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आखिर बिक गया टिकटॉक, पूरा हुआ ट्रंप का सपना; क्या भारत में भी संभव है वापसी?

शौ ज़ी च्यू ने कर्मचारियों को बताया कि यह नया अमेरिकी जॉइंट वेंचर एक पूरी तरह स्वतंत्र कंपनी की तरह काम करेगा. इसके पास अमेरिकी यूज़र्स के डेटा की सुरक्षा, ऐल्गोरिदम की सिक्योरिटी, कंटेंट मॉडरेशन (यानी कौन सा कंटेंट दिखाना है या नहीं) और सॉफ्टवेयर की गारंटी का पूरा अधिकार होगा.

आखिर बिक गया टिकटॉक, पूरा हुआ ट्रंप का सपना; क्या भारत में भी संभव है वापसी?
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( Image Source:  Create By AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Published on: 19 Dec 2025 10:57 AM

टिकटॉक ऐप को अमेरिका में चलते रहने के लिए एक बड़ी और बड़ी डील हो गई है. न्यूज़ एजेंसी AFP को कंपनी के अंदरूनी मेमो मिला है, जिसमें बताया गया है कि टिकटॉक ने अमेरिका में अपने ऐप को जारी रखने और अपनी चीनी मालिकाना हक वाली कंपनी से जुड़े संभावित बैन से बचने के लिए कुछ बड़े निवेशकों के साथ एक जॉइंट वेंचर का समझौता कर लिया है. टिकटॉक के सीईओ शौ ज़ी च्यू ने अपने कर्मचारियों को एक मेमो में बताया कि कंपनी और उसकी मूल कंपनी बाइटडांस ने ओरेकल, प्राइवेट इक्विटी फर्म सिल्वर लेक, और अबू धाबी के निवेशक MGX के साथ मिलकर एक नई अमेरिका-बेस्ड कंपनी बनाने पर सहमति जता दी है.

इस समझौते का मकसद अमेरिका के 2024 के उस कानून की शर्तों को पूरा करना है, जिसमें कहा गया था कि टिकटॉक के अमेरिकी ऑपरेशंस को बेचा जाए या फिर ऐप को पूरी तरह बंद कर दिया जाए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए व्यवस्था में अमेरिकी और ग्लोबल इन्वेस्टर्स के पास नए जॉइंट वेंचर का लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा होगा. बाइटडांस के पास सिर्फ 19.9 प्रतिशत हिस्सा बचेगा, जो अमेरिकी कानून के तहत किसी चीनी कंपनी के लिए अधिकतम अलाउड ऑनरशिप राइट्स है. इसमें ओरेकल, सिल्वर लेक और MGX – इन तीनों के पास मिलाकर 45 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी (हर एक के पास 15 प्रतिशत). इसके अलावा, बाइटडांस के मौजूदा निवेशकों से जुड़ी कंपनियों के पास लगभग 30.1 प्रतिशत हिस्सा होगा.

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अमेरिकी यूज़र्स को यह भरोसा दिलाए

शौ ज़ी च्यू ने कर्मचारियों को बताया कि यह नया अमेरिकी जॉइंट वेंचर एक पूरी तरह स्वतंत्र कंपनी की तरह काम करेगा. इसके पास अमेरिकी यूज़र्स के डेटा की सुरक्षा, ऐल्गोरिदम की सिक्योरिटी, कंटेंट मॉडरेशन (यानी कौन सा कंटेंट दिखाना है या नहीं) और सॉफ्टवेयर की गारंटी का पूरा अधिकार होगा. AFP के मुताबिक, च्यू ने कहा कि इस नई कंपनी के पास विशेष अधिकार और जिम्मेदारी होगी कि वह अमेरिकी यूज़र्स को यह भरोसा दिलाए कि उनका कंटेंट, सॉफ्टवेयर और डेटा पूरी तरह सुरक्षित है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि ओरेकल इस पूरे सेटअप में टिकटॉक का 'भरोसेमंद सिक्योरिटी पार्टनर' बनेगा. ओरेकल की जिम्मेदारी होगी कि वह सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करे, ऑडिट करे और अमेरिकी यूज़र्स का संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखे.

