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति पर भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों का धारदार हमला भी. आखिर, यूएन में भारतीय डिप्लोमैट नेपाकिस्तान के संदर्भ में क्यों इस शब्द का इस्तेमाल किया?
क्या है 'फ्रेंकस्टीन स्टेट'?
"फ्रेंकस्टीन स्टेट" कोई आधिकारिक राजनीतिक या कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि एक रूपक (Metaphor) है. इसका इस्तेमाल ऐसे देश के लिए किया जाता है,? जिस पर आरोप हो कि उसने अपने रणनीतिक हितों के लिए कुछ उग्रवादी, चरमपंथी या गैर-राज्य तत्वों (Non-State Actors) को बढ़ावा दिया, लेकिन बाद में वही ताकतें उसके नियंत्रण से बाहर हो गईं और उसके लिए भी खतरा बन गईं.
यह शब्द 1818 में प्रकाशित ब्रिटिश लेखिका मैरी शेली के प्रसिद्ध उपन्यास Frankenstein से आया है. कहानी में वैज्ञानिक विक्टर फ्रेंकस्टीन एक आर्टिफिशियल और खतरनाक जानवर बनाया, लेकिन बाद में वही राक्षस उसके नियंत्रण से बाहर हो गया और अंत में विनाश का कारण बना. तभी से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में "फ्रेंकस्टीन" उस स्थिति का प्रतीक बन गया है, जब कोई शक्ति अपने ही बनाए हुए तंत्र या समूहों का शिकार बन जाती है.
जियोपॉलिटिक्स में इसके मायने क्या?
भू-राजनीति में "फ्रेंकस्टीन स्टेट" शब्द का इस्तेमाल अक्सर उन देशों के संदर्भ में किया जाता है जिन पर आरोप लगता है कि उन्होंने किसी समय रणनीतिक लाभ के लिए सशस्त्र समूहों, मिलिशिया या उग्रवादी संगठनों को समर्थन दिया, लेकिन बाद में वही समूह क्षेत्रीय या घरेलू सुरक्षा के लिए खतरा बन गए.
अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीनों, बाद में अल-कायदा के उभार और ISIS के उदय पर होने वाली चर्चाओं में भी यह रूपक कई बार इस्तेमाल किया गया है. इसका मूल संदेश यही होता है कि अल्पकालिक रणनीतिक लाभ कभी-कभी दीर्घकालिक सुरक्षा को संकट में डालना.
भारत ने पाकिस्तान के लिए इसका क्यों इस्तेमाल किया?
UNHRC में जवाबी बयान देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान "फ्रेंकस्टीन स्टेट का जीता-जागता उदाहरण" है, जो तब हैरान होता है जब उसका अपना बनाया हुआ राक्षस उसी को नुकसान पहुंचाता है.
भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय कुछ आतंकी संगठनों को संरक्षण या समर्थन मिलता रहा है और उन्होंने भारत में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया है. नई दिल्ली का तर्क है कि आतंकवाद को विदेश नीति या रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश का अंततः उल्टा असर पड़ता है.
दूसरी ओर पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि वह स्वयं आतंकवाद का शिकार रहा है. पाकिस्तान का दावा है कि उसने आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारी मानवीय और आर्थिक कीमत चुकाई है. यही कारण है कि UN में इस्तेमाल हुआ यह एक शब्द केवल कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि आतंकवाद, सुरक्षा और भारत-पाकिस्तान संबंधों के दशकों पुराने विवाद का प्रतीक बन गया है.
एकेडमिक वर्ल्ड में कब से चर्चा में?
अंग्रेजी लेखिका मैरी शेली ने 1818 में 'फ्रेंकस्टीन; ऑर, द मॉडर्न प्रोमेथियस' नामक उपन्यास लिखा था. दिलचस्प बात यह है कि 'फ्रेंकस्टीन' की रचना अंग्रेजी लेखिका मैरी शेली ने महज 18 वर्ष की उम्र में शुरू की थी. 1818 में प्रकाशित यह उपन्यास आज विश्व साहित्य की सबसे प्रभावशाली रचनाओं में गिना जाता है.
पाकिस्तान की ओर से भारत पर कब कब हुए बड़े आतंकी हमले
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट
12 मार्च 1993 को मुंबई में 12 सिलसिलेवार बम धमाके हुए. 250 से अधिक लोगों की मौत हुई. यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है.
2001 भारतीय संसद पर हमला
13 दिसंबर 2001 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन पर हमला हुआ. भारत ने इस हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी.
2006 मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सात धमाकों में 180 से अधिक लोगों की मौत हुई. यह हमला भारत के शहरी आतंकवाद के सबसे बड़े मामलों में शामिल है.
2008 26/11 मुंबई हमला
26 नवंबर 2008 को 10 आतंकियों ने मुंबई में समन्वित हमले किए. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े इस हमले में 166 लोग मारे गए. ताज होटल, ओबेरॉय होटल और नरीमन हाउस जैसे प्रतिष्ठित ठिकाने निशाने पर थे.
2016 पठानकोट एयरबेस हमला
जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला हुआ. भारत ने इसके लिए जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार बताया.
2016 उरी हमला
सितंबर 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय पर हमले में 19 सैनिक शहीद हुए. इसके बाद भारत ने नियंत्रण रेखा के पार "सर्जिकल स्ट्राइक" करने का दावा किया.
2019 पुलवामा हमला
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ. 40 जवान शहीद हुए. इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली. इसके जवाब में भारत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की.
2025 पहलगाम हमला
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर सीमा-पार आतंकवाद पर बहस को तेज किया. भारत ने इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवादी ढांचे और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई.




