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पानी बनेगा भारत का नया हथियार! चीन, Pakistan और बांग्लादेश के लिए क्या है Water Security Strategy का मतलब?

भारत की Water Security Strategy क्या है? जानिए सिंधु जल संधि, ब्रह्मपुत्र, गंगा और तीस्ता विवाद, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश पर इसका असर और भारत की जल कूटनीति.

पानी बनेगा भारत का नया हथियार! चीन, Pakistan और बांग्लादेश के लिए क्या है Water Security Strategy का मतलब?
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दक्षिण एशिया में अब सिर्फ सीमाएं ही नहीं, नदियां भी स्ट्रेटजिक पॉवर का बड़ा आधार बनती जा रही हैं. सिंधु, ब्रह्मपुत्र, गंगा और तीस्ता जैसी अंतरराष्ट्रीय नदियां भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कूटनीति, सुरक्षा और आर्थिक हितों का केंद्र बन चुकी हैं. एक ओर पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर तनाव बढ़ा है, दूसरी ओर चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र पर विशाल बांध बना रहा है, जबकि बांग्लादेश के साथ तीस्ता जल बंटवारा और गंगा जल समझौते जैसे मुद्दे अब भी चर्चा में हैं.

finsindia.Org, theconversation.com और orcasia.org के मुताबिक, ऐसे समय में भारत अपनी Water Security Strategy को नए सिरे से मजबूत कर रहा है. इसका मकसद किसी देश का पानी रोकना नहीं, बल्कि अपने वैध जल अधिकारों का अधिकतम उपयोग, जल भंडारण क्षमता बढ़ाना, सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं को गति देना तथा जल कूटनीति के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों को मजबूत करना है. भारत के इस रुख पर पाकिस्तान इतना नाराज है कि उसने इंडिया को युद्ध की धमकी तक दे दी है. समझें वॉटर स्ट्रेटजी भारत के लिए कैसे बन सकता है दक्षिण एशिया की राजनीति में नया हथियार.

हर बूंद रणनीतिक ताकत कैसे?

21वीं सदी में दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाइयां केवल जमीन, तेल या गैस को लेकर नहीं होंगी, बल्कि पानी भी वैश्विक रणनीति का सबसे अहम हथियार बनता जा रहा है. दुनिया के कई देशों ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में जल सुरक्षा (Water Security) को प्रमुख स्थान देना शुरू कर दिया है. भारत भी अब इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि भारत की नई Water Security Strategy का मतलब किसी पड़ोसी देश का पानी रोक देना नहीं है, बल्कि अपने हिस्से के पानी का पूरा और प्रभावी उपयोग करना, जल भंडारण बढ़ाना, सिंचाई क्षमता मजबूत करना, बिजली उत्पादन बढ़ाना और सीमा पार जल संसाधनों को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप इस्तेमाल करना है.

भारत की इस रणनीति का सबसे ज्यादा असर तीन पड़ोसी देशों (चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश) पर पड़ सकता है. हालांकि तीनों देशों के साथ भारत की स्थिति अलग-अलग है. चीन के मामले में भारत खुद डाउनस्ट्रीम देश है, पाकिस्तान के मामले में भारत अपस्ट्रीम स्थिति में है, जबकि बांग्लादेश के साथ भारत की नीति प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग पर आधारित रही है. इसलिए Water Security Strategy का प्रभाव भी तीनों देशों पर अलग-अलग दिखाई देगा.

Water Security Strategy होती क्या है?

आम भाषा में समझें तो Water Security Strategy का मतलब है कि कोई देश अपने हिस्से के पानी का अधिकतम और सुरक्षित उपयोग करे, ताकि भविष्य में खेती, पीने के पानी, उद्योग, बिजली उत्पादन और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई संकट न आए.

इस रणनीति में बड़े बांध, जलाशय, जलविद्युत परियोजनाएं, वर्षा जल संचयन, नदी जोड़ो परियोजनाएं, बाढ़ नियंत्रण, भूजल संरक्षण और सीमा पार नदियों के बेहतर प्रबंधन जैसे कदम शामिल होते हैं. इसका उद्देश्य किसी दूसरे देश को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होता है.

भारत को Water Strategy अपनाने की जरूरत क्यों?

भारत तेजी से बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, घटते भूजल स्तर और बढ़ती जल मांग जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. दूसरी ओर चीन तिब्बत में लगातार बड़े बांध बना रहा है. पाकिस्तान बार-बार जल विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता है और बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी का मसला वर्षों से लंबित है.

ऐसे में भारत ने यह महसूस किया कि अब केवल जल समझौतों पर निर्भर रहने के बजाय अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करना जरूरी है. यही Water Security Strategy का मूल उद्देश्य है.

तिब्बत से लगते भारतीय सीमा पर ब्रह्मपुत्र चीनी डैम

चीन: जहां से भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती शुरू होती है

तीनों पड़ोसियों में सबसे अलग स्थिति चीन के साथ है. ब्रह्मपुत्र (यारलुंग त्सांगपो) और सतलुज जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम तिब्बत में है. यानी चीन इन नदियों का ऊपरी (Upper Riparian) देश है, जबकि भारत नीचे स्थित (Downstream) देश है.

विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी कुल जल आवश्यकताओं का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ऐसे नदी तंत्रों से प्राप्त करता है, जिनका स्रोत चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र में है. हालांकि ब्रह्मपुत्र का लगभग 60 प्रतिशत जल भारत के अपने जलग्रहण क्षेत्र से आता है, जबकि करीब 40 प्रतिशत प्रवाह तिब्बत से आता है.

यही वजह है कि जब भी चीन ब्रह्मपुत्र पर बड़े बांध या हाइड्रोपावर परियोजनाओं की घोषणा करता है, भारत की चिंता बढ़ जाती है. भारत अब अरुणाचल प्रदेश और असम में अपनी जलविद्युत तथा स्टोरेज परियोजनाओं को तेज कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.

PAK पर सबसे ज्यादा क्यों पड़ेगा असर?

यदि किसी एक देश पर भारत की Water Security Strategy का सबसे बड़ा प्रभाव पड़ सकता है तो वह पाकिस्तान है.

पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. उसकी करीब 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी जल प्रणाली से जुड़ी हुई है. सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी नदियां भारत से होकर पाकिस्तान पहुंचती हैं.

1960 की सिंधु जल संधि ने दोनों देशों के अधिकार तय किए थे. लेकिन भारत लंबे समय तक अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग नहीं कर पाया. अब भारत अपने वैध अधिकारों के तहत बांध, जलाशय और जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. बगलिहार, किशनगंगा, रतले, पाकल दुल और अन्य परियोजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा मानी जाती हैं.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय लेकर स्पष्ट संकेत दिया कि आतंकवाद और सामान्य जल सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते. इसके बाद पाकिस्तान में जल सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई.

पाकिस्तान को सबसे बड़ा डर यह है कि भारत यदि अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करने लगे, तो सिंचाई के लिए उपलब्ध जल कम हो सकता है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून भारत को संधि के दायरे में रहते हुए अपने हिस्से का पानी उपयोग करने का अधिकार देता है.

भारत बांग्लादेश सीमा पर तिस्ता बैराज

बांग्लादेश क्यों चिंतित है?

बांग्लादेश की स्थिति पाकिस्तान से अलग है. वह भारत के साथ 54 साझा नदियों पर निर्भर है. गंगा, तीस्ता, ब्रह्मपुत्र और बराक जैसी नदियां उसके लिए जीवनरेखा हैं.

1996 की गंगा जल संधि ने दोनों देशों के बीच सहयोग का रास्ता बनाया था. लेकिन तीस्ता जल बंटवारा आज भी लंबित है. बांग्लादेश को आशंका रहती है कि यदि भारत अपने हिस्से के पानी का अधिक उपयोग करेगा तो उसके उत्तरी क्षेत्रों में खेती और पेयजल प्रभावित हो सकता है.

इसी कारण बांग्लादेश तीस्ता परियोजना में चीन की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश भी करता रहा है. हालांकि भारत की नीति बांग्लादेश के साथ टकराव नहीं बल्कि सहयोग और साझा विकास की रही है.

किन नदियों पर टिकी है पूरी रणनीति?

भारत की Water Security Strategy मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली, गंगा, ब्रह्मपुत्र, तीस्ता, बराक, सतलुज, रावी, ब्यास, झेलम और चिनाब जैसी सीमा पार नदियों पर केंद्रित है. इन नदियों पर बनने वाले जलाशय केवल बिजली उत्पादन के लिए नहीं बल्कि बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक उपयोग और सामरिक जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं.

क्या होता है Water Diplomacy?

Water Diplomacy का मतलब पानी से युद्ध करना नहीं बल्कि पानी के जरिए कूटनीतिक संतुलन बनाना है. जब दो या अधिक देश किसी नदी को साझा करते हैं तो जल बंटवारा, बाढ़ की सूचना, जल प्रवाह का डेटा, बांध निर्माण और नदी प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बातचीत होती है. इसी प्रक्रिया को Water Diplomacy कहा जाता है.

भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि, बांग्लादेश के साथ गंगा जल समझौता और चीन के साथ सीमित हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने जैसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं.

PAK और बांग्लादेश के लिए भारत की Strategy चिंता का विषय क्यों?

भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को स्थगित करने का फैसला किया और स्पष्ट किया कि वह अब संधि के तहत अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग करेगा. इसी रणनीति के तहत चिनाब और झेलम जैसी नदियों पर बगलिहार, किशनगंगा, रतले और पाकल दुल जैसी जलविद्युत एवं जल प्रबंधन परियोजनाओं को तेज किया जा रहा है.

पाकिस्तान को आशंका है कि भारत अपने वैध जल अधिकारों का पूरी क्षमता से उपयोग करने के लिए बड़े पैमाने पर जल भंडारण और जल प्रबंधन परियोजनाएं विकसित करेगा. इससे सिंधु बेसिन में पानी के प्रवाह के समय और मात्रा पर असर पड़ सकता है, जो उसकी सिंचाई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत किसी नदी का प्रवाह पूरी तरह रोक नहीं सकता, लेकिन अपने हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग अवश्य कर सकता है.

दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौते की समीक्षा का समय नजदीक है, जबकि तीस्ता जल बंटवारा का मुद्दा अब भी लंबित है. बांग्लादेश को चिंता है कि यदि भारत ऊपरी धारा में जल भंडारण और सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार करता है, तो शुष्क मौसम में उसे मिलने वाले पानी पर असर पड़ सकता है. इसी कारण ढाका ने तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना में चीन की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं.

पाक से लगती सीमाई क्षेत्र में भारतीय किशनगंगा जल विद्युत परियोजना

पाकिस्तान ने युद्ध की चेतावनी क्यों दी?

पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत कृषि और उसकी बड़ी आबादी की जल आवश्यकताएं सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं. इसलिए भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने, अपने हिस्से के पानी के अधिक उपयोग की नीति अपनाने और नई जलविद्युत परियोजनाओं को गति देने से इस्लामाबाद की चिंताएं बढ़ गई हैं.

पाकिस्तान के कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने भारत की इस नीति को अपनी जल सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भी चेतावनी दी थी कि यदि उसके वैध जल अधिकारों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई, तो वह इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानेगा. हालांकि भारत का आधिकारिक रुख यही है कि वह अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और अपने वैध अधिकारों के दायरे में रहते हुए केवल अपने हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहता है.

भारत को क्या होगा फायदा?

  • भारत यदि अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग करता है तो इससे कई बड़े फायदे होंगे.
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सिंचाई का विस्तार होगा. जलविद्युत उत्पादन बढ़ेगा. उत्तर भारत में जल भंडारण क्षमता मजबूत होगी. बाढ़ और सूखे के प्रबंधन में सुधार आएगा. कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि भारत अपने वैध जल अधिकारों का उपयोग करके रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकेगा.

क्या पानी सचमुच हथियार बन सकता है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक दौर में पानी को बंदूक या मिसाइल की तरह हथियार नहीं बनाया जा सकता. अंतरराष्ट्रीय कानून और जल संधियां इसकी अनुमति नहीं देतीं.

लेकिन अपने हिस्से के पानी का वैज्ञानिक उपयोग, बड़े जलाशयों का निर्माण, जलविद्युत परियोजनाएं, बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन किसी भी देश की रणनीतिक शक्ति जरूर बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि Water Security को अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माना जा रहा है.

किस देश को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है?

  • तीनों पड़ोसियों में पाकिस्तान सबसे अधिक संवेदनशील है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है. भारत द्वारा अपने हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है.
  • बांग्लादेश पर प्रभाव सीमित लेकिन महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए वहां सहयोग की नीति अधिक प्रभावी मानी जाती है.
  • चीन के मामले में भारत की स्थिति अलग है, क्योंकि वहां चीन ऊपरी धारा पर स्थित है. इसलिए भारत की प्राथमिकता चीन के खिलाफ जल रोकना नहीं बल्कि अपनी जल सुरक्षा मजबूत करना है.

सरकार की Water Security Strategy कितनी प्रभावी?

PIB की ओर से जारी बयान के अनुसार घरेलू स्तर पर मोदी सरकार ने जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष जोर दिया है. जल शक्ति मंत्रालय के गठन के बाद जल जीवन मिशन, कैच द रेन अभियान, अटल भूजल योजना और जल संरक्षण से जुड़ी कई पहल शुरू की गईं. इन योजनाओं के तहत करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया, जबकि देशभर में बड़ी संख्या में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) संरचनाएं विकसित की गईं. सरकार का दावा है कि इन पहलों से भूजल संरक्षण, सिंचाई क्षमता और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिली है.

सीमा-पार नदियों के मामले में भारत की नीति जल कूटनीति (Water Diplomacy) और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने की रही है. पाकिस्तान के साथ संबंधों में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के जल का अधिकतम और वैध उपयोग करेगा. इसके लिए चिनाब और झेलम बेसिन में जलविद्युत तथा जल प्रबंधन परियोजनाओं को गति दी जा रही है. दूसरी ओर, बांग्लादेश के साथ गंगा और तीस्ता जैसे मुद्दों पर वार्ता जारी है, जबकि चीन के संदर्भ में ब्रह्मपुत्र बेसिन में जल सुरक्षा, निगरानी और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की Water Security Strategy केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा, कृषि और क्षेत्रीय कूटनीति का भी महत्वपूर्ण आधार बनेगी.

दरअसल, भारत की Water Strategy का मकसद किसी देश को प्यासा बनाना नहीं, बल्कि हर बूंद पानी को राष्ट्रीय संपत्ति मानकर उसका अधिकतम उपयोग करना है. बदलते वैश्विक माहौल में पानी अब केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि रणनीतिक शक्ति, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन चुका है. आने वाले वर्षों में भारत की जल नीति दक्षिण एशिया की राजनीति, कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकती है. यही कारण है कि Water Security को भविष्य के भारत की सबसे महत्वपूर्ण नीतियों में से एक माना जा रहा है.

स्टेट मिरर स्पेशल
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