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586 मौतें, 2400 लापता और फिर मंडरा रहा बड़ा खतरा! मना करने के बाद अब क्यों इंटरनेशनल मदद के लिए माना नेपाल? रखी बड़ी शर्त- Top Update

नेपाल और चीन में फ्लैश फ्लड से 586 लोगों की मौत और 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं. बढ़ते खतरे के बीच नेपाल ने इंटरनेशनल सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को सीमित मदद की मंजूरी दी है. जानें अब तक का अपडेट.

586 मौतें, 2400 लापता और फिर मंडरा रहा बड़ा खतरा! मना करने के बाद अब क्यों इंटरनेशनल मदद के लिए माना नेपाल? रखी बड़ी शर्त- Top Update
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नेपाल और चीन में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या शुक्रवार तक बढ़कर 586 हो गई है. इस आपदा में 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में बने अस्थिर बैरियर झीलों के कारण एक बार फिर बाढ़ का खतरा बना हुआ है.

दूसरी ओर नेपाल सरकार ने अब भोटेकोशी फ्लैश फ्लड प्रभावित इलाकों में इंटरनेशनल सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को सीमित रूप से प्रवेश देने का फैसला किया है. इससे पहले सरकार ने विदेशी बचाव दलों को अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन कई देशों के नागरिकों के लापता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर यह फैसला बदलना पड़ा.

आखिर नेपाल सरकार ने क्यों बदला फैसला?

नेपाल सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द काठमांडू पोस्ट से कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भारी दबाव बनाया गया था, क्योंकि कई देशों के नागरिक भी इस बाढ़ में लापता हैं. अधिकारी ने कहा, “हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भारी दबाव मिला कि कम से कम सर्च एंड रेस्क्यू टीमों और कुछ विशेषज्ञों को आने की अनुमति दी जाए, क्योंकि उनके नागरिक भी बाढ़ में लापता हैं. अब हम कुछ चुनिंदा इलाकों में सीमित संख्या में विशेषज्ञों को अनुमति दे रहे हैं.”

नेपाल सरकार ने बुधवार को कहा था कि उसके अपने राहत और बचाव दल स्थिति को संभालने में सक्षम हैं और विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है. हालांकि सिर्फ एक दिन बाद ही सरकार ने अपना फैसला बदलते हुए विशेष तकनीकी सहायता लेने का निर्णय कर लिया.

कौनसे देश नेपाल की करेंगे मदद?

अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ नेपाल पहुंचकर राहत कार्यों में सहयोग करेंगे.

किन कामों में मदद करेंगे विदेशी विशेषज्ञ?

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर एक अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति ने चार देशों की सहायता को मंजूरी दी है. भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ और तकनीशियन मुख्य रूप से सुरंगों में फंसे लोगों के रेस्क्यू ऑपरेशन, डीएनए टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच और शवों की पहचान कार्यों में मदद करेंगे. नेपाल सरकार ने साफ किया है कि विदेशी सहायता केवल विशेष तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित रहेगी.

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे कितनी तबाही?

फ्लैश फ्लड ने नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे कई गांवों और बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया. शुक्रवार तक नेपाल में मरने वालों की संख्या 579 दर्ज की गई, जबकि तिब्बत में 7 लोगों की मौत हुई. इस तरह दोनों देशों में कुल मौतों का आंकड़ा 586 पहुंच गया. नेपाल के आठ जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है.

नेपाल की आपदा एजेंसियों के अनुसार पहले 977 लोगों के लापता होने की जानकारी थी, लेकिन शुक्रवार को यह संख्या बढ़कर 1,924 हो गई. इसके अलावा तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 554 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. यानी नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 2,400 से ज्यादा लोग अभी तक लापता हैं.

इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है. नेपाल पर्यटन बोर्ड के ताजा रिकॉर्ड के अनुसार पहले 517 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी थी, जबकि बाद के अपडेट में यह संख्या कम से कम 540 तक पहुंच गई. इन विदेशी नागरिकों में बड़ी संख्या उन हिंदू श्रद्धालुओं की है जो कैलाश पर्वत की यात्रा पर जा रहे थे.

कितने देशों के नागरिक लापता?

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 31 देशों के नागरिक इस आपदा के बाद लापता हैं. विदेशी नागरिकों में सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक लापता हैं. लापता विदेशी नागरिकों का आंकड़ा इस प्रकार है-

  • भारतीय नागरिक- 178
  • अमेरिकी नागरिक- 65
  • यूक्रेनी नागरिक- 53
  • ऑस्ट्रेलियाई नागरिक- 35
  • ब्रिटिश नागरिक- 33

हालांकि नेपाल के बाद के आपदा आंकड़ों में विदेशी लापता लोगों की संख्या 540 बताई गई है, जबकि नेपाल पर्यटन बोर्ड के रिकॉर्ड में पहले 517 विदेशी नागरिकों का उल्लेख किया गया था.

ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़..

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार इस भीषण आपदा की शुरुआत एक ग्लेशियर के टूटने से हुई. ग्लेशियर के ढहने के बाद बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबे का विशाल सैलाब हिमालयी नदी तंत्र में तेजी से बह निकला. इस मलबे ने नदी घाटियों में भारी दबाव पैदा किया, जिसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में अचानक विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई.

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