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Rohit Shetty Firing Case: 8 महीने पहले रची गई थी डायरेक्टर को निशाना बनाने की साजिश, अन्य सेलेब्स की भी हुई थी रेकी

रोहित शेट्टी के घर हुई गोलीबारी के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग की महीनों पुरानी साजिश सामने आई है. मुंबई पुलिस जांच में डेड ड्रॉप, एन्क्रिप्टेड ऐप और कई युवाओं की भूमिका उजागर हुई है.

Rohit Shetty Firing Case: 8 महीने पहले रची गई थी डायरेक्टर को निशाना बनाने की साजिश, अन्य सेलेब्स की भी हुई थी रेकी
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( Image Source:  Instagram: itsrohitshetty )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 8 Feb 2026 10:00 AM

मुंबई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) के घर पर हुई गोलीबारी की साजिश के बारे में कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं. यह पूरी घटना लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ी हुई है, और इसका मुख्य प्लानर शुभम लोनकर नाम का शख्स है, जिसे गिरोह का बड़ा सदस्य माना जा रहा है. यह साजिश लगभग 8 महीने पहले तैयार की गई थी यानी काफी पहले से ही रोहित शेट्टी को निशाना बनाने की योजना बन रही थी. लेकिन असल हमला करने की बारीक प्लानिंग (जैसे कब, कैसे, किस जगह पर गोली चलानी है) सिर्फ हमले से 10 दिन पहले ही फाइनल की गई.

शुभम लोनकर ने इस साजिश को बहुत चालाकी से छिपाया. उसने कई लेयर (परतें) बनाईं ताकि कोई सुराग न मिले. हथियार कहां से आए, स्कूटर कैसे पहुंचा, शूटर (गोली चलाने वाला) कौन था- सब कुछ अलग-अलग लोगों के जरिए हुआ, और किसी को पूरी तस्वीर नहीं पता थी. सबसे खास बात यह थी कि गोली चलाने वाली टीम को भी आखिरी पल तक नहीं बताया गया कि टारगेट कौन है. लोनकर ने 1 फरवरी तक किसी को रोहित शेट्टी का नाम नहीं बताया. जानकारी सिर्फ जरूरी लोगों तक ही सीमित रखी गई.

डेड ड्रॉप तकनीक से पहुंचाया गया स्कूटर और हथियार

हमले का आखिरी हिस्सा 20 जनवरी से शुरू हुआ. दो युवक सिद्धार्थ येनपुरे (19 साल) और समर्थ पोमाजी (19 साल) पुणे से लोनकर के कहने पर मुंबई आए. उन्होंने जुहू के स्टारबक्स के पास एक होंडा डियो स्कूटर खड़ी की. स्कूटर की चाबी फुटरेस्ट के नीचे छिपा दी और चले गए. कुछ घंटे बाद सीसीटीवी में दिखा कि एक नकाबपोश आदमी आया, चाबी की सही जगह पता थी, उसने स्कूटर उठाया और ले गया. पुलिस को अभी तक पक्का नहीं पता कि वह शूटर खुद था या कोई और व्यक्ति जो सिर्फ स्कूटर को आगे पहुंचाने वाला 'बफर' था. उसकी तलाश जारी है, पूछताछ में इन दोनों ने बताया कि 19 जनवरी को लोनकर और स्वप्निल साकत (23 साल) ने उन्हें पुणे से लोनावला तक स्कूटर ले जाने को कहा. लोनावला पहुंचने पर एन्क्रिप्टेड ऐप (सिग्नल जैसा सुरक्षित ऐप) से मुंबई जाने के नए निर्देश मिले. मुंबई पहुंचकर उन्हें जुहू में एक खास जगह पर स्कूटर छोड़ने को कहा गया यह 'डेड ड्रॉप' तरीका था, जहां सामान बिना मिले छोड़ दिया जाता है.

कैसे मिला स्कूटर?

1 फरवरी की सुबह तड़के गोलीबारी हुई. उसके बाद पुलिस ने शेट्टी टावर से करीब 2 किमी दूर विले पार्ले में किंग्स इंटरनेशनल होटल के पास वही स्कूटर बरामद किया. स्कूटर पर सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन फोरेंसिक टीम ने उंगलियों के निशान, डीएनए आदि जुटाए।स्कूटर पुणे के करवे नगर के अमन मारोटे से सेकंड-हैंड 30 हजार रुपये में खरीदा गया था. यह खरीद आदित्य गायकी (19) ने पोमाजी के कहने पर की, और पैसे लोनकर ने स्वप्निल साकत के जरिए दिए थे. हथियार भी बहुत सोच-समझकर लाया गया. लोनकर ने 'संपर्क रहित' तरीके से हथियार पहुंचाया. कोई फोन पर बात नहीं, कोई सीधा मिलना नहीं. हथियार सप्लायर आशाराम फासाले था, जिसे गिरफ्तार किया गया. फासाले ने सोशल मीडिया से लोनकर से संपर्क किया और 7-8 महीने पहले स्वप्निल साकत को 3 हथियार दिए.

कई बॉलीवुड हस्तियों के घर थे निशाने पर

चार महीने पहले लोनकर ने ऐप पर साकत को पुणे में एक सुनसान जगह पर हथियार छोड़ने को कहा. साकत ने हथियार वहां रखा और चला गया. उसके बाद हथियार बिना किसी और के संपर्क के शूटर तक पहुंच गया. साकत को भी सटीक तारीख याद नहीं कि कब हथियार दिया गया था. साकत ने बताया कि तीन हथियारों में से एक हमले में इस्तेमाल हुई, एक खराब थी तो फेंक दी गई, और तीसरी पुलिस ने उसके घर से बरामद की. जांच में यह भी पता चला कि लोनकर सोशल मीडिया पर बॉलीवुड की हस्तियों की गतिविधियां लगातार देखता था. हमले से पहले अंतिम 10 दिनों में कई मशहूर लोगों के घरों की रेकी (जासूसी) हुई होगी. शायद शेट्टी का घर आखिरी में चुना गया. लोनकर ने कुछ हाई-प्रोफाइल लोगों की लिस्ट से 'रैंडम' तरीके से टारगेट चुना ताकि सबमें डर फैले और लोग डरकर पैसा दें.

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