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65 अरब बैरल तेल…55% कंट्रोल…100 साल की डील! ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल लेकर कौनसा बड़ा दांव चल दिया? Detail

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ बड़ा तेल समझौता किया है. 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार, 55% कंट्रोल और 100 साल की डील के क्या हैं मायने? जानें पूरी कहानी.

65 अरब बैरल तेल…55% कंट्रोल…100 साल की डील! ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल लेकर कौनसा बड़ा दांव चल दिया? Detail
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते पर हस्ताक्षर किए. ट्रंप ने इसे “दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा” बताया. उनके मुताबिक, इस समझौते से अमेरिका को वेनेजुएला के कच्चे तेल तक ज्यादा पहुंच मिलेगी, तेल की सप्लाई बढ़ेगी और आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतें कम हो सकती हैं.

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण हासिल कर लिया है. यह समझौता वेनेजुएला की सरकार और निजी कंपनियों के बीच साझेदारी के जरिए हुआ है.

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि उनके निर्देश पर विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ मिलकर और निजी कारोबार के साथ साझेदारी के जरिए वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा प्रमाणित तेल भंडार पर अमेरिका का बहुमत नियंत्रण हासिल किया है. ट्रंप ने कहा कि इसके लिए अमेरिकी करदाताओं को कोई पैसा नहीं देना पड़ा.

ट्रंप ने इसे अमेरिका की ऊर्जा सप्लाई के लिए बड़ा बढ़ावा बताया. उन्होंने दावा किया कि इस समझौते से अमेरिका के तेल भंडार में “दोगुने से भी ज्यादा” बढ़ोतरी होगी और गैस की कीमतें कम करने में मदद मिलेगी.

वेनेजुएला ने क्या कहा?

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भी इस समझौते का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इससे वेनेजुएला के सरकारी खजाने को बड़ी मात्रा में राजस्व मिलेगा. रोड्रिगेज के मुताबिक, इस समझौते से वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा. इस निवेश का मुख्य उद्देश्य देश के तेल उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और उसे बेहतर बनाना होगा.

उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों की मदद से देश में तेल उत्पादन बढ़ाया जाएगा. इसके तहत 17 प्रमुख तेल क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा. इन क्षेत्रों में करीब 65 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार मौजूद है. इन परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आने की उम्मीद है. इसके अलावा, इनसे वेनेजुएला को 209 अरब डॉलर से ज्यादा का टैक्स मिलने की उम्मीद जताई गई है.

रोड्रिगेज ने कहा कि वेनेजुएला अपने विशाल तेल भंडार का इस्तेमाल एक बड़ा ऊर्जा उत्पादक देश बनने के लिए करना चाहता है. इससे रोजगार पैदा करने, कर्मचारियों की आय बढ़ाने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अब अपने लोगों के लिए रिकवरी, विकास, उत्पादन, सुरक्षा और समृद्धि के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है.

अमेरिका का तेल उत्पाद में कितना हिस्सा?

  • व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, इस समझौते के तहत एक नई निजी ज्वाइंट वेंचर कंपनी वेनेजुएला में तेल का उत्पादन करेगी. इसमें अमेरिका को प्रभावी रूप से 55 फीसदी हिस्सेदारी मिलेगी. यह नई कंपनी तेल भंडार के मामले में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी निजी तेल कंपनी बनने की उम्मीद है.
  • अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी समर्थन के साथ डेल्सी रोड्रिगेज ने इस निजी कंपनी को तेल क्षेत्रों के संचालन के लिए 100 साल की रियायत दी है. इस संयुक्त कंपनी का संचालन वेनेजुएला में अमेरिकी सरकार और एक निजी ऑपरेटर मिलकर करेंगे.
  • अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने इस नई तेल कंपनी की आधे से ज्यादा वैल्यू हासिल कर ली है. इसमें कंपनी में हिस्सेदारी के साथ-साथ लागत मूल्य पर तेल की खरीद की गारंटी भी शामिल है.
  • अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने इस नई तेल कंपनी की आधे से ज्यादा कीमत पर नियंत्रण हासिल किया है. इसमें इक्विटी हिस्सेदारी और लागत मूल्य पर तेल की गारंटीड खरीद दोनों शामिल हैं.
  • अधिकारी के मुताबिक, इस समझौते से पैदा होने वाला तेल अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को फिर से भरने और अमेरिकी सेना की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा.

क्यों अहम है वेनेज़ुएला सौदा?

अमेरिका और ईरान के बीच छह महीने से चल रहे युद्ध ने दुनिया में तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही पर इसका बड़ा असर पड़ा है. होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की करीब 20 फीसदी ऊर्जा सप्लाई इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी.

लेकिन लड़ाई और समुद्री जहाजों पर लगी पाबंदियों के कारण इस रास्ते से आवाजाही काफी कम हो गई. इसके बाद तेल उत्पादकों, कारोबारियों और सरकारों को तेल की वैकल्पिक सप्लाई तलाशनी पड़ रही है. रॉयटर्स की पिछले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन में सिर्फ सात कमोडिटी जहाज इस जलमार्ग से होकर गुजरे. ऐसे हालात में वेनेजुएला अमेरिका के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गया है.

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है. ऐसे में वहां के तेल तक अमेरिका की बढ़ी हुई पहुंच उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद बदले अमेरिका से रिश्ते..

अमेरिका और वेनेजुएला के मौजूदा रिश्तों में बदलाव इसी साल की शुरुआत में कराकास में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद आया. 3 जनवरी को अमेरिकी सेना वेनेजुएला में दाखिल हुई और तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया. इसके बाद मादुरो को अमेरिका ले जाया गया, जहां उन्हें कथित तौर पर नार्को-टेररिज्म और कोकीन तस्करी की साजिश में शामिल होने के आरोपों का सामना करना पड़ा.

मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद कराकास में सत्ता का संकट पैदा हो गया. इसके बाद उनके पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने 5 जनवरी को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. शुरुआत में ट्रंप ने रोड्रिगेज के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था. कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने वॉशिंगटन के साथ सहयोग नहीं किया तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

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