खुल गया 139 साल पुराना राज़! Coca-Cola का ‘सीक्रेट फॉर्मूला’ हो गया डिकोड, घर बैठे Coke बनाने का दावा
Coca-Cola के 139 साल पुराने ‘सीक्रेट फॉर्मूले’ को लेकर बड़ा दावा सामने आया है. वैज्ञानिक और यूट्यूबर जैक आर्मस्ट्रॉन्ग ने वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए Coke की रेसिपी को लगभग पूरी तरह डिकोड करने का दावा किया है. उनके मुताबिक Coca-Cola का स्वाद 99% चीनी पर आधारित है, जबकि बाकी 1% खास ‘नेचुरल फ्लेवर्स’ से आता है, जिसे उन्होंने बिना coca leaves के केमिकल विकल्पों से तैयार किया. स्वाद को लगभग असली Coke जैसा बताया गया है.
दुनिया की सबसे मशहूर सॉफ्ट ड्रिंक Coca-Cola का नाम लेते ही दिमाग में एक ही बात आती है - इसका सीक्रेट फॉर्मूला. 139 साल से यह रेसिपी ताले-चाबी, बैंक लॉकर और कानूनी सुरक्षा में कैद रही है. लेकिन अब एक वैज्ञानिक के दावे ने इस रहस्य की दीवारों में दरार डाल दी है.
The Daily Mail की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वैज्ञानिक और यूट्यूबर जैक आर्मस्ट्रॉन्ग (Zach Armstrong) ने दावा किया है कि उन्होंने Coca-Cola के फॉर्मूले को लगभग पूरी तरह क्रैक कर लिया है - और हैरान करने वाली बात यह है कि Coke का स्वाद 99% चीनी पर टिका है. यह खुलासा सिर्फ एक सनसनी नहीं, बल्कि विज्ञान, स्वाद और कॉर्पोरेट गोपनीयता की दुनिया में बड़ा झटका माना जा रहा है.
Coca-Cola का सीक्रेट क्यों है इतना रहस्यमय?
Coca-Cola कंपनी दशकों से कहती आ रही है कि उसकी असली ताकत “Natural Flavours” नाम के एक रहस्यमयी घटक में छिपी है. यही वह 1% हिस्सा है जो Coke को Pepsi और बाकी कोल्ड ड्रिंक्स से अलग बनाता है. लेबल पर आपको चीनी, कैफीन, फॉस्फोरिक एसिड और कैरामेल कलर जैसी चीज़ें साफ-साफ लिखी मिल जाती हैं. लेकिन “Natural Flavours” क्या है - यह आज तक कंपनी का सबसे बड़ा राज़ रहा है.
कौन हैं जैक आर्मस्ट्रॉन्ग?
जैक आर्मस्ट्रॉन्ग एक वैज्ञानिक हैं और YouTube चैनल LabCoatz चलाते हैं. उन्होंने करीब एक साल से ज्यादा समय तक Coca-Cola के स्वाद, केमिकल स्ट्रक्चर और खुशबू पर रिसर्च की. उनका मकसद था कि “क्या Coke को बिना असली फॉर्मूले के भी वैज्ञानिक तरीके से दोहराया जा सकता है?”
Mass Spectrometry से खुला राज़
आर्मस्ट्रॉन्ग ने एक हाई-लेवल केमिकल टेस्ट का इस्तेमाल किया, जिसे Mass Spectrometry कहा जाता है. इस प्रक्रिया में किसी भी पदार्थ को गैस में बदलकर उसके हर-एक अणु (molecule) का केमिकल फिंगरप्रिंट निकाला जाता है. यानी - Coke के अंदर आखिर-आखिर कौन-कौन से केमिकल मौजूद हैं, यह पता लगाया गया. हालांकि, यहां भी एक बड़ी दिक्कत आई.
Coca Leaves: सबसे बड़ा लीगल रोड़ा
असल Coca-Cola में एक खास फ्लेवर आता है coca leaves से - वही पत्तियां जिनसे कोकीन बनती है. हालांकि Coke में इस्तेमाल होने वाला एक्सट्रैक्ट cocaine-free होता है, लेकिन अमेरिका में इसे आयात करने का लाइसेंस सिर्फ Stepan Company के पास है. यह कंपनी आम लोगों को यह एक्सट्रैक्ट बेचती ही नहीं. यहीं से असली चुनौती शुरू हुई.
