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दिसंबर में ही क्यों बांग्लादेश वापस लौटना चाहती हैं Sheikh Hasina, 1971 के वॉर से क्या है कनेक्शन?

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने इस साल दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटने की इच्छा जताई है. शेख हसीना ने बताया कि क्यों उनके लिए ये महीना इतना खास है.

Sheikh Hasina Return Bangladesh
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Sheikh Hasina Return Bangladesh

( Image Source:  ANI, X/ @Sputnik_India )

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह दिसंबर में अपने देश लौटने की योजना बना रही हैं. अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रहीं हसीना ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़े होकर लोकतंत्र, विकास और स्थिरता की बहाली में योगदान देना है.

नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि देश लौटने पर उन्हें जेल जाना पड़े या मौत का सामना करना पड़े, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगी. उनके इस बयान पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और भारत के समक्ष भी अपनी नाराजगी दर्ज कराई है.

दिसंबर में ही क्यों लौटना चाहती है हसीना?

जब शेख हसीना से पूछा गया कि वह बांग्लादेश कब लौटना चाहती हैं, तो उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए दिसंबर को अपने लिए विशेष महत्व का महीना बताया. उन्होंने कहा "दिसंबर हमारी विजय का महीना है, इसलिए मैं दिसंबर के महीने में वापस जाना चाहती हूं."

क्या है 1971 का मुक्ति संग्राम?

इतिहास में 1971 मुक्ति संग्राम को बांग्लादेश की आजादी के लिए जाना जाता है. जिसके चलते 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश एक अलग स्वतंत्र राष्ट्र बना था. यह युद्ध पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के बंगाली राष्ट्रवादियों और पश्चिमी पाकिस्तान की सैन्य सरकार के बीच हुआ था. 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा भारत के हवाई अड्डों पर हमले के बाद भारत औपचारिक रूप से इस युद्ध में शामिल हुआ.

भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी ने मिलकर 'मित्र वाहिनी' के रूप में पाकिस्तानी सेना का मुकाबला किया. इसके बाद 16 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था. भारत में 16 दिसंबर को हर साल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.

जेल जानें को लेकर क्या बोली शेख हसीना?

उन्होंने कहा "जो भी नियति मेरा इंतजार कर रही हो, मैं अपने लोगों के पास लौट आऊंगी. जब मेरे प्यारे देशवासी कष्ट झेल रहे हैं, मैं उनसे दूर नहीं रह सकती. मुझे पता है कि मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है. मुझे जेल भेजा जा सकता है. वे मनगढ़ंत मामलों में फैसले लागू करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन डर मेरे जनमानस के प्रति कर्तव्य को नहीं बदल सकता. मेरा जीवन बहुत पहले ही व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंताओं से परे हो चुका है, मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मुझे मार भी सकते हैं."

क्या बोली बांग्लादेश सरकार?

शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में उन्हें सार्वजनिक मंच से संबोधित करने की अनुमति देना दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकता है. मंत्रालय ने कहा "बांग्लादेश इस बात से बेहद आक्रोशित है कि फरार नरसंहार की दोषी शेख हसीना को आज शाम नई दिल्ली में मीडिया के साथ लाइव बातचीत करने की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने और उनके साथियों ने बांग्लादेश राज्य और उसके लोगों के खिलाफ विषैले हमले किए."

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा "ढाका को इस बात का गहरा अफसोस है कि भारत सरकार को इस आयोजन के हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में पहले से ही चिंता व्यक्त किए जाने के बावजूद, इस सार्वजनिक कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति दी गई."

शेख हसीना ने क्या रखी मांगें?

अपने संबोधन के दौरान शेख हसीना ने बांग्लादेश में सामान्य लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने के लिए कई मांगें भी रखीं. उन्होंने कहा कि अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए, राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए, झूठे मामलों को समाप्त किया जाए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता की गारंटी दी जाए.

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