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11वीं फेल, कभी थे 10 क्रिमिनल केस, अब कितने मामले, ऐसे हैं शिंदे के पार्षद रमेश म्हात्रे, जिन्होंने अस्पताल में की मारपीट, Full Detail

मुंबई के डोंबिवली स्थित KDMC शास्त्रीनगर अस्पताल में गर्भवती महिला के इलाज को लेकर विवाद के बाद डॉक्टरों से कथित मारपीट का मामला सामने आया. जानिए शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे कौन हैं?

11वीं फेल, कभी थे 10 क्रिमिनल केस, अब कितने मामले, ऐसे हैं शिंदे के पार्षद रमेश म्हात्रे, जिन्होंने अस्पताल में की मारपीट, Full Detail
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मुंबई के डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के शास्त्रीनगर अस्पताल में एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर हुए विवाद के बाद बड़ा हंगामा खड़ा हो गया. अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे और उनके समर्थकों ने अस्पताल में घुसकर मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट की.

इस घटना के विरोध में मंगलवार को अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी. मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. डॉक्टर संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है.

क्या बोले रमेश म्हात्रे?

न्यूज-18 की रिपोर्ट के मुताबिक, नगरसेवक रमेश म्हात्रे ने अपने पक्ष में कहा कि उन्होंने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से इसलिए संपर्क किया क्योंकि शाम करीब 6 बजे भर्ती हुई गर्भवती महिला का कथित तौर पर रात 9 बजे तक इलाज शुरू नहीं हुआ था. उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों पर मरीज के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि "जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था."

कौन हैं रमेश म्हात्रे?

रमेश सुक्र्या म्हात्रे कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र से शिवसेना के नगरसेवक हैं और कई वर्षों से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं. उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने डोंबिवली (पूर्व) के सरस्वती हाई स्कूल से पढ़ाई की है. वह 10वीं पास और 11वीं फेल हैं.

हलफनामे में उनके पास 21 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की गई है. साथ ही उनके खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों वाले तीन आपराधिक मामले लंबित बताए गए हैं. हालांकि इन मामलों में अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है. रमेश म्हात्रे ने साल 2019 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव कल्याण ग्रामीण सीट से लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था. जांच के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि नवजात को जन्म के बाद नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है.

अस्पताल में उस समय NICU के सभी बेड भरे हुए थे. ऐसे में डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि यदि नवजात को विशेष इलाज की जरूरत पड़ी तो मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ सकता है. अस्पताल कर्मचारियों का आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ. इसके बाद रमेश म्हात्रे अपने कुछ समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और कथित तौर पर एक महिला डॉक्टर, दो अन्य डॉक्टरों और तीन नर्सों के साथ मारपीट की. कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि सुरक्षा गार्डों को बीच-बचाव करने से भी रोका गया. अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि इस कथित हमले के बाद कई स्वास्थ्यकर्मी मानसिक रूप से परेशान हो गए और कुछ रोने लगे.

मरीज के परिवार ने क्या आरोप लगाए?

रिपोर्ट के मुताबिक मरीज की मां ने दावा किया कि उनकी बेटी और नवजात दोनों की हालत गंभीर थी. उन्होंने रमेश म्हात्रे के कार्यालय से बातचीत करते हुए अस्पताल में हुई घटनाओं का क्रम बताया. रमेश म्हात्रे ने कहा कि महिला को शाम करीब 6 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन रात 9 बजे तक उसे उचित इलाज नहीं मिला. उनका कहना है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बात करने के बाद ही मरीज का इलाज शुरू हुआ. उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों पर मरीज की स्थिति को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने दोहराया कि "जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था."

डॉक्टरों ने क्यों की हड़ताल?

घटना के बाद डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया. उन्होंने आरोपियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सादिया पिंजारी ने कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.

किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर?

सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सुहास हेमाडे ने बताया कि इस मामले में चार पुरुष और एक महिला समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

मामला सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बल प्रयोग, आपराधिक धमकी और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा एवं संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.

डॉक्टर संगठन ने क्या कहा?

सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (Central MARD) ने इस कथित हमले की कड़ी निंदा की है. संगठन ने कहा कि ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल MARD के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे ने कहा कि संगठन इस घटना की पूरी जानकारी जुटा रहा है और महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग तथा गृह विभाग को ज्ञापन देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेगा.

संगठन ने राज्यभर के डॉक्टरों से अपील की है कि ड्यूटी के दौरान हिंसा होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराएं. साथ ही चेतावनी दी कि यदि पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई तो विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अस्पतालों में सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों को कानूनी संरक्षण देने की मांग की जाएगी.

डॉ. श्रीकांत शिंदे ने क्या कहा?

सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस घटना की निंदा की. उन्होंने KDMC के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ हुई कथित मारपीट को "बेहद निंदनीय" बताया.

उन्होंने कहा, "मैं स्वयं एक डॉक्टर हूं और जानता हूं कि मरीजों की सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा है. डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों में दिन-रात लोगों की सेवा करते हैं."

प्रियंका चतुर्वेदी ने मामले पर क्या कहा?

शिवसेना (शिंदे गुट) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "शिंदे सेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे पर शर्म आती है.

उन्होंने आगे लिखा,"माननीय गृह मंत्री, इन्हें तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए और भविष्य में कभी भी चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए."

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