पीएम स्टारमर पर एपस्टीन संकट, ये मुस्लिम महिला संभालेगी ब्रिटेन की कमान? जानिए कौन हैं शबाना महमूद
शबाना महमूद को ब्रिटेन के पीएम का अहम चेहरा माना जा रहा है. मौजूदा प्रधानमंत्री स्टारमर का एपस्टीन फाइल में नाम आने के बाद उन्हें हटाने की मांग उठने लगी है.
Who is Shabana Mahmood: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस समय अपने कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रहे हैं. पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन और दोषी यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के बीच संबंधों से जुड़े खुलासों के बाद उनकी नेतृत्व क्षमता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
इस पूरे विवाद का असर इतना गहरा है कि सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर से ही स्टारमर के इस्तीफे की मांग उठने लगी है.राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अब निगाहें संभावित उत्तराधिकारियों पर टिक गई हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम गृह मंत्री शबाना महमूद का है. लेबर पार्टी की उभरती हुई नेता मानी जा रहीं शबाना महमूद अगर नेतृत्व की दौड़ में उतरती हैं और कामयाब होती हैं, तो वह ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं.
कौन हैं शबाना महमूद?
45 साल की शबाना महमूद 2025 से ब्रिटेन की गृह मंत्री हैं. इससे पहले वह न्याय सचिव और लॉर्ड चांसलर के पद पर रह चुकी हैं. इन भूमिकाओं में उन्होंने जेल सुधार, इमिग्रेशन पॉलिसी और पुलिसिंग से जुड़े कई बड़े फैसले लिए. पेशे से बैरिस्टर शबाना महमूद बर्मिंघम लेडीवुड सीट से सांसद हैं और लेबर पार्टी के सामाजिक रूप से रूढ़िवादी माने जाने वाले ‘ब्लू लेबर’ गुट से जुड़ी हैं.
किस मूल की हैं शबाना?
शबाना महमूद का जन्म बर्मिंघम में हुआ था. उनके माता-पिता पाकिस्तानी मूल के हैं. उनका बचपन का कुछ समय सऊदी अरब में बीता, जिसके बाद वह वापस ब्रिटेन लौटीं. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के लिंकन कॉलेज से कानून की पढ़ाई की और इसके बाद पेशेवर कंपनसेशन लॉ के सेक्टर में बैरिस्टर के तौर पर काम किया.
शबाना महमूद का क्या है राजनीतिक सफर?
शबाना महमूद पहली बार 2010 में संसद के लिए चुनी गई थीं और वह ब्रिटेन की शुरुआती महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल रहीं. इसके बाद उन्होंने पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वह शैडो जस्टिस सेक्रेटरी, शैडो चीफ सेक्रेटरी टू द ट्रेजरी और नेशनल कैंपेन कोऑर्डिनेटर जैसे पदों पर रह चुकी हैं.
शबाना सरकार में रहते हुए क्या काम किया?
2024 में उन्हें लॉर्ड चांसलर और न्याय सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने जेलों में भीड़ कम करने के लिए शुरुआती कैदियों की रिहाई से जुड़े कार्यक्रम लागू किए और नागरिक अशांति के मामलों से निपटने में सरकार का नेतृत्व किया.
2025 में गृह मंत्री बनने के बाद उन्होंने इमिग्रेशन पर सख्त रुख अपनाया, शरणार्थियों से जुड़े बड़े सुधार किए और पुलिसिंग में लाइव फेशियल रिकग्निशन तकनीक के अब तक के सबसे बड़े इस्तेमाल की अगुवाई की.
स्टारमर पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
कीर स्टारमर जुलाई 2024 में भारी बहुमत से प्रधानमंत्री चुने गए थे. सत्ता में आने के बाद उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था. लेकिन अब सामने आए ईमेल्स से पता चला है कि उनके जेफ्री एप्सटीन से करीबी रिश्ते थे और उन्होंने कथित तौर पर एप्सटीन को सरकार से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां भी साझा की थीं. इन खुलासों के बाद पार्टी और आम जनता, दोनों के बीच नाराज़गी बढ़ गई है.
स्टारमर ने दी थी सफाई
स्टारमर ने यह कहते हुए माफी मांगी है कि उन्हें गुमराह किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उनके इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही है. हालांकि लेबर पार्टी के नियमों के तहत नेतृत्व को चुनौती देने के लिए किसी भी उम्मीदवार को पार्टी के 20 फीसदी सांसदों, यानी 81 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है. इस वजह से फिलहाल स्टारमर को तुरंत हटाना आसान नहीं है.





