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हां, भाई आ गया मज़ा! Middle East में लगी आग की ताप अमेरिका और Israel तक, ऐसे जल रहे महंगाई में

मिडिल ईस्ट युद्ध का महंगाई पर बड़ा असर पड़ा है. जानें अमेरिका और इजराइल में कितनी बढ़ी महंगाई, तेल कीमतों और ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या पड़ा प्रभाव. क्या कहती है IMF और OECD की रिपोर्ट.

Middle East War US vs Israel Inflation
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( Image Source:  Sora AI )

मिडिल ईस्ट में जारी जंग खासतौर पर पहले Gaza Strip में युद्ध और अब Iran-Israel के बीच बढ़ते तनाव, अब केवल सैन्य या कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बन चुका है. तेल सप्लाई, शिपिंग रूट और निवेश माहौल पर असर के कारण महंगाई एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है. वॉर की आग का असर अमेरिका और Israel तक पहुंचने के बाद पूरी दुनिया पर भी अब इसका असर दिखने लगा है. अहम सवाल यह है कि क्या मिडिल ईस्ट का युद्ध सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष है या ग्लोबल महंगाई का ट्रिगर भी है?

युद्ध से पहले अमेरिका और इजराइल में महंगाई की स्थिति?

सितंबर 2023 के आसपास अमेरिका में में महंगाई करीब 3.7% और इजराइल में लगभग 3.8% थी. दोनों ही अर्थव्यवस्थाएं स्थिर थीं और महंगाई को नियंत्रण में माना जा रहा था. अमेरिका कोविड और Russia-Ukraine War के बाद रिकवरी के रास्ते पर था, जबकि इजराइल की टेक-ड्रिवन अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी.

युद्ध शुरू होते ही किसे लगा पहला झटका?

अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होते ही सबसे बड़ा असर इजराइल पर पड़ा. सप्लाई चेन टूट गई, लाखों रिजर्व सैनिकों को बुलाया गया और श्रम की कमी पैदा हो गई. इसका नतीजा यह हुआ कि महंगाई तेजी से बढ़कर 4.5 से करीब 6% तक पहुंच गई. दूसरी ओर अमेरिका पर असर अप्रत्यक्ष था तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी के कारण महंगाई हल्की बढ़कर करीब 4% के आसपास पहुंची.

एक साल के भीतर महंगाई का असली ट्रेंड क्या रहा?

2024–2025 के दौरान तस्वीर और साफ हुई. इजराइल में महंगाई 5 दसे 6% तक पहुंच गई और कुछ समय के लिए 6% से ऊपर भी चली गई. रक्षा खर्च में तेज वृद्धि, टूरिज्म में गिरावट और सप्लाई चेन संकट ने इसे “स्ट्रक्चरल महंगाई” बना दिया. वहीं अमेरिका में महंगाई 3.2 से 4% के बीच बनी रही. तेल कीमतों का दबाव जरूर था, लेकिन मजबूत डॉलर और विविध अर्थव्यवस्था ने इसे नियंत्रित रखा.

क्या 2026 में महंगाई और बढ़ने वाली है?

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे OECD ने चेतावनी दी है कि 2026 में अमेरिका में महंगाई 4.2% तक पहुंच सकती है. इसका मुख्य कारण ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल है. वहीं इजराइल के लिए स्थिति और गंभीर है, जहां सैन्य खर्च, व्यापार में रुकावट और बुनियादी ढांचे के नुकसान ने आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है.

तेल की कीमतों ने कैसे बढ़ाया संकट?

मिडिल ईस्ट युद्ध का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जो कुछ समय पहले तक लगभग $60–70 के आसपास थीं. Strait of Hormuz पर खतरे की आशंका ने सप्लाई को लेकर डर पैदा किया है, जिससे कीमतों में 40–50% तक उछाल देखा गया.

इजराइल को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों हुआ?

इजराइल इस संघर्ष का सीधा केंद्र है, इसलिए उसे सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. युद्ध पर अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं, पर्यटन लगभग ठप हो गया है और बड़ी संख्या में लोग सेना में शामिल होने के कारण श्रम बाजार प्रभावित हुआ है. अनुमान है कि अब तक संघर्ष की सीधी लागत 6 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है. इन सभी कारणों ने महंगाई के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि को भी कमजोर किया है.

अमेरिका क्यों बचा रहा बड़े झटके से?

अमेरिका पर असर सीमित रहा क्योंकि वह युद्ध का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है. हालांकि, उसे महंगे तेल और उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा, लेकिन वह खुद भी बड़ा तेल उत्पादक है. इससे उसे कुछ हद तक संतुलन मिल जाता है. इसके अलावा, उसकी बड़ी और विविध अर्थव्यवस्था, मजबूत डॉलर और वित्तीय प्रणाली ने महंगाई के झटके को नियंत्रित रखा.

क्या यह संकट सिर्फ US और इजराइल तक सीमित है?

ऐसा नहीं है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट से तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई बाधित होती रही, तो पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा. यूरोप में गैस कीमतें पहले ही दोगुनी हो चुकी हैं और ब्रिटेन जैसे देशों में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?

मिडिल ईस्ट वॉर ने पूरी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ा दी है. ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, शेयर बाजार में अस्थिरता और बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है. इजराइल में यह असर सबसे ज्यादा है, जहां रोजमर्रा की जिंदगी महंगी हो गई है. अमेरिका में भी उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन और ग्रोसरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बाकी दुनिया में यह असर धीरे-धीरे फैल रहा है.

किसे लगा सबसे बड़ा झटका?

मिडिल ईस्ट युद्ध ने महंगाई को ग्लोबल संकट में बदल दिया है. इजराइल को सबसे ज्यादा और सीधा नुकसान हुआ है, जहां महंगाई और आर्थिक दबाव दोनों चरम पर हैं. अमेरिका पर असर अपेक्षाकृत कम और नियंत्रित रहा है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है. अगर तनाव और बढ़ता है, तो यह संकट आने वाले समय में और गहरा सकता है.

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