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क्या है आर्टिकल 5, जिसके चलते फिर अमेरिका-ईरान में छिड़ी जंग; जानें कब और कहां है अगली मीटिंग

सीजफायर होने के बावजूद भी अमेरिका और ईरान के बीच जंग देखने को मिली. जिसका कारण आर्टिकल 5 को बताया जा रहा है. हालांकि अब एकबार फिर से दोनों देशों के बीच हमले न करने पर सहमति बन गई है.

क्या है आर्टिकल 5, जिसके चलते फिर अमेरिका-ईरान में छिड़ी जंग; जानें कब और कहां है अगली मीटिंग
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( Image Source:  X/@DailyIranNews )

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों ने फिलहाल हमले रोकने पर सहमति जताई है. अब उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच अगली अहम बातचीत कतर में हो सकती है. इस बीच, दोनों देशों के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का आर्टिकल 5 सबसे बड़ा विवाद का विषय बनकर सामने आया है.

दरअसल, 17 जून को पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था. हालांकि, समझौते के कुछ ही दिनों बाद फारस की खाड़ी में एक-दूसरे पर हमले होने लगे, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस MoU के आर्टिकल 5 में ऐसा क्या है, जिस पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं.

क्या है आर्टिकल 5 और क्यों है इतना अहम?

आर्टिकल 5 का संबंध दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से है. सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक स्तर पर तेल और लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरती है. ऐसे में इस मार्ग की सुरक्षा और संचालन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जाता है. समझौते के अनुसार, ईरान ने 60 दिनों तक बिना किसी ट्रांजिट शुल्क के व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा देने का वादा किया था.

साथ ही, 30 दिनों के भीतर समुद्री माइंस और अन्य सैन्य एवं तकनीकी बाधाओं को हटाकर शिपिंग गतिविधियों को सामान्य करने पर भी सहमति बनी थी. MoU के तहत यह भी तय किया गया कि ईरान, ओमान और खाड़ी क्षेत्र के अन्य तटीय देशों के साथ मिलकर भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन, प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर बातचीत करेगा. इसमें अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तटीय देशों के अधिकारों का सम्मान करने की भी बात कही गई है. हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद दोनों देश इसके लागू होने की प्रक्रिया पर एकमत नहीं हैं.

क्या है असली विवाद?

ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और उसके संचालन की जिम्मेदारी पूरी तरह उसके अधिकार क्षेत्र में आती है. तेहरान चाहता है कि सभी व्यावसायिक जहाज ईरानी तट के पास स्थित उत्तरी शिपिंग कॉरिडोर का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही उसने ओमान के पास वैकल्पिक समुद्री मार्ग विकसित करने की कोशिशों का विरोध भी किया है.

दूसरी ओर, हाल के दिनों में कई व्यापारिक जहाजों ने ईरान द्वारा सुझाए गए मार्ग की बजाय ओमान के तट से होकर गुजरने वाले दक्षिणी समुद्री रास्ते को चुना. ईरान का आरोप है कि ऐसा करना MoU की भावना के खिलाफ है और इससे जलडमरूमध्य को पूरी तरह सामान्य बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

अमेरिका का क्या है रुख?

अमेरिका का मानना है कि किसी एक देश की एकतरफा निगरानी स्वीकार नहीं की जा सकती. व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित और वैकल्पिक समुद्री मार्ग चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार बिना किसी रुकावट के जारी रह सके.

समझौते के बाद भी क्यों बढ़ा तनाव?

समझौते के कुछ ही समय बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में कई व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए. अमेरिका ने इन घटनाओं के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की. जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इन घटनाओं के बाद कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने अपना समुद्री मार्ग बदल दिया या यात्रा बीच में ही रोक दी, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ा. ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का उल्लंघन करार दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया.

अब कहां होगी अगली बातचीत?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश फिलहाल एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं. रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी विवाद के समाधान के लिए मंगलवार को कतर में दोनों पक्षों के बीच नई वार्ता हो सकती है.

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