अभी कुछ और काम बाकी

यह सारा डेटा अमेरिका के अंदर ही ओरेकल के क्लाउड सर्वर पर स्टोर किया जाएगा. नई कंपनी विज्ञापन, मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसे कुछ बिज़नेस एक्टिविटीज को भी संभालेगी, जबकि टिकटॉक की अमेरिकी यूनिट्स ग्लोबल प्रोडक्ट्स के साथ जुड़ाव को मैनेज करेंगी. यह पूरा समझौता 22 जनवरी 2026 को पूरा होने वाला है, हालांकि च्यू ने कर्मचारियों को बताया कि अभी कुछ और काम बाकी हैं. AFP के अनुसार, यह मेमो पहली बार पक्के तौर पर कन्फर्म करता है कि टिकटॉक ने सितंबर में व्हाइट हाउस द्वारा सुझाए गए डील के फ्रेमवर्क पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं.

पहले भी टिकटॉक को बैन करने की कोशिश

यह कदम अमेरिकी सांसदों के कई सालों के दबाव के बाद उठाया गया है. सांसदों का मानना है कि चीन की सरकार टिकटॉक के ऐल्गोरिदम का इस्तेमाल करके अमेरिकियों का डेटा हासिल कर सकती है या उनकी राय को प्रभावित कर सकती है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में टिकटॉक को बैन करने की कोशिश की थी, लेकिन अब व्हाइट हाउस वापस आने के बाद वे कई बार एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करके इस कानून को लागू करने में देरी करते रहे. ट्रंप ने खुद कहा है कि टिकटॉक ने उनकी दोबारा चुनाव जीतने में मदद की, क्योंकि ऐप के अमेरिका में 170 मिलियन से ज्यादा यूज़र्स हैं. ट्रंप ने इस नई डील का खुलकर समर्थन किया है और पहले ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन को जो उनके पुराने दोस्त हैं इस डील में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया था. AFP के मुताबिक, लैरी एलिसन हाल ही में बड़े मीडिया और टेक्नोलॉजी निवेशों के कारण फिर से सुर्खियों में आए हैं.

हो रही है आलोचना

हालांकि, इस डील की कुछ अमेरिकी नेताओं ने आलोचना भी की है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिज़ाबेथ वॉरेन के हवाले से कहा गया है कि अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे टिकटॉक को 'अरबपतियों के कब्जे' में देने की इजाज़त दे रहे हैं. वॉरेन ने कहा कि अमेरिकियों को यह जानना चाहिए कि क्या राष्ट्रपति ने इस "अरबपति टेकओवर" के लिए कोई गुप्त समझौता किया है.

भारत में भी बैन हुआ टिकटॉक

भारत की बात करें तो साल 2020 में पहले सुरक्षा कारणों से टिकटॉक को भारत में बैन कर दिया गया था. भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप्स पर बैन लगाया था, जिसमें TikTok भी शामिल था. सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह कदम उठाया था. उस समय सरकार का कहना था कि इन ऐप्स की गतिविधियां भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ थी. इस बैन की लिस्ट में सिर्फ TikTok ही नहीं था बल्कि इसके Shareit, UC Browser, Kwai, Vigo Video और Clash of Kings जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी शामिल थे.

भारत में बैन पर लगेगा ब्रेक?

अमेरिका में हुआ यह TikTok समझौता भारत में कोई सीधा असर नहीं डालेगा, क्योंकि भारत ने TikTok को राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी कारणों से 2020 में प्रतिबंधित किया था. भारत का बैन अपने फैसलों और सबूतों पर आधारित है, इसलिए केवल अमेरिकी निवेश या नया मालिकाना ढांचा ऐप की भारतीय वापसी की गारंटी नहीं देता. लेकिन हां, अगर अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं हल होती दिखें, तो इससे TikTok की वैश्विक छवि मजबूत होगी और भविष्य में भारत में वापसी की उम्मीदें बढ़ सकती हैं. लेकिन यह पूरी तरह भारत सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा.

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