पैकेट पर दिखेगा ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’ या ‘HIGH FAT’! SC की नाराज़गी के बाद FSSAI का बड़ा फैसला, 10 Points में समझें
पैकेज्ड फूड के पैकेट पर अब ‘HIGH SUGAR’, ‘HIGH SALT’ और ‘HIGH FAT’ जैसे चेतावनी लेबल दिख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की नाराज़गी के बाद FSSAI के प्रस्ताव में क्या है, जानें 10 Points में.
पैकेज्ड फूड को लेकर भारत में जल्द ही लेबलिंग के नियम और सख्त हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट की ओर से लंबे समय से चल रही रेगुलेटरी देरी पर कड़ी नाराजगी जताए जाने के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक यानी FoP चेतावनी लेबल अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत ऐसे पैकेज्ड फूड जिनमें तय सीमा से ज्यादा एडेड शुगर, सैचुरेटेड फैट और नमक होगा, उनके पैकेट के सामने लाल रंग के हेक्सागोन आकार में स्पष्ट चेतावनी दी जाएगी.
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में छह पन्नों का कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल कर प्रस्तावित लेबलिंग व्यवस्था का खाका पेश किया है. इसके मुताबिक ICMR-National Institute of Nutrition (NIN) की ओर से तय पोषक तत्वों की सीमा से अधिक वाले उत्पादों पर आसानी से दिखाई देने वाले चेतावनी लेबल लगाए जाएंगे. हालांकि, यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और अंतिम रूप से Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations में औपचारिक संशोधन के बाद ही प्रभावी होगी.
10 Points में जानें पूरा मामला
1. FSSAI ने पैकेज्ड फूड के फ्रंट पर स्पष्ट और आसानी से दिखाई देने वाला चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है. इसके लिए बोल्ड लाल रंग के हेक्सागोन आकार का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट खोलने या पीछे दिए गए जटिल न्यूट्रिशन टेबल को पढ़ने की जरूरत के बिना ही यह समझने में मदद करना है कि किसी खाद्य उत्पाद में किसी खास पोषक तत्व की मात्रा ज्यादा है.
2. प्रस्तावित व्यवस्था में खास तौर पर एडेड शुगर, सैचुरेटेड फैट और नमक की ज्यादा मात्रा वाले पैकेज्ड फूड पर चेतावनी दी जाएगी. जिन उत्पादों में इन पोषक तत्वों की मात्रा ICMR-NIN की ओर से तय सीमा से ज्यादा होगी, उन पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लगाने का प्रावधान होगा.
3. चेतावनी लेबल पर उपभोक्ताओं को सीधे बताया जाएगा कि उत्पाद में किस पोषक तत्व की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है. इसके लिए ‘HIGH FAT’, ‘HIGH SUGAR’ या ‘HIGH SALT’ जैसे स्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी उपभोक्ता को यह समझने के लिए न्यूट्रिशन टेबल में मौजूद आंकड़ों की व्याख्या नहीं करनी पड़ेगी कि उत्पाद में कौन सा पोषक तत्व ज्यादा है.
4. अगर किसी पैकेज्ड फूड में एक से ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से अधिक पाए जाते हैं, तो उस पर संयुक्त चेतावनी लगाई जाएगी. उदाहरण के तौर पर अगर किसी उत्पाद में फैट और शुगर दोनों की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है, तो उस पर ‘HIGH FAT HIGH SUGAR’ लिखा जाएगा. इसी तरह फैट और नमक की मात्रा ज्यादा होने पर ‘HIGH FAT HIGH SALT’ जैसी संयुक्त चेतावनी दी जाएगी.
5. शुगर वाली ड्रिंक्स के लिए अलग तरह का चेतावनी लेबल प्रस्तावित किया गया है. ऐसे पेय पदार्थों के पैकेट पर ‘HIGHLY SWEETENED BEVERAGE’ लिखा जाएगा. यानी मीठे पेय पदार्थों की पहचान के लिए एक अलग और स्पष्ट चेतावनी उपभोक्ताओं को दी जाएगी.
6. FSSAI ने चेतावनी लेबल की पठनीयता को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान प्रस्तावित किया है. लाल हेक्सागोन के अंदर लिखे जाने वाले शब्दों का फॉन्ट पैकेट के पीछे मौजूद न्यूट्रिशन इंफॉर्मेशन टेबल में इस्तेमाल किए गए फॉन्ट से कम से कम एक पॉइंट बड़ा होना चाहिए. इसका उद्देश्य चेतावनी को ज्यादा स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य बनाना है, ताकि उपभोक्ताओं को इसे देखने और समझने में परेशानी न हो.
7. प्रस्तावित चेतावनी व्यवस्था सभी खाद्य पदार्थों पर लागू नहीं होगी. सिंगल-इंग्रीडिएंट फूड और ऐसे खाद्य पदार्थ जो स्वाभाविक रूप से किसी खास पोषक तत्व से भरपूर होते हैं, उन्हें इस चेतावनी व्यवस्था से छूट दी जाएगी. इनमें दूध, घी, खाने के तेल, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पाद शामिल हैं.
8. FSSAI का यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट की उस कड़ी नाराजगी के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने चेतावनी लेबल लागू करने में देरी और लंबे समय से चल रही रेगुलेटरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. जस्टिस जेबी पार्डीवाला की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इंटरप्रेटिव यानी आसानी से समझ आने वाले चेतावनी लेबल को लागू करने में देरी पर FSSAI को कड़ी फटकार लगाई थी.
9. FSSAI ने खाद्य निर्माताओं को अपने उत्पादों में बदलाव करने और जरूरत पड़ने पर फॉर्मूलेशन में सुधार करने के लिए दो चरणों वाली व्यवस्था प्रस्तावित की है. फेज I में उन उत्पादों पर लाल चेतावनी लेबल अनिवार्य होगा, जिनमें तय सीमा से ज्यादा दो या उससे अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस चरण में ‘HIGHLY SWEETENED BEVERAGE’ वाली मीठे पेय पदार्थों की चेतावनी भी शामिल होगी.
10. प्रस्तावित FoP चेतावनी लेबलिंग व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी. इसके लिए Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations में औपचारिक संशोधन करना होगा. इन नियमों में जरूरी बदलाव किए जाने के बाद ही प्रस्तावित दिशानिर्देश आधिकारिक तौर पर प्रभावी होंगे.
FSSAI ने यह व्यवस्था इस तरह तैयार करने का प्रस्ताव दिया है कि खाद्य निर्माताओं को अपने उत्पादों में बदलाव या रीफॉर्मुलेशन के लिए पर्याप्त समय मिल सके, लेकिन इसके साथ ही उपभोक्ताओं को पोषण से जुड़े संभावित जोखिमों की स्पष्ट जानकारी मिलने में अनावश्यक देरी न हो.




