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दूध में जिंदा मेंढक डालते थे लोग, मिल्क को कई दिनों तक ताजा रखने का ये जुगाड़ कर देगा हैरान

रूस और फिनलैंड के कुछ इलाकों में सदियों तक दूध को ताजा रखने के लिए उसमें जिंदा मेंढक डालते हैं. हालांकि, वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की, तो सामने आया कि मेंढक की स्किन में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद होते हैं, जो बैक्टीरिया की ग्रोथ को धीमा कर सकते हैं.

दूध में जिंदा मेंढक डालते थे लोग, मिल्क को कई दिनों तक ताजा रखने का ये जुगाड़ कर देगा हैरान
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यहां के लोग दूध को ताजा रखने के लिए मिल्क में डालते थे जिंदा मेढक

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत2 Mins Read

Updated on: 15 Jun 2026 5:54 PM IST

आज के दौर में दूध को ताजा रखने के लिए फ्रिज सबसे आसान उपाय माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब लोग दूध में जिंदा मेंढक डालकर उसे खराब होने से बचाते थे? सुनने में यह तरीका जितना अजीब लगता है, इसके पीछे की वजह उतनी ही हैरान करने वाली है.

सदियों पहले रूस और फिनलैंड जैसे देश के लोगों का मानना था कि मेंढक दूध को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने में मदद कर सकता है.दरअसल, वैज्ञानिकों ने भी बाद में पाया कि कुछ विशेष प्रजाति के मेंढकों की त्वचा से ऐसे प्राकृतिक तत्व निकलते हैं, जिनमें बैक्टीरिया को रोकने की क्षमता होती है.

दूध में मेंढक रखने की परंपरा

दरअसल रूस और फिनलैंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खासतौर पर ब्राउन फ्रॉग (Rana temporaria) का इस्तेमाल करते थे. इस मेंढक को कुछ समय के लिए दूध के बर्तन में रखा जाता था और बाद में सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता था. लोगों का मानना था कि इससे दूध जल्दी खराब नहीं होता है.

वैज्ञानिकों ने क्या खोजा?

साल 2012 में मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस अनोखी परंपरा पर स्टडी की. उनकी जांच में पता चला कि ब्राउन फ्रॉग (भूरे मेंढक) की त्वचा से कुछ खास प्राकृतिक तत्व निकलते हैं, जिन्हें एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स कहा जाता है. ये तत्व बैक्टीरिया और फंगस जैसे हानिकारक सूक्ष्मजीवों को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं. शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने मेंढक की त्वचा में 70 से ज्यादा ऐसे कंपाउंड की पहचान की, जिनमें कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता पाई गई. चूंकि यही माइक्रो ऑर्गेनिज्म दूध को खराब और खट्टा बनाते हैं, इसलिए माना जाता है कि पुराने समय में दूध में मेंढक डालने से वह लंबे समय तक ताजा बना रहता था.

कैसे ताजा रहता था दूध?

विशेषज्ञों का मानना है कि मेंढक की त्वचा से निकलने वाले ये प्राकृतिक तत्व दूध में मौजूद बैक्टीरिया की संख्या को कम करने में मदद करते थे. इससे दूध जल्दी खराब नहीं होता था और उसकी ताजगी कुछ समय तक बनी रहती थी. यही वजह हो सकती है कि यह तरीका पीढ़ियों तक इस्तेमाल किया जाता रहा. लेकिन विशेषज्ञ आज इस तरीके को अपनाने की सलाह नहीं देते हैं.

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