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जेल में ही सड़ेगा नीरव मोदी! लंदन कोर्ट ने माना- बेल से फिर भाग सकता है आरोपी

6498 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले में भारत को वांछित नीरव मोदी को लंदन हाईकोर्ट से फिर झटका लगा है. कोर्ट ने उसकी 10वीं जमानत याचिका खारिज कर दी. सीबीआई की दलीलों पर सहमति जताते हुए अदालत ने माना कि बेल मिलने पर नीरव दोबारा फरार हो सकता है. प्रत्यर्पण प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है.

जेल में ही सड़ेगा नीरव मोदी! लंदन कोर्ट ने माना- बेल से फिर भाग सकता है आरोपी
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार3 Mins Read

Updated on: 16 May 2025 6:56 AM IST

ब्रिटेन की लंदन हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी की 10वीं जमानत याचिका को एक बार फिर खारिज कर दिया है. यह फैसला भारत की सीबीआई और कानूनी टीम की ओर से पेश की गई मजबूत दलीलों के बाद आया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि नीरव मोदी को जमानत देने पर वह फिर फरार हो सकता है. अदालत ने भारत की आपत्तियों को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार किया.

इस सुनवाई में भारत सरकार की तरफ से क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) और सीबीआई की संयुक्त उपस्थिति ने अहम भूमिका निभाई. जांच अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों की टीम ने अदालत में साफ कहा कि नीरव मोदी की रिहाई से न केवल भारत की न्याय प्रक्रिया बाधित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी संतुलन पर भी असर पड़ेगा. अदालत ने यह माना कि बेल मिलने की स्थिति में नीरव दोबारा गायब हो सकता है, जैसा वह पहले कर चुका है.

प्रत्यर्पण की ओर बढ़ता भारत

नीरव मोदी 2019 से ब्रिटेन की जेल में है और 6498.20 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में भारत में वांछित है. उसे भारत में 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया जा चुका है. यूके की अदालत पहले ही उसके प्रत्यर्पण की कानूनी मंजूरी दे चुकी है. अब यह मामला केवल अंतिम औपचारिकताओं की ओर बढ़ रहा है, जहां भारत उसे देश वापस लाने के लिए पूर्ण कानूनी तैयारी कर चुका है.

चोकसी की गिरफ्तारी से बढ़ा दबाव

नीरव मोदी के मामले के समानांतर, उसका मामा और सह-अभियुक्त मेहुल चोकसी भी बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है. 12 अप्रैल को उसे एक अस्पताल से पकड़ा गया और अब भारत सरकार उसकी वापसी की कोशिशों में जुट गई है. CBI और ED ने मिलकर प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों भगोड़ों की घेराबंदी भारत की एजेंसियों की वैश्विक पकड़ को दर्शाती है.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि मजबूत

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ हो रही कार्रवाई केवल दो घोटालेबाजों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि यह भारत की न्याय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग की शक्ति का प्रमाण है. लंदन की अदालत का यह फैसला दिखाता है कि आर्थिक अपराधी अब विदेशों में भी सुरक्षित नहीं हैं और भारत उन्हें हर हाल में कानून के कटघरे तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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