बिना Coca Leaves के Coke कैसे बनी?
आर्मस्ट्रॉन्ग ने coca leaves को पूरी तरह हटाकर उनका केमिकल विकल्प खोजने का फैसला किया. Mass spectrometry से मिले डेटा के आधार पर उन्होंने कई essential oils को बेहद सटीक अनुपात में मिलाया. उनके फॉर्मूले में शामिल तेल: Lemon oil, Lime oil, Orange oil, Cinnamon oil, Nutmeg oil, Coriander oil, Tea tree oil और Fenchol (pine जैसी खुशबू वाला फ्लेवर) - इन सभी को मिलाकर एक ऐसा फ्लेवर बेस तैयार किया गया जो Coke के “natural flavours” से बेहद करीब था.
24 घंटे की ‘एजिंग’ और शराब का इस्तेमाल
इस तेलों के मिश्रण को कम से कम 24 घंटे तक एज किया गया. इसके बाद इसमें food-grade alcohol मिलाया गया ताकि फ्लेवर स्टेबल रहे. चौंकाने वाली बात यह है कि यह मिश्रण इतना कंसंट्रेटेड था कि एक बैच से 5,000 लीटर Coca-Cola जैसी ड्रिंक बनाई जा सकती है. फिर भी कुछ कमी थी. इतनी मेहनत के बाद भी आर्मस्ट्रॉन्ग को लगा कि स्वाद में कुछ “ठंडक” और “कसैलापन” (astringency) मिसिंग है. यहीं पर एक 2014 की रिसर्च ने उनकी मदद की. University of Illinois के फूड साइंटिस्ट्स ने बताया था कि Coca-Cola में tannins की भूमिका बेहद अहम है.
Tannins: वो स्वाद जो मशीन नहीं पकड़ पाई
Tannins वो केमिकल होते हैं जो चाय, वाइन, कॉफी और चॉकलेट में पाए जाते हैं. ये मुंह में हल्का-सा सूखापन और कड़वाहट पैदा करते हैं - ठीक वही एहसास जो Coke पीते वक्त आता है. चूंकि tannins non-volatile होते हैं, इसलिए mass spectrometry में पकड़ में नहीं आए. इसका समाधान निकला Wine tannins powder में, जो बाजार में कानूनी रूप से मिलता है.
फाइनल Coke कैसे बनी?
आखिरी स्टेप में जिन चीज़ों को मिलाया गया वो थीं - पानी, Tannins, कैरेमल कलर, विनेगर, ग्लिसरीन (गाढ़ापन देने के लिए), कैफीन, चीनी, वनीला एक्ट्रैक्ट और फॉस्फोरिक एसिड. फिर 1 लीटर इस घोल में सिर्फ 20 मिलीलीटर essential oil मिश्रण मिलाया गया. इसे गर्म कर carbonated water के साथ मिलाया गया.
स्वाद का फैसला: ‘लगभग असली Coke जैसी’
आर्मस्ट्रॉन्ग और उनकी टीम के taste testers का दावा है कि “यह ड्रिंक असली Coca-Cola से लगभग अलग नहीं की जा सकती.” हालांकि शुरुआती सेटअप महंगा है, लेकिन एक बार बन जाने के बाद लीटरों Coke सिर्फ पैसों में तैयार हो जाती है. आर्मस्ट्रॉन्ग चेतावनी देते हैं कि कुछ केमिकल्स Undiluted स्थिति में त्वचा और आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं. इसलिए बिना सुरक्षा उपकरणों के इसे ट्राई न करने की सलाह दी गई है.
Coca-Cola कंपनी का क्या कहना है?
The Daily Mail के अनुसार, इस दावे पर प्रतिक्रिया के लिए Coca-Cola कंपनी से संपर्क किया गया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया.
क्या सच में खत्म हो जाएगा Coca-Cola का सबसे बड़ा राज़?
यह दावा भले ही कानूनी तौर पर Coca-Cola के ट्रेड सीक्रेट को खत्म न करे, लेकिन इतना तय है कि 139 साल पुरानी ‘मिस्ट्री रेसिपी’ अब पहले जैसी रहस्यमयी नहीं रही. अब सवाल यह नहीं कि Coke में क्या है, बल्कि यह है कि क्या दुनिया का सबसे मशहूर ब्रांड अपने सबसे बड़े राज़ को बचा पाएगा?





