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फिलिस्तीनियों पर अभी कितना और बरसेगा इजराइल का कहर, अब मौत की सजा तक देगा; नेताओं ने ऐसे मनाया कानून का जश्न

इज़राइल ने नया कानून पास कर फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मौत की सजा को डिफॉल्ट सज़ा बना दिया है. इस फैसले पर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है, वहीं इज़राइली नेताओं ने इसे जश्न के साथ शक्ति का प्रतीक बताया है.

फिलिस्तीनियों पर अभी कितना और बरसेगा इजराइल का कहर, अब मौत की सजा तक देगा; नेताओं ने ऐसे मनाया कानून का जश्न
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( Image Source:  AI SORA )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी3 Mins Read

Updated on: 31 March 2026 5:56 PM IST

इजराइल ने एक ऐसा कानून पास कर दिया है, जिसने इंटरनेशनल लेवल पर बहस और चिंता दोनों को तेज कर दिया है. नए प्रावधान के तहत फिलिस्तीनियों द्वारा इजराइलियों की हत्या के मामलों में मौत की सजा को डिफॉल्ट सजा बना दिया गया है. इस फैसले के बाद जहां एक ओर सत्ताधारी खेमे में जश्न का माहौल दिखा, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर यूरोपियन यूनियन समेत कई देशों ने कड़ी आपत्ति जताई है.

यह कानून ऐसे समय आया है जब पहले से ही पश्चिमी तट (West Bank) और गाजा को लेकर तनाव चरम पर है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह कदम क्षेत्र में और अस्थिरता बढ़ा सकता है और न्याय के सिद्धांतों पर भी सवाल खड़े कर सकता है.

क्या कहता है नया कानून?

इस कानून के तहत अगर कोई फिलिस्तीनी 'राष्ट्रवादी मंशा' के तहत किसी इजराइली की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे मौत की सजा देना अनिवार्य माना जाएगा. हालांकि कागजों में यह प्रावधान इजराइली नागरिकों पर भी लागू हो सकता है, लेकिन भाषा और प्रक्रिया ऐसी रखी गई है कि इसका असर मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों पर ही पड़ेगा.

आलोचकों का कहना है कि यह कानून एक खास समुदाय को निशाना बनाता है. समान अपराध के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान इसे 'भेदभावपूर्ण' बनाता है. यही वजह है कि कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नेताओं ने इसे न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया है.

यूरोपियन यूनियन ने क्या कहा?

यूरोपियन यूनियन ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंता जताई है. एक प्रवक्ता ने कहा,"यह एक स्पष्ट रूप से पीछे की ओर उठाया गया कदम है," साथ ही उन्होंने इजराइल से अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करने की अपील की.

कानून पास होने के दौरान कैसा था माहौल?

इजराइली संसद में इस बिल को लेकर लंबी बहस चली, लेकिन आखिरकार 62-48 वोटों से यह पास हो गया. इसके बाद सत्ताधारी दल के सांसदों ने खुशी जाहिर की. कुछ नेताओं ने तो संसद के भीतर जश्न भी मनाया, जिससे विवाद और बढ़ गया.

नेतन्याहू सरकार के सहयोगी क्या कहते हैं?

कानून को आगे बढ़ाने वाले नेताओं का मानना है कि यह सख्ती जरूरी थी. उनका कहना है कि इससे “आतंकवाद पर लगाम लगेगी” और एक मजबूत संदेश जाएगा. एक नेता ने कहा कि 'आज से हर आतंकी जान जाएगा, और पूरी दुनिया जान जाएगी कि जो किसी की जान लेगा, इज़राइल राज्य उसकी जान लेगा।"

क्या इस कानून को कानूनी चुनौती मिलेगी?

इस कानून के खिलाफ तुरंत कानूनी चुनौती भी दायर कर दी गई है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कानून न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि इजराइल के अधिकार क्षेत्र से बाहर के इलाके (West Bank) पर लागू करना भी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है.

इतिहास में इजराइल ने कितनी बार दी है मौत की सजा?

इजराइल में मौत की सजा का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन 1962 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई. आखिरी बार नाजी युद्ध अपराधी एडोल्फ आइखमैन को मौत की सजा दी गई थी. ऐसे में यह नया कानून एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव माना जा रहा है.

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