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...तो अब चश्मे की नहीं रहेगी जरूरत! वैज्ञानिकों ने बनाई ऐसी आई ड्रॉप्स जो दूर कर देगी आपकी आंखों की कमजोरी

वैज्ञानिकों ने ऐसी आई ड्रॉप्स विकसित की हैं जो चश्मे की जरूरत को खत्म कर सकती हैं. यह ड्रॉप्स प्रेसबायोपिया से पीड़ित लोगों की पास की दृष्टि में तेज और स्थायी सुधार लाती हैं. 766 लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि एक घंटे में दृष्टि में औसतन 3.45 लाइनों का सुधार हुआ और असर दो साल तक बना रहा. ये सुरक्षित, प्रभावी और सस्ती चिकित्सा का विकल्प हो सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक शोध अभी आवश्यक है.

...तो अब चश्मे की नहीं रहेगी जरूरत! वैज्ञानिकों ने बनाई ऐसी आई ड्रॉप्स जो दूर कर देगी आपकी आंखों की कमजोरी
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह6 Mins Read

Updated on: 25 Sept 2025 12:05 PM IST

लोगों के लिए चश्मा पहनना एक आम समस्या बन चुका है, खासकर 40 साल की उम्र के बाद. लेकिन अब विज्ञान ने एक ऐसी दिशा में कदम बढ़ाया है जो चश्मे का युग समाप्त कर सकती है. हाल ही में यूरोपियन सोसायटी ऑफ कैटरैक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जन्स (ESCRS) की बैठक में प्रस्तुत एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विशेष आई ड्रॉप्स का खुलासा किया है, जो दृष्टि की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं.

यह अध्ययन उन लोगों पर किया गया जिनमें ‘प्रेसबायोपिया’ नामक बीमारी पाई जाती है. प्रेसबायोपिया एक प्रकार की लंबी दृष्टि दोष (Long-Sightedness) है जो आमतौर पर 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है. इस समस्या में आंख का लेंस अपनी लचक खो देता है जिससे पास की चीज़ें देखने में कठिनाई होती है. फिलहाल इसका इलाज चश्मे या सर्जरी से किया जाता है, लेकिन चश्मा पहनना कई लोगों के लिए असुविधाजनक है और सर्जरी हर किसी के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं. ऐसे में यह नई आई ड्रॉप्स एक सस्ती, सरल और प्रभावी चिकित्सा का विकल्प बन सकती हैं.

शोध में क्या हुआ?

The Guardian की रिपोर्ट के अनुसार इस शोध में कुल 766 प्रतिभागियों को शामिल किया गया. इन सभी ने दिन में दो बार आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया - सुबह जागते ही और उसके करीब छह घंटे बाद. ड्रॉप्स में दो मुख्य दवाइयों का मिश्रण था - पिलोकार्पीन (pilocarpine) और डाइक्लोफेनाक (diclofenac)। सभी प्रतिभागियों को डाइक्लोफेनाक की समान मात्रा दी गई, जबकि पिलोकार्पीन की मात्रा अलग-अलग तीन समूहों में विभाजित की गई - 1%, 2% और 3%.

ड्रॉप्स का असर देखने के लिए प्रतिभागियों की दृष्टि को जेगर (Jaeger) आइ चार्ट से परखा गया. अध्ययन में पाया गया कि ड्रॉप्स का उपयोग करने के केवल एक घंटे बाद मरीजों की दृष्टि में औसतन 3.45 लाइनों का सुधार देखा गया.

डॉ. जियोवाना बेनोज्जी, जो ब्यूनस आयर्स स्थित सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च फॉर प्रेसबायोपिया की निदेशक हैं, ने कहा, “हमारे अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि सभी तीन समूहों में पास की दृष्टि में तेज और स्थायी सुधार देखा गया. खासतौर पर एक प्रतिशत पिलोकार्पीन वाले समूह में 99% मरीज दो या उससे अधिक अतिरिक्त लाइनें पढ़ने में सक्षम हो गए.”

वहीं दो प्रतिशत पिलोकार्पीन वाले समूह में 69% प्रतिभागी तीन या उससे अधिक अतिरिक्त लाइनें पढ़ सके, जबकि तीन प्रतिशत पिलोकार्पीन वाले समूह में 84% प्रतिभागी तीन या उससे अधिक अतिरिक्त लाइनें पढ़ने में सफल रहे.

सुरक्षित और प्रभावी उपचार

हालांकि ड्रॉप्स के उपयोग से कुछ अस्थायी दुष्प्रभाव देखे गए जैसे - धुंधली दृष्टि, आंखों में जलन और सिरदर्द. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि ये समस्याएं क्षणिक थीं और उपचार के बाद धीरे-धीरे ठीक हो गईं. अध्ययन ने यह स्पष्ट किया कि आई ड्रॉप्स न केवल सुरक्षित हैं बल्कि दृष्टि सुधार के लिए एक प्रभावी और आसानी से सहन किया जाने वाला उपचार विकल्प भी हैं.

डॉ. बेनोज्जी का कहना है कि यह तरीका उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो चश्मे से परेशान हैं या सर्जरी करवाने में असमर्थ हैं. उन्होंने कहा, “हमने पाया कि इस उपचार से दृष्टि में सुधार स्थायी रूप से दो साल तक बना रहा.”

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

इस शोध के निष्कर्षों का स्वागत विशेषज्ञों ने किया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर व्यापक, दीर्घकालिक और बहु-केंद्रित अध्ययन की आवश्यकता है. कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि दवाओं की लंबे समय तक सुरक्षा, विशेषकर आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर और अधिक शोध की जरूरत है. डॉ. जियोवाना ने कहा, “यह अध्ययन आशाजनक है लेकिन हम इस दिशा में आगे बढ़ते हुए और अधिक डेटा इकट्ठा करेंगे ताकि इसे दुनिया भर में लागू किया जा सके.”

क्या चश्मा जल्द ही इतिहास बन जाएगा?

यह शोध विज्ञान की उस दिशा में बड़ा कदम है जो जीवनशैली को बेहतर बना सकता है. प्रेसबायोपिया से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए यह राहत की खबर है. यदि आगे के अध्ययन भी सकारात्मक रहे तो यह संभव है कि आने वाले वर्षों में चश्मे की जगह आई ड्रॉप्स ले लें. हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी आगाह किया है कि उपचार का हर व्यक्ति पर एक समान प्रभाव नहीं हो सकता और इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक होगा.

यह नई आई ड्रॉप्स चिकित्सा का एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती हैं. जहां वर्तमान समय में चश्मा और सर्जरी ही उपचार का मुख्य साधन हैं, वहीं यह ड्रॉप्स सरल, किफायती और सुरक्षित विकल्प बन सकती हैं. दृष्टि सुधार में मिले सकारात्मक परिणामों ने उम्मीद की किरण जगाई है. वैज्ञानिक अभी और शोध कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में यह संभव है कि पास देखने के लिए चश्मे की जरूरत ही खत्म हो जाए.

इस खोज से उन लोगों को राहत मिल सकती है जो उम्र के साथ आंखों की समस्या से जूझ रहे हैं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एक नए युग की तरफ अग्रसर हो चुका है.

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